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Hindi News ›   Chandigarh ›   Hindi Diwas 2021: Young Writers says Hindi Easiest Way to Express Feelings 

Hindi Diwas 2021: युवा लेखकों की राय, मातृभाषा भावनाओं को व्यक्त करने का सबसे आसान तरीका

Tue, 14 Sep 2021 10:44 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 14 Sep 2021 10:44 AM IST
सार

युवा लेखकों का कहना है कि हिंदी में लिखना हमारे लिए आसान होता है, क्योंकि मातृभाषा होने के कारण मन में भाव हिंदी में ही आते हैं। अंग्रेजी में लिखने के लिए हमें उन भावों का अनुवाद करना पड़ता है। जिससे अर्थ का अनर्थ हो जाता है।

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Hindi Diwas 2021: Young Writers says Hindi Easiest Way to Express Feelings 
हिंदी दिवस 2021 - फोटो : प्रतीकात्मक

विस्तार

हिंदी को लेकर युवाओं में भी काफी उत्साह है। अपनी रचानाओं और लेखों मं भी युवा हिंदी को ही प्रमुखता देते हैं। युवाओं का कहना है कि अपने भावों को व्यक्त करने के लिए हिंदी से बेहतर माध्यम कुछ नहीं हो सकता है। चंडीगढ़ में अंग्रेजी का चलन होने के बावजूद हिंदी में ही युवा अपने आपको सहज महसूस करते हैं।

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उन्होंने बताया कि हिंदी में लिखना हमारे लिए आसान होता है, क्योंकि मातृभाषा होने के कारण मन में भाव हिंदी में ही आते हैं। अंग्रेजी में लिखने के लिए हमें उन भावों का अनुवाद करना पड़ता है। जिससे अर्थ का अनर्थ हो जाता है। इसके साथ ही हिंदी आम लोगों के बोलचाल की भाषा है, जिस कारण हमारे विचार समझने वाले और पढ़ने वाले पाठक भी अधिक हैं।
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कवियों ने कविताओं से जगाई हिंदी के प्रति अलख
युवा लेखक आशीष द्विवेदी ने तीन साल पहले सॉल टॉक संस्था की शुरुआत की। आशीष ने बताया कि जब उन्होंने काव्य संगोष्ठियों में जाना शुरू किया तो उन्होंने देखा कि युवा हिंदी में शायरी और कविताएं लिख रहे हैं, लेकिन युवा हिंदी के अच्छे साहित्य से दूरी बनाए हुए हैं जिससे उनके लेखन और भाषा में परिपक्वता नहीं है। युवाओं को पुराने हिंदी के लेखकों और साहित्य से जोड़ने के लिए सॉल टॉक की स्थापना की। इसमें लॉकडाउन से पहले चंडीगढ़ के पार्कों और कैफे में कविता सम्मेलन करवाते थे। इसमें वरिष्ठ लेखकों के लेखन पर चर्चा, कविता गायन और स्वयं लिखित कविता पाठ इत्यादि गतिविधियां करवाते थे। इसके साथ ही सेक्टर-17 प्लाजा में पहले लोगों को एकत्रित करते थे, इसके बाद नुक्कड़ काव्य नाटक करते थे। इसमें रामधारी सिंह दिनकर जैसे लेखकों की कविताओं को ढपली के साथ अभिनय कर सुनाते थे जिससे लोगों की हिंदी साहित्य में रूचि बढ़ सके।

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लघु कहानियां और कविताओं पर कर रहा हूं काम

मैं लघु कहानियां और कविताएं लिखता हूं। मेरी बोलने और पढ़ने की भाषा हमेशा हिंदी रही है। इसलिए मैं हिंदी में काम करने में अधिक सहज हूं। हिंदी में विचार आते हैं, इसलिए उन्हें व्यक्त भी उसी भाषा में करना आसान रहता है। अन्य भाषा में लिखने के लिए मुझे अपने भावों का अनुवाद करना पड़ेगा। - सौरभ, युवा लेखक

शिक्षिका का डर फिर भी सीखी हिंदी
स्कूल में हिंदी की शिक्षिका काफी गुस्सा करती थीं, इसलिए हिंदी का विषय पढ़ने में कोई दिक्कत या समस्या आने पर पूछने में डर लगता था। इसलिए उस दौरान हिंदी को इतनी तवज्जो नहीं दे पाई, लेकिन कॉलेज में आने के बाद हिंदी में कविताएं लिखनी शुरू कीं। कॉलेज में हिंदी के आलेख और किताबें पढ़ना भी शुरू किया। हिंदी के शब्द ज्यादा आकर्षित करते हैं, इसलिए मैंने लिखने का माध्यम हिंदी को चुना है। - निशा, युवा लेखक

