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हाईकोर्ट की कड़ी फटकार, ‘सरकारी स्कूल के बच्चों को क्यों नहीं मिल रहे शिक्षक’
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 07 Apr 2017 11:16 PM IST
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
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सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी को लेकर हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने दो टूक में पूछा है कि स्कूलों को शिक्षक नहीं मिल रहे हैं, तो इसकी वजह क्या है? अतिथि अध्यापकों को बचाने के लिए रेगुलर शिक्षकों की नियुक्ति न करने के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार और शिक्षा विभाग को कड़ी फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी को अगली सुनवाई पर पेश होकर जवाब देने को कहा है।
हाईकोर्ट ने यह आदेश एक अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया है। साथ ही टिप्पणी कर पूछा है कि सरकारी स्कूलों के छात्रों को शिक्षक क्यों नहीं मिल रहे हें। प्रेम सिंह व अन्य ने याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी हरियाणा सरकार गेस्ट टीचरों को बचाने के लिए नियमित अध्यापकों की नियुक्ति नहीं कर रही है। हाईकोर्ट ने आदेश जारी कर सभी गेस्ट शिक्षकों की सेवाएं समाप्त करने को कहा था और हर बार सरकार बहाना बनाकर इन्हें बचाने में लगी हुई है।
बहस के दौरान याचिकाकर्ता के वकील जगबीर मलिक ने कोर्ट को बताया कि पिछले साल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने कोर्ट में पेश होकर कहा था कि उन्होंने भर्ती के लिए कर्मचारी चयन आयोग को पत्र भेजा है। अब जब कर्मचारी चयन आयोग ने भर्ती कर परिणाम भी घोषित कर दिया है, लेकिन सरकार चयनित टीचरों को नियुक्ति पत्र जारी नहीं कर रही है। मलिक ने दलील दी कि सरकार गेस्ट टीचरों को बचाने के लिए नियमित टीचरों को नियुक्ति नहीं दे रही।
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याचिकाकर्ता के वकील की दलील सुनने के बाद बेंच ने हैरानी जताई कि हाईकोर्ट में शिक्षकों की नियुक्ति के इतने अधिक मामले विचाराधीन हैं। कोर्ट ने कहा कि सरकारी स्कूलों में टीचरों की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई तो प्रभावित होती है, साथ में स्कूलों की छवि भी खराब होती है। जब सरकार ने कोर्ट में खुद हलफनामा दाखिल कर नियमित भर्ती का आश्वासन दिया था तो उन्हें नियुक्ति देने में देर क्यों कर रही है। सरकार इस मामले में गंभीर नहीं है। कोर्ट ने अगली सुनवाई पर संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी को कोर्ट के सवालों के जवाब देने के लिए पेश होने का निर्देश दिया।
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हाईकोर्ट ने यह आदेश एक अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया है। साथ ही टिप्पणी कर पूछा है कि सरकारी स्कूलों के छात्रों को शिक्षक क्यों नहीं मिल रहे हें। प्रेम सिंह व अन्य ने याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी हरियाणा सरकार गेस्ट टीचरों को बचाने के लिए नियमित अध्यापकों की नियुक्ति नहीं कर रही है। हाईकोर्ट ने आदेश जारी कर सभी गेस्ट शिक्षकों की सेवाएं समाप्त करने को कहा था और हर बार सरकार बहाना बनाकर इन्हें बचाने में लगी हुई है।
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बहस के दौरान याचिकाकर्ता के वकील जगबीर मलिक ने कोर्ट को बताया कि पिछले साल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने कोर्ट में पेश होकर कहा था कि उन्होंने भर्ती के लिए कर्मचारी चयन आयोग को पत्र भेजा है। अब जब कर्मचारी चयन आयोग ने भर्ती कर परिणाम भी घोषित कर दिया है, लेकिन सरकार चयनित टीचरों को नियुक्ति पत्र जारी नहीं कर रही है। मलिक ने दलील दी कि सरकार गेस्ट टीचरों को बचाने के लिए नियमित टीचरों को नियुक्ति नहीं दे रही।
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याचिकाकर्ता के वकील की दलील सुनने के बाद बेंच ने हैरानी जताई कि हाईकोर्ट में शिक्षकों की नियुक्ति के इतने अधिक मामले विचाराधीन हैं। कोर्ट ने कहा कि सरकारी स्कूलों में टीचरों की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई तो प्रभावित होती है, साथ में स्कूलों की छवि भी खराब होती है। जब सरकार ने कोर्ट में खुद हलफनामा दाखिल कर नियमित भर्ती का आश्वासन दिया था तो उन्हें नियुक्ति देने में देर क्यों कर रही है। सरकार इस मामले में गंभीर नहीं है। कोर्ट ने अगली सुनवाई पर संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी को कोर्ट के सवालों के जवाब देने के लिए पेश होने का निर्देश दिया।