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Hindi News ›   Chandigarh ›   Hindi Hain Hum Amar Ujala, Interesting Poems on Hindi Diwas

#हिंदीहैंहमः जन-जन की भाषा हिंदी, हम सबके मन की भाषा हिंदी... पढ़ें कुछ दिलचस्प रचनाएं

Mon, 14 Sep 2020 09:47 AM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Mon, 14 Sep 2020 09:47 AM IST
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Hindi Hain Hum Amar Ujala, Interesting Poems on Hindi Diwas
हिंदी हैं हम - फोटो : Amar Ujala
अमर उजाला के ‘हिंदी हैं हम’ अभियान की अपार सफलता के लिए पाठकों का धन्यवाद। अभियान के तहत आयोजित हिंदी लेखन कार्यक्रम के तहत करीब 300 ई-मेल हमें प्राप्त हुए। रविवार दोपहर 12 बजे तक जो रचनाएं प्राप्त हुई हैं, उन्हें भी शामिल किया गया है।
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इतनी संख्या में आई मेल इस बात की तस्दीक करती हैं कि ट्राइसिटी के लोगों को हिंदी भाषा से कितना प्रेम है। वे हिंदी में लिखना और पढ़ना चाहते हैं। भले ही आपकी रचनाएं प्रकाशित हुई हैं या नहीं, लेकिन लिखते रहिए। आज नहीं कल आपकी रचनाओं को जरूर पढ़ा जाएगा। सभी के प्रयास सराहनीय रहे हैं।
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दौर कोशिशों का
दौर कोशिशों का जब थमा नहीं, पूछ लिया तब हमने मंजिलों से ही
क्या कमी रही हमारी पहुंचने में?  फरमाया कुछ इस तरह उन्होंने
जरूरी नहीं कमी हो बस तुझ में ही जहां खत्म हो जाएं पैमाने कोशिशों के ही
वहां मंजिलों को भी संवरने में वक्त लगता है
- पूजा रेक्वाल, बलटाना

धन्यवाद
सुबह चाय की चुस्की लेते हुए जब मैं और मेरा परिवार आंगन में बैठे होते हैं तो हमारे दरवाजे पर दस्तक देता हुआ अमर उजाला हम सबमें खुशी की लहर भर देता है। सब एक साथ बैठकर अखबार पढ़ते हैं। यह समय मेरे लिए सबसे अच्छा होता, जिसमें हम देश और परिवार दोनों से जुड़ जाते हैं और साथ बैठकर अपने विचारों पर चरचा करते हैं। धन्यवाद अमर उजाला। हमें अपनों से जोड़े रखने के लिए।
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- हर्ष शर्मा, गांव खंगेसरा पंचकूला

एक बार मैंने जिंदगी से पूछा बचपन क्या है?

बचपन
एक बार मैंने जिंदगी से पूछा बचपन क्या है?
उसने जवाब दिया, जब ना तो कोई जरूरत थी
और ना ही कोई जरूरी था। जब जहां चाहे हंस लेते थे
और जहां चाहे रो लेते थे। जब ना तो कोई टेंशन थी
और ना ही कल क्या होगा, इसकी फिक्र। यह था हमारा बचपन
जब हर छोटी बात पर कट्टी कर लेते थे और फिर दो मिनट बाद
अब्बा हो जाती थी। यह था हमारा बचपन
अब कहां रही वो खुशियां और कहां रहा वह बचपन
जो बचा है वह हैं बचपन की धुंधली यादें
अब ना तो हसीन जिंदगी बची है और ना सुनहरे पल
बस एक ख्वाहिश बची है काश! मुझे फिर मिल जाए बचपन
- वसुंधरा चौधरी, विद्यार्थी, मोहाली

हिंदी मेरा स्वाभिमान है, हिंदी मेरी पहचान है

हिंदी
हिंदी मेरा स्वाभिमान है, हिंदी मेरी पहचान है
जन-जन की भाषा हिंदी, हम सबके मन की भाषा हिंदी
हिंद के वासी है हम, हिंदी भाषी हैं हम
हिंदी अ-अज्ञानी से शुरू होती और ज्ञ- ज्ञानी बनाती है
मातृभाषा हम सबको स्वाभिमानी बनाती है
गर्व से कहो हिंदी हैं हम, क्या किसी से कम हैं हम
यह भाषा संपूर्ण समृद्ध है, हिंदी विदेशों में भी प्रसिद्ध है
आज संसार बोल रहा है हिंदी, लेकिन भारत के लोग ही हिंदी बोलने में शर्म आते हैं
और विदेशी भी हमारी भाषा अपनाते हैं
- सुनील भारतीय, विद्यार्थी चंडीगढ़