ऐतिहासिक लेखन में हिंदी बेहतर भाषा
मैंने स्कूल में हिंदी के साथ पंजाबी भी पढ़ी है। दोनों भाषाओं के लोगों के साथ रहा हूं। इसलिए दोनों ही भाषाओं में लेखन कार्य करता हूं। ऐतिहासिक विषयों और प्रेम से ओतप्रोत विषयों पर कविताएं लिखने के लिए हिंदी का प्रयोग करता हूं। क्योंकि इसे समझने वाले लोग अधिक है। आम इंसान की भाषा हिंदी है। वहीं मुझे इतिहास पढ़ना पसंद है, इसके लिए मैं हिंदी और अंग्रेजी दोनों किताबें पढ़ता हूं। - अमन मलिक, युवा लेखक

पेशे से इंजीनियर..लिखा हिंदी काव्य संग्रह
पेशे से मैं सॉफ्टवेयर इंजीनियर हूं, लेकिन मुझे साहित्य पढ़ना और कविताएं लिखना पसंद है। मैंने पिछले दो सालों में लिखी 74 कविताओं के एक काव्य संग्रह प्रेम का प्रमेय को प्रकाशित भी करवाया है। इसमें ज्यादातर प्रेम से ओतप्रोत कविताएं ही हैं। इंजीनियरिंग की पढ़ाई अंग्रेजी माध्यम से थी, लेकिन स्कूल हिंदी माध्यम रहा है। इसलिए लिखने और बोलने में हिंदी ही मेरे लिए अनुकूल है। - आशीष द्विवेदी, युवा लेखक

अंग्रेजी की छात्रा हूं, कविताएं और शायरी लिखना पसंद 

अंग्रेजी की छात्रा होने के बावजूद मैं कविताएं और शायरी हिंदी में लिखना पसंद करती हूं। हिंदी में अपने भाव व्यक्त करना ज्यादा आसान है। हिंदी साहित्य में मुझे काफी रुचि है। इसलिए रेखता एप का भी उपयोग करती हूं। -स्वाति, छात्रा, अंग्रेजी विभाग, पीयू

पाश्चात्य सभ्यता धीरे-धीरे हिंदी को रही जकड़ 
हिंदी हमारी मातृभाषा है, लेकिन लोग पश्चिमी सभ्यता को पकड़े हुए आगे बढ़ रहे हैं। अंग्रेजी को वह अपने संस्कार व प्रतिष्ठा की भाषा मानकर बैठे हैं जबकि हिंदी से उनका कद कितना बढ़ता है यह भूल जाते हैं। -अनुज शर्मा, पीयू का पूर्व छात्र, निवासी सेक्टर 20

हिंदी बोलने वाले को समझा जाता है पिछड़ा
नए भारत में जब कोई हिंदी में बात करता है तो उसे पिछड़ा हुआ व्यक्ति मानने लगते हैं। वहीं, अंग्रेजी में बात करने वाले सभ्य और शिक्षित माने जाते हैं। हमारे संस्कार हमारी भाषा से दिखते हैं। इसलिए हिंदी को अपने सम्मान के लिए उपयोग करें। -हर्षित गांधी, पीयू का पूर्व छात्र, निवासी सेक्टर- 37

आज भी वर्णमाला पूरी कंठस्थ है
हिंदी के प्रति इतना प्रेम है कि आज भी हिंदी वर्णमाला पूरी तरह से कंठस्थ है। परिवार वालों और दोस्तों के साथ उसी भाषा में बातचीत करती हूं, जिसमें दूसरा व्यक्ति सहज महसूस करता है, ताकि वह व्यक्ति सहजता से अपनी बात रख सके। -रविंदर कौर, शोधार्थी, अंग्रेजी विभाग पीयू

आपस में घुली हैं उर्दू और हिंदी 

हिंदी मौखिक संचार तक सीमित हो गई है। हिंदी को अधिक लोकप्रिय बनाया जा सकता है, लेकिन उसकी पहल हमें ही करनी होगी। मेरे घर में उर्दू बोली जाती है। उर्दू और हिंदी आपस में घुली हुई है, इसलिए मै दोनों ही भाषाओं का साहित्य लिखता पढ़ना जानता हूं। -जुल्फिकार, छात्र, निवासी सेक्टर- 23

हिंदी की बात ही कुछ और है

विश्वविद्यालय में माहौल अंग्रेजी का होता है, लेकिन छात्र आपस में हिंदी का प्रयोग करना बेहतर समझते हैं। जब मौजमस्ती करनी होती है, तब हिंदी का ही प्रयोग करते हैं। अपने भावों को हिंदी से ही व्यक्त कर सकते हैं। -शिफा, बायोटैक विभाग, पीयू
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