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5 हजकां विधायकों की सदस्यता रद्द

Thu, 09 Oct 2014 08:08 PM IST
सुरजीत सिंह सत्ती/अमर उजाला, चंडीगढ़
सुरजीत सिंह सत्ती/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 09 Oct 2014 08:08 PM IST
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HJC 5 MLAs Membership Cancelled

वर्ष 2009 में हरियाणा जनहित कांग्रेस (हजकां) बीएल की टिकट पर चुनाव जीत कर विधानसभा पहुंचे पांच विधायकों की सदस्यता रद्द कर दी गई है। हाइकोर्ट ने वीरवार को ये फैसला सुनाया।

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हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि हजकां का कांग्रेस में विलय, विलय नहीं है। दलबदल कानून के तहत इन पर कार्रवाई बनती है, इसलिए इनकी सदस्यता रद की जाती है।
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गौर हो कि हजकां प्रमुख कुलदीप बिश्नोई की याचिका पर दोनों पक्षों को सुनने के बाद जस्टिस के कानन की बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।

कांग्रेस या हजकां एक पर पड़ेगा प्रभाव

HJC 5 MLAs Membership Cancelled

हरियाणा के मौजूदा विधानसभा चुनाव में यह फैसला विशेष महत्व रखता है। कांग्रेस या हजकां में से किसी एक पर इस फैसले का प्रभाव निश्चित तौर पर पड़ेगा। हजकां प्रमुख समेत पार्टी के छह विधायक चुनाव जीते थे।

इनमें असंध से जिले राम शर्मा, समालखा से धर्म सिंह छोक्कर, दादरी से सतपाल सांगवान, नारनौल से राव नरेंद्र सिंह और हांसी से विनोद भ्याणा हजकां के विधायक बने थे। इन पांचों विधायकों ने कांग्रेस का दामन थाम लिया था और जिले राम को छोड़कर बाकी चारों कांग्रेस की टिकट पर इस बार उन्हीं विधानसभा हलकों से भाग्य आजमा रहे हैं।

कंबोपुरा के सरपंच करम सिंह की मौत के मामले में जिले राम शर्मा के खिलाफ सीबीआई जांच चल रही है। कांग्रेस से उन्हें टिकट नहीं मिला था, वह आजाद प्रत्याशी के तौर पर असंध से मैदान में हैं। बिश्नोई ने विधानसभा स्पीकर के समक्ष इन विधायकों के  खिलाफ दलबदल कानून के तहत कार्रवाई कर सदस्यता रद्द करने की याचिका दायर की थी।

लंबे समय से अटका हुआ था मामला

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स्पीकर के पास यह मामला लंबे समय तक लटका रहा और पिछले साल स्पीकर कुलदीप शर्मा ने बिश्नोई की याचिका खारिज कर दी थी। स्पीकर ने फैसले में कहा था कि इन विधायकों का कांग्रेस में आना हजकां का कांग्रेस में विलय है।

इस दलील के साथ उनके कांग्रेस में आने को स्पीकर ने सही ठहराया था। स्पीकर के इस फैसले के खिलाफ बिश्नोई ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में कहा था कि स्पीकर ने यह याचिका राजनीतिक द्वेष के कारण खारिज की।

हजकां अभी भी चुनाव आयोग के पास पंजीकृत पार्टी है और उसका एक विधायक भी है। जिस समय फैसला सुनाया गया, उस वक्त हजकां का एक सांसद भी था।

बिश्नोई ने स्पीकर का फैसला रद्द करने की मांग की थी और पांचों विधायकों की सदस्यता रद्द करने की गुहार लगाई थी। पैरवी में स्पीकर और विधायक अपने तर्क पर स्थिर रहे।

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