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हाईकोर्ट का आदेश: बिना तलाक दूसरा विवाह करने वाली पत्नी नहीं दाखिल कर सकती दहेज उत्पीड़न का केस

Wed, 11 Feb 2026 08:59 AM IST
निवेदिता वर्मा विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Wed, 11 Feb 2026 08:59 AM IST
सार

कोर्ट ने कहा कि बिना तलाक लिए दूसरा विवाह करने वाली महिला दूसरे पति पर दहेज उत्पीड़न का केस नहीं कर सकती है। हाईकोर्ट ने पति के खिलाफ जारी फिरोजपुर के मजिस्ट्रेट के समन आदेश को रद्द कर दिया है। 

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High Court Wife who remarries without divorce cannot file dowry harassment case
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने दहेज उत्पीड़न के मामले में महिला की शिकायत पर उसके कथित पति के खिलाफ जारी फिरोजपुर के मजिस्ट्रेट के समन आदेश को रद्द कर दिया है। 
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कोर्ट ने कहा कि बिना तलाक लिए दूसरा विवाह करने वाली महिला दूसरे पति पर दहेज उत्पीड़न का केस नहीं कर सकती है। महिला ने फिरोजपुर मजिस्ट्रेट को शिकायत देते हुए बताया था कि उसका विवाह हरजिंदर सिंह से हुआ था। इसके बाद से वह दहेज के लिए दबाव बना रहा था। जब डोली का समय आया तो याची ने दहेज के तौर पर कार की मांग की थी। इसके बाद किसी तरह शिकायतकर्ता के परिवार ने तीन लाख रुपये दिए थे। बाद में लगातार उसके साथ दहेज के नाम पर मारपीट हुई थी। शिकायत के आधार पर मजिस्ट्रेट ने समन आदेश जारी किए थे। इस समन आदेश को अपील कर चुनौती दी गई थी लेकिन अपील खारिज कर दी गई। इसके बाद याची ने वरिष्ठ अधिवक्ता सलिल देव सिंह बाली के माध्यम से हाईकोर्ट की शरण ली। 
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याची ने हाईकोर्ट को बताया कि शिकायतकर्ता का विवाह 2005 में गुरमीत सिंह से हुआ था। 2013 को गुरमीत व शिकायतकर्ता के बीच तलाक की याचिका दाखिल की गई थी जो खारिज कर दी गई। कोर्ट को बताया गया कि तलाक की याचिका के दौरान महिला ने स्वीकार किया था कि गुरमीत सिंह से पहले उसका विवाह लखविंदर सिंह के साथ हुआ था। इन दोनों से शिकायतकर्ता का तलाक नहीं हुआ था और ऐसे में शिकायतकर्ता को याची की वैध कानूनी पत्नी नहीं माना जा सकता। साथ ही याची ने दहेज उत्पीड़न के आरोपों से भी इन्कार किया। 
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हाईकोर्ट की जस्टिस शालिनी नागपाल ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि धारा 498-ए में दहेज उत्पीड़न पर पति व ससुराल वालों पर कार्रवाई का अधिकार देती है। इसमें पति की परिभाषा स्पष्ट नहीं है लेकिन सामान्य भाषा में माना जाए तो कानूनी तौर पर हिंदू मैरिज एक्ट के तहत विवाहित पति इस परिभाषा में आता है। कोर्ट ने माना कि पति या पत्नी यदि बिना एक दूसरे से तलाक लिए किसी अन्य से विवाह करते हैं तो वह कानूनन किसी अन्य के जीवनसाथी नहीं हो सकते। ऐसे में अदालत ने इन तथ्यों के आधार पर याचिका मंजूर करते हुए कथित पति के खिलाफ जारी समन आदेश को रद्द कर दिया है।
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