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समलैंगिक रिश्ता: उन्नाव से लाकर लड़की को हर हाल में अदालत में पेश करने के आदेश, हाईकोर्ट ने की अहम टिप्पणी

Sat, 06 Jan 2024 10:43 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 06 Jan 2024 10:43 AM IST
सार

पंचकूला निवासी काजल अपने पड़ोस में रहने वाली लड़की बबली से प्यार करती है। उनके अनुसार वे बालिग हैं और सहमति से साथ में रह रही थीं। बबली के नाराज परिजन जबरन उसे अपने साथ उत्तर प्रदेश ले गए थे। इसके बाद काजल ने हाईकोर्ट से गुहार लगाई। जिस पर हाईकोर्ट ने लड़की को अदालत में पेश करने के आदेश दिए थे।

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Highcourt order to produce Girl living in consensual relationship with another girl in Court
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट चंडीगढ़ - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

सहमति संबंध में रह रही दो लड़कियों में से एक को उसके परिजनों द्वारा जबरन उत्तर प्रदेश ले जाने के मामले में एक लड़की को पेश नहीं किया जा सका। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद पंचकूला पुलिस उन्नाव के गांव से उसे चंडीगढ़ नहीं ला सकी। 
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लड़की के परिजनों और गांव वालों के विरोध की दलील पर हाईकोर्ट ने कहा कि यहां सवाल एक लड़की के जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा का ही नहीं, समाज पर पड़ने वाले प्रभाव का भी है। समाज के बीच गलत उदाहरण न पेश हो इसके लिए उसे अदालत में पेश करना जरूरी है और ऐसे में पंचकूला के पुलिस कमिश्नर उन्नाव पुलिस की मदद से अगली सुनवाई पर लड़की को हाईकोर्ट में पेश करें।
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याचिका दाखिल करते हुए पंचकूला निवासी काजल ने बताया था कि वह पंचकूला में अपने पड़ोस में रहने वाली लड़की बबली से प्यार करती है। दोनों बालिग हैं और सहमति से साथ में रह रही थीं। इस बारे में जब बबली के परिजनों को पता चला तो वे जबरन बबली को अपने साथ उत्तर प्रदेश ले गए। याची की प्रेमिका ने छिपकर याची की मां को फोन किया था और पूरी बात की जानकारी दी थी। 
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कॉल के दौरान याची की प्रेमिका ने बताया कि उसके साथ जबरन कुछ भी हो सकता है। यदि वह याची से दूर रही तो मर जाएगी। पिछली सुनवाई पर हाईकोर्ट ने बबली को अदालत में पेश करने का पंचकूला पुलिस को आदेश दिया था।

तीन अलग-अलग जन्मतिथि पर उठे सवाल
हाईकोर्ट के समक्ष बबली के परिजनों ने उसका आधार कार्ड पेश किया जिसके अनुसार वह नाबालिग थी। इसके साथ ही हरियाणा पुलिस ने उन्नाव के स्कूल का स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट दिखाया जिसके अनुसार भी वह नाबालिग थी। हालांकि याची ने जो आधार कार्ड पेश किया उसके अनुसार बबली बालिग थी। ऐसे में हाईकोर्ट ने यूनिक आईडेंटीफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया को दोनों आधार कार्ड से संबंधित दस्तावेज सौंपने का आदेश दिया है।


बबली का परिवार गरीब, हाईकोर्ट ने उपलब्ध करवाया वकील
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि बबली के परिवार की आर्थिक स्थिति सही नहीं है। ऐसे में हाईकोर्ट ने बबली के परिवार को वकील उपलब्ध करवाया है और हरियाणा स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी को वकील की फीस का भुगतान करने का आदेश दिया है। साथ ही यह भी कहा है कि बबली के मेडिकल के बाद उसकी सही आयु का निर्धारण हो सकता है और ऐसा होने के बाद ही अवैध कस्टडी से जुड़ी इस याचिका की वैधता पर फैसला हो सकेगा।
 
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