बड़ा गुमान था मुझको मेरे होने पे

घमंड
बड़ा गुमान था मुझको मेरे होने पे
बिना जुर्म घर में ही सजा हो गई पूछना किसके कहने पे।
मसरूफ था, मगरूर था, पल भर की फुर्सत ना थी अपने ना अपनों के लिए
आज बाजार भी जाता हूं तो कोतवाल के कहने पर
बिना जुर्म घर में ही सजा हो गई पूछ ना किसके कहने पे।
बड़ा गुमान था मुझको मेरे होने पे
कुछ मुझसे और भी थे जो इतराते थे अपने परमाणु पे,
एक बम भी काम ना आया इस नन्हे विषाणु पे
धन-दौलत, ताकत, वैभव कुछ काम ना आया जिंदा हैं भगवान भरोसे पे
बिना जुर्म घर में ही सजा हो गई पूछना किसके कहने पे
बड़ा गुमान था मुझको मेरे होने पे
- सुशील पांडेय, चंडीगढ़

जमीन पर दुआओं की अर्चना...

सीमा के प्रहरी
जमीन पर दुआओं की अर्चना, आसमान में ताकत की गर्जना
राफेल-तेजस-ध्रुव के हैरत अंग्रेज कारनामों ने जल-थल-नभ में देश के सैन्य बलों को नई ऊंचाई दी
देश के रक्षा क्षेत्र को मजबूत किया, पाक-चीन की सीमाएं थर्रा गईं, इसकी गूंज हिमालय के पार भी सुनाई दी
राफेल के बाद तेजस की जांबाजी आसमान को इस तरह छुआ
कल मास्क लगे चेहरे का कलेजा मुंह को आ लगा
सारंग एयरोबैटिक का ध्रुव हेलीकाप्टर वायुसेना का गिद्ध पक्षी है, जो जेएफ-17 और चीनी ड्रैगन का भक्षी है
बुद्ध देशवासी युद्ध नहीं जानते, पंचशील को भी मानते लेकिन जो एक फिंगर दिखाता तो 4-फिंगर तक खा जाते
पैंगोंग झील को बांधते हैं, सामरिक चोटियों पर पहुंच कर पहले झंडा गाड़ते हैं
- आदर्श ओझा, पंचकूला

चाहत मेरे दिल की...

नहीं बनना मुझे फूल, जिंदगी में तेरी
जो खिलेगा, महकाएगा तुझे
पर कुछ पल में टूट कर बिखर जाएगा
सारी उम्र आकर याद तुझे तड़पाएगा
मुझे तो बनना है पत्थर जिंदगी में तेरी
हर मुश्किल से टकरा कर भी
जो साथ तेरा निभाएगा
हर रस्ते में आकर तेरे पांव तले
तुझे राह सही दिखलाएगा
तू जितना भी चाहे दुत्कारना इसे
तेरे आंगन की फुलवारी को
सबसे जो बचाएगा
तू रहना मस्त फूलों संग
ये दूर खड़ा मंद मंद मुस्कुराएगा
कभी आजमा के मेरे प्यार को
ये तन्हाई में भी तुझे हंसाएगा
यहां छोड़ दी दुनिया साथ तेरा
मेरा इश्क कब्र में भी साथ तेरे जाएगा
- प्रभजोत कौर, मोहाली

मिला मैं उस शख्स से जिसे सबसे अमीर होना चाहिए

किसान
मिला मैं उस शख्स से जिसे सबसे अमीर होना चाहिए
घर में था अंधेरा, चूल्हे का पता नहीं था कि बनेगा या भी नहीं कुछ
यह भी ना पता बैठा वो शख्स बहुत उदास था दिखाई देके भी नहीं दिखता
जैसा खुदा है वैसा ही अपना आज हर किसान है
सबके पेट का अन्न बोता है पर खुद के लिए तरसता है
ऊपर वाले से मैं नाराज हूं सबको एक जैसा ही समझ क्यों ना दी
सबको बराबरी क्यों ना दी आज बहुत लाचार है वो
बारिशों से भी कुछ वो नाराज सा है।
वक्त से पहले या वक्त के बाद हो रही है
इतना लाचार है कहे तो कहे किसको सब यह झूठी तसल्लियों की सरकार है
आज ये सरकार है तो कल वो पर किसान का वो ही हाल है
मिला मैं उस शख्स से जिसे सबसे अमीर होना चाहिए
- आलोक कुमार, पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़

नमस्कार मैं हूं अखबार...

