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Highcourt: प्रिंट, यू-ट्यूब और इंटरनेट मीडिया साइबर अपराध की रिपोर्ट से भरा, इसे नजरअंदाज नहीं कर सकते

Fri, 05 Jul 2024 02:22 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 05 Jul 2024 02:22 PM IST
सार

हाईकोर्ट ने कहा कि साइबर अपराध पूरे देश में लोगों को प्रभावित कर रहा है, चाहे वे किसी भी धर्म, शिक्षा या वर्ग के हों। समाचार पत्र, पत्रिकाएं, यूट्यूब चैनल और यहां तक कि इंटरनेट मीडिया भी अनगिनत निर्दोष पीड़ितों की पीड़ा से भरे पड़े हैं और इन रिपोर्टों को एजेंडा के रूप में दरकिनार नहीं किया जा सकता।

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Highcourt Express concern over increasing scope of cyber crime
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

साइबर अपराध के बढ़ते दायरे पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ये अपराधी मासूम लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। हर आयु, हर वर्ग के लोग इनके निशाने पर हैं। प्रिंट, यूट्यूब व इंटरनेट मीडिया इसकी रिपोर्ट से भरा हुआ है और ऐसे में इसे नजरअंदाज नहीं कर सकते। 

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हाईकोर्ट ने अब मामले को गंभीरता से लेते हुए दूरसंचार मंत्रालय को साइबर ठगी रोकने के लिए उपाय व सुझाव केंद्रीय गृह मंत्रालय को 31 जुलाई तक सौंपने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट के समक्ष हिसार में साइबर अपराध से जुड़े मामले में आरोपी की नियमित जमानत याचिका सुनवाई के लिए पहुंची थी। याची पर आरोप है कि उसने ठगों को प्रीपेड नंबर उपलब्ध कराया और उनको एक्टिवेट करवाया। 
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हाईकोर्ट ने अब विस्तृत रिपोर्ट मंगवाई तो पता चला कि याची के नाम पर 35 सिम कार्ड जारी किए गए थे। इस पर हाईकोर्ट ने मामले का संज्ञान लेते हुए पूछा कि दूरसंचार मंत्रालय व्यक्तियों, फर्मों या कंपनियों को अपने नाम से कई प्रीपेड सिम कार्ड प्राप्त करने की अनुमति क्यों देता है?। आधार कार्ड ओटीपी जनरेशन के लिए एक ही सिम कार्ड से जुड़ा हुआ है, इसलिए कई प्रीपेड सिम कार्ड जारी करने का कोई औचित्य नहीं लगता है। प्रत्येक व्यक्ति के लिए एक ही प्रीपेड सिम कार्ड तक सीमित रखने से साइबर अपराध में कमी आने की संभावना है। दूरसंचार मंत्रालय इस तरह का प्रतिबंध लागू करता है, तो यह साइबर अपराध की घटनाओं पर प्रभावी रूप से अंकुश लगा सकता है। जिसके परिणामस्वरूप वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में कमी आएगी और साइबर फ्रॉड के मामलों में भारत की छवि में सुधार होगा। न्यायालय ने केंद्र सरकार, दूरसंचार मंत्रालय, भारत सरकार को इस मामले में पक्ष बना कर 1 जुलाई तक जवाब दाखिल करने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट को बताया गया कि 26 जून को टेली कम्युनिकेशन एक्ट लागू कर दिया गया है। ऐसे में हाईकोर्ट ने इस मामले को वहीं समाप्त कर दिया।
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अब याचिका का निपटारा करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि साइबर अपराध पूरे देश में लोगों को प्रभावित कर रहा है, चाहे वे किसी भी धर्म, शिक्षा या वर्ग के हों। समाचार पत्र, पत्रिकाएं, यूट्यूब चैनल और यहां तक कि इंटरनेट मीडिया भी अनगिनत निर्दोष पीड़ितों की पीड़ा से भरे पड़े हैं और इन रिपोर्टों को एजेंडा के रूप में दरकिनार नहीं किया जा सकता। यदि ऐसा किया गया तो यह बिलकुल वैसा होगा कि खुला दूध छोड़ कर बिल्लियों को पिंजरे की धमकी देकर डराना। यह लोगों के बीच गुस्से को बढ़ाएगा जो देश हित में नहीं है। केंद्रीय दूरसंचार सचिव से इस मुद्दे पर अपनी रिपोर्ट और सुझाव तैयार करें और इसे केंद्रीय गृह सचिव को 31 जुलाई तक सौंपे। यह ध्यान दिया जाए कि सिम और फोन आधारित साइबर अपराधों को खत्म करने या कम से कम सीमित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। प्रीपेड सिम कार्ड और भ्रामक मार्केटिंग कंपनियों के माध्यम से धोखाधड़ी वाली गतिविधियों का भी ध्यान रखा जाए। कोर्ट ने वीपीएन का उपयोग करके वायरस के माध्यम से ओटीपी के धोखाधड़ी वाले प्राधिकरण सहित ऐसी गतिविधियों को रोकने के लिए एक व्यापक रणनीति की तत्काल आवश्यकता पर भी जोर दिया है।

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