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हाईकोर्टः नेशनल हाइवे ही क्यों, देश की किसी भी सड़क पर नहीं होने चाहिए गड्ढे
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 31 Jul 2018 09:41 AM IST
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : File Photo
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फरीदाबाद में 3 साल के बच्चे की जान गड्ढे के कारण जाने के चलते दाखिल याचिका पर हाईकोर्ट ने एनएचएआई को फटकार लगाते हुए कहा कि नेशनल हाईवे पर गड्ढा आखिर मौजूद ही क्यों था। साथ ही कोर्ट ने कहा कि सड़क पर चलने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए और ऐसे में यह भी सुनिश्चित होना चाहिए कि देश की किसी भी सड़क पर गड्ढे न हों।
मामले की सुनवाई आरंभ होते ही हाईकोर्ट ने हरियाणा पुलिस से पूछा कि गड्ढे के लिए जिम्मेदार कौन था। इस पर टालमटोल वाला रवैया अपनाया गया और इसे हिट एंड रन का केस बताने का प्रयास किया गया। कोर्ट ने कहा कि यदि यह हिट एंड रन का केस भी था तो उस वाहन का क्यों नहीं पता लगाया गया जिसने टक्कर मारी थी।
साथ ही कोर्ट ने कहा कि वहां पर गड्ढा मौजूद था और इस गड्ढे के लिए कौन जिम्मेदार था यह कोर्ट जानना चाहती है। कोर्ट ने कहा कि सड़क पर चलने वाले इसके लिए टैक्स अदा करते हैं और ऐसे में उनकी सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। इस बीच याची ने कहा कि नेशनल हाईवे पर इस प्रकार के गड्ढे होना शर्म की बात है।
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इस पर कोर्ट ने कहा कि केवल नेशनल हाईवे ही क्यों स्टेट हाईवे और शहर व गांव की सड़कों पर भी गड्ढे नहीं होने चाहिए। कोर्ट ने हरियाणा पुलिस को दो सप्ताह का समय देते हुए जिम्मेदार लोगों के नाम सौंपने के आदेश दिए। साथ ही कोर्ट ने कहा कि यदि नाम नहीं सौंपे गए तो उस स्थिति में पुलिस को ही दोषी मान कार्रवाई की जाएगी।
यह था मामला
मनोज वधवा 10 फरवरी 2014 को वल्लभगढ़ से फरीदाबाद दोपहिया वाहन से आ रहे थे। उनके साथ उनकी पत्नी और 3 साल का मासूम पवित्र भी था। हाईवे पर उनके वाहन का बैलेंस बिगड़ गया और जब उन्होंने होश संभाला खुद को एक गड्ढे में पाया। बेटे को ढूंढ़ने का प्रयास किया तो कुछ ही दूर पर खून से लथपथ बेटा दिखाई दिया।
जब तक वे खुद को संभालते इसी बीच अचानक पीछे से आ रहे एक वाहन ने उन्हें दूसरा बड़ा दर्द दे दिया और उनकी पत्नी की दोनों टांगे कुचलता हुआ चला गया। इस दौरान पास मौजूद लोगों ने उनकी मदद करने का प्रयास किया तो पाया कि पवित्र अब इस दुनिया में नहीं रहा।
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मामले की सुनवाई आरंभ होते ही हाईकोर्ट ने हरियाणा पुलिस से पूछा कि गड्ढे के लिए जिम्मेदार कौन था। इस पर टालमटोल वाला रवैया अपनाया गया और इसे हिट एंड रन का केस बताने का प्रयास किया गया। कोर्ट ने कहा कि यदि यह हिट एंड रन का केस भी था तो उस वाहन का क्यों नहीं पता लगाया गया जिसने टक्कर मारी थी।
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साथ ही कोर्ट ने कहा कि वहां पर गड्ढा मौजूद था और इस गड्ढे के लिए कौन जिम्मेदार था यह कोर्ट जानना चाहती है। कोर्ट ने कहा कि सड़क पर चलने वाले इसके लिए टैक्स अदा करते हैं और ऐसे में उनकी सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। इस बीच याची ने कहा कि नेशनल हाईवे पर इस प्रकार के गड्ढे होना शर्म की बात है।
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इस पर कोर्ट ने कहा कि केवल नेशनल हाईवे ही क्यों स्टेट हाईवे और शहर व गांव की सड़कों पर भी गड्ढे नहीं होने चाहिए। कोर्ट ने हरियाणा पुलिस को दो सप्ताह का समय देते हुए जिम्मेदार लोगों के नाम सौंपने के आदेश दिए। साथ ही कोर्ट ने कहा कि यदि नाम नहीं सौंपे गए तो उस स्थिति में पुलिस को ही दोषी मान कार्रवाई की जाएगी।
यह था मामला
मनोज वधवा 10 फरवरी 2014 को वल्लभगढ़ से फरीदाबाद दोपहिया वाहन से आ रहे थे। उनके साथ उनकी पत्नी और 3 साल का मासूम पवित्र भी था। हाईवे पर उनके वाहन का बैलेंस बिगड़ गया और जब उन्होंने होश संभाला खुद को एक गड्ढे में पाया। बेटे को ढूंढ़ने का प्रयास किया तो कुछ ही दूर पर खून से लथपथ बेटा दिखाई दिया।
जब तक वे खुद को संभालते इसी बीच अचानक पीछे से आ रहे एक वाहन ने उन्हें दूसरा बड़ा दर्द दे दिया और उनकी पत्नी की दोनों टांगे कुचलता हुआ चला गया। इस दौरान पास मौजूद लोगों ने उनकी मदद करने का प्रयास किया तो पाया कि पवित्र अब इस दुनिया में नहीं रहा।