{"_id":"5bbcb08a867a5528167eb8e0","slug":"himachal-pradesh-chief-justice-suryakant-shastri-s-father-dies","type":"story","status":"publish","title_hn":"हरियाणाः हिमाचल प्रदेश के चीफ जस्टिस सूर्यकांत शास्त्री के पिता का निधन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हरियाणाः हिमाचल प्रदेश के चीफ जस्टिस सूर्यकांत शास्त्री के पिता का निधन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नारनौंद (हरियाणा)
Updated Tue, 09 Oct 2018 08:51 PM IST
विज्ञापन
चीफ जस्टिस सूर्यकांत शास्त्री
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिमाचल प्रदेश के चीफ जस्टिस सूर्यकांत शास्त्री के 90 वर्षीय पिता मदन गोपाल शास्त्री का सोमवार रात हृदय गति रुकने से निधन हो गया। मंगलवार सुबह हिसार जिले के नारनौंद हलके में स्थित उनके पैतृक गांव पेटवाड़ में उनका अंतिम संस्कार किया गया। अपने पिता की अर्थी को कंधा देने चीफ जस्टिस सूर्यकांत शास्त्री सुबह गांव पहुंचे।
विज्ञापन
चीफ जस्टिस सूर्यकांत शास्त्री अपने पिता के सबसे छोटे बेटे हैं। मुखाग्नि उनके सबसे बड़े बेटे मास्टर ऋषिकांत ने दी। अंतिम संस्कार में राज्यसभा सांसद डॉ.डीपी वत्स, चंडीगढ़ हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के चेयरमैन बिजेंद्र सिंह अहलावत, पूर्व विधायक रामकुमार गौतम, इनेलो नेता राजसिंह मोर, कैथल के सेशन जज एमएम ढोचक के अलावा हिसार व फतेहाबाद के सेशन जज सहित नारनौंद क्षेत्र के अनेक राजनीतिक व सामाजिक लोगों ने हिस्सा लिया।
विज्ञापन
संस्कृत अध्यापक के पद से रिटायर हुए थे स्व. मदनगोपाल
चीफ जस्टिस के पिता मदनगोपाल शास्त्री संस्कृत अध्यापक के पद से सेवानिवृत्त थे। वह अध्यापक के साथ-साथ अच्छे साहित्यकार व लेखक भी थे। लंबे समय तक वह अध्यापक संघ के प्रधान भी रहे। उन्होंने 14 पुस्तकें भी लिखीं। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने अपना ज्यादा समय लेखन को ही दिया। मास्टर ऋषिकांत ने बताया कि उनके पिता मदनगोपाल शास्त्री 1988 में सेवानिवृत्त हुए। वह 1963 से लेकर 1965 तक पंजाब, हरियाणा व हिमाचल प्रदेश के एक राज्य होने के दौरान पंजाब राजकीय अध्यापक संघ के प्रधान व महासचिव रहे। उन्होंने कर्मचारियों के हितों के लिए कई कार्य किए।
विज्ञापन
साहित्य के लिए उन्हें कई पुरस्कार मिले
मास्टर ऋषिकांत ने बताया कि उनके पिता के कविता संग्रह में ये कैसा हिंदुस्तान है, रागनी संग्रह में चुंदरी रंग बिरंगी, उपन्यास में कमल और कीचड़, संस्मरण में नगरी नगरी द्वारे द्वारे शामिल हैं। उन्होंने पूरी रामायण को हरियाणवी कविता में लिखा है। जिस पर हरियाणा साहित्य अकादमी के सर्वोच्च पुरस्कार, महाकवि कालिदास सम्मान से सम्मानित हुए। पंडित लख्मीचंद पुरस्कार सहित उन्हें अनेक पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया। उनके द्वारा लिखी गई रेत का बुटका कहानी को सर्वश्रेष्ठ कहानी का पुरस्कार मिला। हरियाणा पंजाब के शिक्षक आंदोलन पर शिक्षक की यथा गथा पुस्तक लिखी।
चार बेटे व एक बेटी
मदन गोपाल शास्त्री की सबसे बड़ी बेटी कमला हैं, जो गृहिणी हैं। चार बेटों में सबसे बड़े मास्टर ऋषिकांत हैं। उनके बाद डॉ. शिवकांत पेशे से छाती रोग विशेषज्ञ हैं। उनसे छोटे डॉ. देवकांत आईटीआई के इंस्ट्रक्टर पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। सबसे छोटे बेटे सूर्यकांत हिमाचल प्रदेश के चीफ जस्टिस हैं।