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Hindi Diwas 2021: प्रथम पाठशाला से शुरू हो हिंदी का पाठ, तब अगली पीढ़ी समझेगी इसकी दरकार

Tue, 14 Sep 2021 10:26 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 14 Sep 2021 10:26 AM IST
सार

दूसरों की चीज हमें बहुत अच्छी लगती है। हिंदी के साथ भी यही है। विदेश में लोग हिंदी बोलने व लिखने का प्रशिक्षण ले रहे हैं और हम उसे दरकिनार कर दूसरी भाषा के पीछे भाग रहे हैं।

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Hindi Diwas 2021: Parents Should Teach Hindi to their Children from Childhood
हिंदी दिवस 2021 - फोटो : प्रतीकात्मक

विस्तार

कहते हैं बच्चों की प्रथम पाठशाला घर और गुरु मां होती है। मां बच्चों को जो पाठ घर की पाठशाला में पढ़ाती हैं, उसे ताउम्र याद रहता है। इसलिए हिंदी का ज्ञान भी घर की पाठशाला से ही शुरू करना चाहिए, ताकि बच्चे को अपनी मातृभाषा के महत्व और उसके प्रयोग की समुचित जानकारी मिल सके। गृहणियों का कहना है कि वे अन्य भाषाओं का सम्मान करते हुए हिंदी में बात करने पर गर्व महसूस होता है।
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बच्चों के  साथ हिंदी में करें बात
हमें घर में बच्चों के साथ हिंदी में बात करना चाहिए, क्योंकि स्कूल में वे अंग्रेजी में बात करते हैं। अगर घर पर भी हम अंग्रेजी का ही प्रयोग करेंगे तो वे हिंदी से दूर होते जाएंगे। खासतौर पर माताओं को सक्रिय होने की जरूरत है, क्योंकि बच्चे मां के संपर्क में सबसे ज्यादा होते हैं। - ममता प्रजापति, सेक्टर 48
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मातृभाषा आज भी लड़ रही हक की लड़ाई
आज के बच्चे अंग्रेजी तो फर्राटेदार बोलते हैं, लेकिन हिंदी बोलने और लिखने में उन्हें डर लगता है। यह हम भारतीयों के लिए शर्मनाक है। हमने अपने देश को तो अंग्रेजों से आजाद करवा लिया लेकिन, हमारी मातृभाषा आज भी अपने हक की लड़ाई लड़ रही है।  -नीलम देवी, नयागांव
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विदेश में मिल रहा मान
दूसरों की चीज हमें बहुत अच्छी लगती है। हिंदी के साथ भी यही है। विदेश में लोग हिंदी बोलने व लिखने का प्रशिक्षण ले रहे हैं और हम उसे दरकिनार कर दूसरी भाषा के पीछे भाग रहे हैं। हमें बच्चों को हिंदी के महत्व की जानकारी देनी होगी, तभी वे हिंदी बोलने, लिखने में संकोच नहीं करेंगे। -परमजीत कौर, हल्लोमाजरा


बचपन से ही बोया जाए हिंदी का बीज
बच्चों की परवरिश में मां का रोल अहम होता है। हमें इस बात को समझते हुए हिंदी के विकास के लिए मिलकर संकल्प लेना होगा। मां से मिला ज्ञान बच्चों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। फिर क्यों न हम संस्कारों के साथ हिंदी का बीज भी उनमें बचपन से ही बोना शुरू करें। -कुलजीत कौर, ट्रिब्यून कॉलोनी
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