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Highcourt: सैन्य नर्सिंग सेवा की शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारी भी पूर्व सैनिक, एक्स सर्विस मैन के तहत दें लाभ
Tue, 06 Feb 2024 09:01 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Tue, 06 Feb 2024 09:01 AM IST
सार
पटियाला की कैप्टन गुरप्रीत कौर को मिलिट्री नर्सिंग सर्विस में पांच साल की अवधि के लिए शॉर्ट सर्विस कमीशन प्रदान किया गया था। सेना ने याची को सशस्त्र बल का सदस्य माना था। पंजाब लोक सेवा आयोग का तर्क था कि याची ने सेना में नियमित सेवा नहीं की है इसलिए उन्हें पूर्व सैनिक नहीं माना जा सकता। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने याचिका खारिज कर दी थी, जिसे खंडपीठ में चुनौती दी गई थी।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट चंडीगढ़
- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पटियाला की कैप्टन गुरप्रीत कौर की ओर से दायर याचिका को स्वीकार करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि मिलिट्री नर्सिंग सर्विस (एमएनएस) अधिकारी सशस्त्र बल से मुक्त होने पर पूर्व सैनिक की परिभाषा में आते हैं और इस कोटा के तहत नौकरी का लाभ लेने के लिए पात्र हैं।
9 मई, 2022 को हाईकोर्ट की एकल पीठ ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी, जिसे उन्होंने खंडपीठ में चुनौती दी थी। खंडपीठ ने सिंगल बेंच के आदेश को रद् करते हुए याचिका को स्वीकार कर लिया है।
कैप्टन गुरप्रीत कौर पंजाब लोक सेवा आयोग (पीपीएससी) के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंची थी। पीपीएससी ने सैन्य नर्सिंग सेवा को पूर्व सैनिक कोटा के लिए अमान्य करार दे दिया था।
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याची ने बताया था कि उसे एमएनएस में 5 सितंबर, 2013 से पांच साल की अवधि के लिए शॉर्ट सर्विस कमीशन प्रदान किया गया था। 4 सितंबर, 2018 को उसे कैप्टन के पद से छुट्टी दे दी गई थी। सेना ने उन्हें ईएसएम के रूप में दिखाते हुए एक पहचान पत्र जारी किया था और सेवा रिकॉर्ड के अनुसार याची को संघ के सशस्त्र बलों के सदस्य के रूप में माना गया है। याची ने कहा था कि वह पंजाब पूर्व सैनिक भर्ती नियम, 1982 के नियम 2 (सी) के अनुसार ईएसएम की परिभाषा में पूरी तरह से शामिल हैं।
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि सैन्य नर्सिंग सेवा (भारत) अध्यादेश, 1943 के तहत निहित प्रावधान के अनुसार एमएनएस संघ के सशस्त्र बलों का अभिन्न अंग है। इस प्रकार याचिकाकर्ता पूरी तरह से ईएसएम की परिभाषा के अंतर्गत है।
पंजाब सरकार ने याचिका का विरोध करते हुए तर्क दिया था कि उसने भारतीय संघ की सेना, नौसेना या वायु सेना में नियमित सेवा नहीं की है, इसलिए केंद्रीय नियमों के संदर्भ में ईएसएम की परिभाषा में शामिल नहीं है। यह भी तर्क दिया गया है कि याचिकाकर्ता कभी भी नियमित सेना का सदस्य नहीं रही, बल्कि उन्हें पांच साल की सेवा देने के बाद एमएनएस से मुक्त कर दिया गया जो एक सहायक बल है। सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि अपीलकर्ता पंजाब में ईएसएम कोटा की हकदार होगी और यदि वह पात्र है तो उसे नियुक्ति दे दी जाएगी।
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9 मई, 2022 को हाईकोर्ट की एकल पीठ ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी, जिसे उन्होंने खंडपीठ में चुनौती दी थी। खंडपीठ ने सिंगल बेंच के आदेश को रद् करते हुए याचिका को स्वीकार कर लिया है।
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कैप्टन गुरप्रीत कौर पंजाब लोक सेवा आयोग (पीपीएससी) के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंची थी। पीपीएससी ने सैन्य नर्सिंग सेवा को पूर्व सैनिक कोटा के लिए अमान्य करार दे दिया था।
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याची ने बताया था कि उसे एमएनएस में 5 सितंबर, 2013 से पांच साल की अवधि के लिए शॉर्ट सर्विस कमीशन प्रदान किया गया था। 4 सितंबर, 2018 को उसे कैप्टन के पद से छुट्टी दे दी गई थी। सेना ने उन्हें ईएसएम के रूप में दिखाते हुए एक पहचान पत्र जारी किया था और सेवा रिकॉर्ड के अनुसार याची को संघ के सशस्त्र बलों के सदस्य के रूप में माना गया है। याची ने कहा था कि वह पंजाब पूर्व सैनिक भर्ती नियम, 1982 के नियम 2 (सी) के अनुसार ईएसएम की परिभाषा में पूरी तरह से शामिल हैं।
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि सैन्य नर्सिंग सेवा (भारत) अध्यादेश, 1943 के तहत निहित प्रावधान के अनुसार एमएनएस संघ के सशस्त्र बलों का अभिन्न अंग है। इस प्रकार याचिकाकर्ता पूरी तरह से ईएसएम की परिभाषा के अंतर्गत है।
पंजाब सरकार ने याचिका का विरोध करते हुए तर्क दिया था कि उसने भारतीय संघ की सेना, नौसेना या वायु सेना में नियमित सेवा नहीं की है, इसलिए केंद्रीय नियमों के संदर्भ में ईएसएम की परिभाषा में शामिल नहीं है। यह भी तर्क दिया गया है कि याचिकाकर्ता कभी भी नियमित सेना का सदस्य नहीं रही, बल्कि उन्हें पांच साल की सेवा देने के बाद एमएनएस से मुक्त कर दिया गया जो एक सहायक बल है। सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि अपीलकर्ता पंजाब में ईएसएम कोटा की हकदार होगी और यदि वह पात्र है तो उसे नियुक्ति दे दी जाएगी।