अखबार
नमस्कार मैं हूं अखबार, रोज लाता हूं आपके लिए खबरों का भंडार
सारी दुनिया की खबरें आप तक लाऊं
आपकी आवाज बनकर आपका संदेश जनता तक पहुंचाऊं
फसल हुई बर्बाद, मानसून भटक रहा है
भ्रष्ट नेता भी अखबार की ताकत से डर रहा है
अफसर गहरी नींद में, बेरोजगारी बढ़ रही है
कहीं कचरे के ढेर में नवजात मिल रही है
कहीं चोरी, कहीं कोई राजनेता का बना जमूरा
बिना अखबार के लगता है अब दिन अधूरा
मैं जनता की ताकत, बुराई पर हावी हूं
मैं हूं अखबार मैं आपका रोज का साथी हूं
- चेतन नेगी, जीरकपुर

हिंदी की झंकार...

भाषाओं में भटका जब, तब देती मुझको प्यार हिंदी
सत्यम शिवम सुंदरम का लगती मुझको सार हिंदी
अतीत में जो सीखी वाणी सरस्वती की धार हिंदी
भारत माता के गले में मोतियों का हार हिंदी
महसूस करो मन-मंदिर में साहित्य की झंकार हिंदी
दूर-दूर के जन को जोड़े दूरभाष के तार हिंदी
कड़ीबद्ध हो जाए मनुष्य कर रही पुकार हिंदी
विश्व-कर्ण में ठहर-ठहर कर मीठी गुंजार हिंदी
गोद में लेकर मुझको भी आनंद में उतार हिंदी
बोलियों में बोली का है भारत का आधार हिंदी
भारत का आधार हिंदी
- डॉ. अश्विनी शांडिल्य, असिस्टेंट प्रोफेसर, हिंदी, चंडीगढ़

चट्टान क्या है तू, पर्वत भी हिला देगा

मजबूत इरादे
चट्टान क्या है तू, पर्वत भी हिला देगा
मजबूत इरादों को, बना कर तो देख
लहरें लौट जाएंगी, छूके कदम तेरे
साहिल पे पैर अपने जमा कर तो देख
खुद-ब-खुद काफिला बनता चला जाएगा
प्यार से एक हाथ तू बढ़ा कर तो देख
दरिया कामयाबी का, बहे ना तो कहना
मेहनत का पसीना तू बहा कर तो देख
मुसीबतें ढह जाएंगी ताश के पत्तों सी
बुलंद हौसलों की आंधी चलाकर तो देख
- राशि श्रीवास्तव, चंडीगढ़

क्या कहूं मैं पापा...

क्या लिखूं मैं आपके बारे में, आप तो मेरी कलम हो
जिसने मेरा सुनहरा भविष्य, अपने त्याग से लिखा है
क्या कहूं मैं आपके बारे में
आप तो मेरी जुबां हो
जो एक दिन सारी दुनिया में गूंजेगी
क्या बताऊं आप की पहचान
मेरे घर में उस मंदिर में रखे
देवता से बढ़कर हो आप
क्या लिखूं मैं आपके बारे में
मुझे डर है कि कहीं लिखते-लिखते
दुनिया के सभी पन्ने न भर जाएं
क्योंकि बचपन से अब तक जो आपने दिया है
मेरे लिए जो किया है, उसे पन्नों में उतारना नामुकिन है
- प्रियंका, विद्यार्थी चंडीगढ़

जीवन का आधार वृक्ष हैं...

वृक्ष
जीवन का आधार वृक्ष हैं, धरती का शृंगार वृक्ष हैं
प्राण वायु दे रहे सभी को, ऐसे परम उदार वृक्ष हैं
ईश्वर के अनुदान वृक्ष हैं, फल फूलों की खान वृक्ष हैं
मूल्यवान औषधियां देते, ऐसे दिव्य महान वृक्ष हैं
देते शीतल छांव वृक्ष हैं, रोकते थकते पांव वृक्ष हैं
लाखों जीव बसेरा करते, जैसा सुंदर गांव वृक्ष हैं।
- प्रभुनाथ शाही, पूर्व फ्लाइट इंजीनियर, भारतीय वायुसेना
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