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Hindi News ›   Chandigarh ›   Hindi Hain Hum Amar Ujala, Interesting Poems on Life and Struggle

हिंदीहैंहम: सुख की चाहत है तो प्यारे, दु:ख को हंसकर सहना सीखो... पढ़ें दिलचस्प रचनाएं

Sat, 12 Sep 2020 10:42 AM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Sat, 12 Sep 2020 10:42 AM IST
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Hindi Hain Hum Amar Ujala, Interesting Poems on Life and Struggle
Hindi Hai Hum - फोटो : अमर उजाला
‘हिंदी हैं हम अभियान’ का कारवां ट्राइसिटी में निरंतर आगे बढ़ रहा है। कामकाजी महिलाएं हों या गृहिणी, युवा हों या बुजुर्ग, विद्यार्थी हों या शिक्षक सब खुलकर अपने विचार रख रहे हैं। शुक्रवार को भी काफी संख्या में पाठकों ने अपनी रचनाएं भेजीं। उनमें से चुनिंदा को ही हम यहां प्रकाशित कर रहे हैं।
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दो दिन बाकी ...आप भी भेजिए अपनी रचना
हिंदी हैं हम अभियान के तहत पाठकों की रचनाएं 13 सितंबर को दोपहर 12 बजे तक स्वीकार की जाएंगी। आपके पास मौका है अपनी रचनाएं भेजने का। यदि आपकी भेजी गई रचना प्रकाशित नहीं हुई है तो आप दोबारा भेज सकते हैं। वक्त और समयसीमा का विशेष ध्यान रखें।
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बहुत हुआ, तुम क्या समझते हो?

बहुत हुआ, तुम क्या समझते हो?
तुम अपने को अफसर और हमको नौकर समझते हो?
बहुत कर ली तुमने मनमर्जी, अब हमारी बारी आई है।
अब मुझे भी समझ आई है, क्योंकि मेरी कलम में, मेरी ही स्याही है।
नहीं करने दूंगा अब कोई बेईमानी, बहुत कर चुके तुम अपनी मनमानी।
अपने कुशासन को, तुमने अच्छा सुशासन बताया
घोंट दिया है तुमने, उन मजदूरों के अधिकार को
अरे! अब तो शर्म करो।
शिक्षित कर उन मजदूरों को, हमें सबको जगाना है।
संकीर्ण मानसिकता में, बदलाव हमें ही लाना है।
करेंगे अंत, तुम्हारी इन नीतियों का हम।
यही हम सबने मिलकर ठाना है।
- सुनील कुमार, विद्यार्थी जीरकपुर

अवलोकन....

कला दीर्घा में प्रतिष्ठित कलाकारों के चित्रों की प्रदर्शनी चल रही थी।
फोटोग्राफर ने एक मार्मिक दृश्य को अपने कैमरे में कैद किया था।
कूड़े के ढेर पर नन्हीं बच्ची पड़ी थी, प्रतीत हो रहा था अब मरी कि तब मरी थी।
कुछ दूरी पर एक गिद्ध उसके मरने की बेसब्री से प्रतीक्षा कर रहा था।
उस सजीव फोटो के नीचे फोटोग्राफर का नाम-पता लिखा था।
मैंने फोटोग्राफर को फोन लगाया और बताया,
इस फोटो में सबकुछ सजीव है, परंतु एक बात को छिपाया है।
वहां पर दो गिद्ध मौजूद हैं, पर एक को दिखाया है।
पहला खाने के लिए डकार रहा है दूसरा उस मार्मिक क्षण को अपने कैमरे में उतार रहा है।         
- अर्चना देव, अभियंता, 830 सेक्टर-16, पंचकूला
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बजता रहे बस यूं ही ये साज जिंदगी का

बजता रहे बस यूं ही ये साज जिंदगी का।
अंजाम तक न पहुंचे ये आगाज जिंदगी का।
इस जिंदगी ने जाने कितनों को रौंद डाला।
न जान सका फिर भी कोई राज जिंदगी का।
लो बुलंदियों पे पहुंचा आखिर वो गिरा नीचे।
लेकिन न बन सका कभी सरताज जिंदगी का।
ज्योतिषी भी न कर सके इलाज जिंदगी का।
इस जिंदगी को पाने हम भी चले थे साहिल।
लेकिन समझ सके ना अंदाज जिंदगी का।
- अशोक साहिल, सेवानिवृत्त सेक्टर- 11 पंचकूला

वक्त दिखाई नहीं देता...

वक्त दिखाई नहीं देता, पर बहुत कुछ सिखा देता है
वक्त पर हर काम करना है जरूरी
नहीं तो जिंदगी न देगी खुलकर जीने की मंजूरी
निकल जाए वक्त हाथ से तो पछतावा रह जाए साथ में
वक्त दिखाई नहीं देता, पर बहुत कुछ दिखा देता है
यूं तो रिश्तेदार बहुत है, पर वक्त पर निभाता कोई नहीं
साथ हर कोई देने को कहता है, पर देता कोई नहीं
वक्त दिखाई नहीं देता, पर बहुत कुछ दिखा देता है
- प्रिया, गृहिणी चंडीगढ़

महकी बगिया जब वो आए...

महकी बगिया जब वो आए, आंगन भी गुलजार हुआ है
झुक गई डाली जानें क्यों, फूलों का भी भार हुआ है
अस्मत अपनी रखकर गहनें, पहनें थी वो कुछ तो गहनें
खोजा करती आंखों में वो, अब इज्जत का व्यापार हुआ है
मिट्टी हो गई भूरी-भूरी, ऐसी भी थी क्या मजबूरी
हरियाली ने दमन छोड़ा, क्योंकि अब थार हुआ है
पतझड़ में तो पत्ते गिरते, फूल गिरे बे-मौसम में
तोड़ी कलियां जानें क्यों, अंगों का व्यापार हुआ है
नाम जीत का बेजार हुआ, गुल से अब वो खार हुआ है
फिर लोग थे उसके संग, कैसा वो गम खार हुआ है
- स्वर्णजीत सिंह, वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी सीएसआईओ

सुख की चाहत है तो प्यारे...

सुख की चाहत है तो प्यारे, दु:ख को हंसकर सह जाना सीखो।
आशिक अगर बहारों के तो, खिजां को भी अपनाना सीखो।
मोती कब मिलते साहिल पे, बीच भंवर के जाना सीखो।
मुट्ठी में भरने मोती तो, लहरों से टकराना सीखो।
दृढ़ निश्चय कर आगे बढ़ना, संकटों से भिड़ जाना सीखो।
हिम्मत को ढाल बना अपनी, हर दुश्मन मार गिराना सीखो।
लक्ष्य अगर महान ‘संजीव’ तो दुनिया को ठुकराना सीखो।
आसमान होगा कदमों में, बस जिद पर अड़ जाना सीखो।
- संजीव शर्मा, हिंदी अध्यापक खटौली
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