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Hindi News ›   Chandigarh ›   Highcourt Decision about Child Willing Couples in Jail

'जेल में सजायाफ्ता दंपतियों को संबंध बनाने की छूट'

Wed, 07 Jan 2015 04:38 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 07 Jan 2015 04:38 PM IST
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Highcourt Decision about Child Willing Couples in Jail

बच्चे की चाहत रखने वाले सजायाफ्ता कैदी दंपतियों को जेल में भी एक साथ सोने की छूट हाईकोर्ट ने दे दी है। पति-पत्नी द्वारा बच्चे की चाहत किए जाने पर पंजाब एंव हरियाणा हाईकोर्ट ने मंगलवार को अहम व्यवस्था दी है।

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हाईकोर्ट जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ प्रशासन से कहा है कि ऐसे दंपत्तियों की पहचान करके जेल में उनके एक साथ रहने की व्यवस्था करने के लिए ढांचा बनाने को कहा है।
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इसके साथ ही हाईकोर्ट ने यह भी व्यवस्था दी है कि केवल अच्छे व्यवहार वाले कैदियों के लिए ही यह व्यवस्था की जाए। ऐसे कैदियों की पहचान की जिम्मेवारी कोर्ट ने राज्य सरकारों पर छोड़ी है।

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मामले को लेकर जेल सुधार कमेटी गठित होगी

Highcourt Decision about Child Willing Couples in Jail

हाईकोर्ट का यह फैसला 16 साल के एक युवक को फिरौती लेकर कत्ल किए जाने के मामले में फांसी की सजा पाए जसवीर सिंह और उम्रकैद काट रही उसकी पत्नी द्वारा बच्चे की चाहत को लेकर दायर की गई याचिका पर आया।

हालांकि उनके अपराध को देखते हुए हाईकोर्ट ने उन्हें यह सुविधा देने से इंकार कर दिया है, लेकिन यह भी कहा कि पुराने नियमों की आड़ में कैदियों के मानवाधिकारों को दबाए नहीं रखा जा सकता।

बेंच ने पंजाब सरकार को निर्देश दिया है कि वह ऐसी व्यवस्था के लिए जेल सुधार पर विचार करे। हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में जेल सुधार कमेटी स्थापित करने को कहा गया है।

यह कमेटी एक साल में जेलों में परिवारों के एक साथ रहने की व्यवस्था करने का विकल्प ढूंढेगी। शुरुआती दौर में माडर्न जेल व ओपन एयर जेल में ट्रायल के तौर पर व्यवस्था स्थापित करने का निर्देश दिया गया है।

साथ रहने की व्यवस्था होने तक पैरोल का भी होगा आधार

Highcourt Decision about Child Willing Couples in Jail

हाईकोर्ट ने कहा है कि चूंकि यह बड़ा विषय है, लिहाजा हरियाणा सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन भी इस पर अमल करे। संवैधानिक व्यवस्था किए जाने तक फिलहाल कैदियों के बच्चा पैदा करने की चाहत को हाईकोर्ट ने कैदियों की छुट्टी अथवा पैरोल के लिए एक कारण के तौर पर विचार करने का निर्देश दिया है।

किसे मिले सुविधा, जेल सुधार कमेटी तय करेगी
हाईकोर्ट ने कहा है कि जेल सुधार कमेटी ही यह तय करेगी कि किस वर्ग केकैदी को उसके पारिवारिक सदस्य के साथ जेल में एक साथ रहने की इजाजत दी जानी चाहिए।

कमेटी के लिए ऐसी इजाजत देते वक्त अपराध की किस्म अथवा इजाजत देने से समाज में पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखना जरूरी होगा। हाईकोर्ट ने जेलों में कैदियों के परिवार के साथ रहे की व्यवस्था टटोलने के लिए सेशन जजों, संबंधित उपायुक्तों एवं जेल सुपरिंटेंडेंट्स की कमेटियां बनाने का निर्देश दिया है।

यह थी जसवीर और उसकी पत्नी की दलील

Highcourt Decision about Child Willing Couples in Jail

जसवीर ने अपनी अरजी में कहा था कि उसकी शादी सजा मिलने से आठ महीने पहले ही हुई थी। उसे फांसी की सजा मिली है, जबकि पत्नी को उम्र कैद। उन दोनों की कोई औलाद नहीं है और औलाद के लिए उन्हें इकट्ठा रहने की इजाजत दी जाए।

अरजी में जसवीर ने यह भी कहा कि बच्चे के पालन पोषण का खर्च उसके पिता उठा लेंगे। यह भी कहा गया कि यदि इक्ट्ठा रहने की इजाजत नहीं दी जा सकती तो आर्टिफिशियल सिमेशन की इजाजत दी जाए। जसवीर को जिस युवक के कत्ल के जुर्म में सजा हुई है, उसके पिता ने हाईकोर्ट में जसवीर की अरजी का विरोध किया था।

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