{"_id":"5791bcbe4f1c1b1a7fc4d24f","slug":"historical-decision-of-kalanaur-panchayat-anti-drug-campaign-of-panchayat-haryana","type":"story","status":"publish","title_hn":"सराहनीय पहल: युवाओं को नशे से बचाने के लिए पंचायत का ऐतिहासिक फैसला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सराहनीय पहल: युवाओं को नशे से बचाने के लिए पंचायत का ऐतिहासिक फैसला
ब्यूरो/अमर उजाला, कलानौर(हरियाणा)
Updated Sat, 23 Jul 2016 11:23 AM IST
विज्ञापन
महापंचायत
- फोटो : amar ujala
गांव में अगर डीजे बजा, किसी ने जुआ खेला, शराब और धूम्रपान किया तो उस पर 11 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। कलानौर के गांव खैरड़ी की पंचायत ने युवाओं को गलत संगत से बचाने के लिए यह ऐतिहासिक फैसला लिया है। गांव में अगर डीजे बजा, किसी ने जुआ खेला, शराब और धूम्रपान किया तो उस पर 11 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। पंचायत ने यह फैसला कलानौर में पांच साल की मासूम बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म के मामले को गंभीरता से लेते हुए लिया है।
बृहस्पतिवार सुबह गांवों के युवा वर्ग को गलत संगत से बचाने के लिए गांव के प्राइमरी स्कूल में एक पंचायत हुई। इसकी अध्यक्षता खैरती लाल बतरा ने की। पंचायत शुरू होने से पहले गांव के सरपंच ने मासूम के साथ हुई दरिंदगी पर दुख प्रकट किया। सरपंच ने बताया कि इस तरह की घटनाओं के लिए बच्चों की गलत आदतें जिम्मेदार हैं। स्कूली जीवन में ही बच्चे शराब, धूम्रपान और जुआ जैसी गलत आदतों में फंस जाते हैं।
ऐसे में अभिभावकों का भी फर्ज बनता है कि वे बच्चों को अच्छे संस्कार दें। सरपंच भूपेंद्र ने कहा कि गांव की शांति बिगाड़ने में डीजे का भी अहम रोल है। इस पर भी प्रतिबंध लगाना चाहिए। इस पर पूरे गांव ने अपनी सहमति जताते हुए निर्णय लिया कि गांव में डीजे बजाने, सार्वजनिक स्थान पर जुआ खेलने और शराब का सेवन करने वाले पर 11 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। पंचायत में यह भी निर्णय लिया गया कि एक अगस्त तक अगर सरकारी स्कूल में अध्यापकों की कमी को पूरा नहीं किया गया तो वे अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
बृहस्पतिवार सुबह गांवों के युवा वर्ग को गलत संगत से बचाने के लिए गांव के प्राइमरी स्कूल में एक पंचायत हुई। इसकी अध्यक्षता खैरती लाल बतरा ने की। पंचायत शुरू होने से पहले गांव के सरपंच ने मासूम के साथ हुई दरिंदगी पर दुख प्रकट किया। सरपंच ने बताया कि इस तरह की घटनाओं के लिए बच्चों की गलत आदतें जिम्मेदार हैं। स्कूली जीवन में ही बच्चे शराब, धूम्रपान और जुआ जैसी गलत आदतों में फंस जाते हैं।
विज्ञापन
ऐसे में अभिभावकों का भी फर्ज बनता है कि वे बच्चों को अच्छे संस्कार दें। सरपंच भूपेंद्र ने कहा कि गांव की शांति बिगाड़ने में डीजे का भी अहम रोल है। इस पर भी प्रतिबंध लगाना चाहिए। इस पर पूरे गांव ने अपनी सहमति जताते हुए निर्णय लिया कि गांव में डीजे बजाने, सार्वजनिक स्थान पर जुआ खेलने और शराब का सेवन करने वाले पर 11 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। पंचायत में यह भी निर्णय लिया गया कि एक अगस्त तक अगर सरकारी स्कूल में अध्यापकों की कमी को पूरा नहीं किया गया तो वे अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे।
विज्ञापन