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Haryana: नूंह हिंसा के बाद इमारतों पर चला बुलडोजर, अब मुआवजे की मांग, हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
Mon, 05 Feb 2024 07:00 PM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Mon, 05 Feb 2024 07:00 PM IST
सार
याचिकाकर्ता ने बताया कि इमारत पर कार्रवाई से पहले प्रशासन ने सुनवाई का कोई मौका नहीं दिया। निर्माण गिरने से शांतिपूर्ण जीवन पूरी तरह से बर्बाद हो गया। याचिकाकर्ता का आरोप है कि निर्माण को अवैध ढंग से गिराया गया है।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हरियाणा के नूंह में सांप्रदायिक झड़पों के बाद भड़की हिंसा के बाद हरियाणा सरकार द्वारा इमारतों को गैरकानूनी बताते हुए इन पर बुलडोजर चलाने के मामले में मुआवजे की मांग को लेकर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। याचिका में इमारतों के वैध दस्तावेज के बावजूद कार्रवाई का आरोप लगाते हुए मुआवजा देने का निर्देश जारी करने की अपील की गई है। नूंह में अतिक्रमण पर कार्रवाई को लेकर लिए गए संज्ञान मामले के साथ हाईकोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई का आदेश दिया है।
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अकील हुसैन व अन्य ने याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया कि मेवात क्षेत्र में अगस्त 2023 में हिंसा हुई थी। इस हिंसा के बाद हरियाणा सरकार ने मेवात क्षेत्र में मौजूद कई इमारतों को निशाना बनाया और बुलडोजर चलवा दिया। यह कार्रवाई करते हुए लोगों को सुनवाई का मौका तक नहीं दिया गया। मनमाने ढंग से याचिकाकर्ता को कोई पूर्व सूचना दिए बिना उनका निर्माण ध्वस्त कर दिया गया।
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याचिका में आरोप लगाया गया कि प्रशासन द्वारा उनको सुनवाई का कोई अवसर नहीं दिया गया, जिससे वह अपने आश्रय से वंचित हो गया है। निर्माण ध्वस्त होने से याचिकाकर्ताओं को वित्तीय और भावनात्मक नुकसान हुआ है और याचिकाकर्ता का शांतिपूर्ण जीवन पूरी तरह से बर्बाद हो गया।
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याचिका में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया देते हुए कहा गया कि अवैध ढंग से निर्माण गिराने पर पीड़ित मुआवजे का हकदार होता है। याची ने बताया कि गत वर्ष हाईकोर्ट ने मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए नूंह में सांप्रदायिक झड़पों के बाद निर्माण गिराने के अभियान पर रोक लगा दी थी।
सोमवार को सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार ने बताया कि किसी भी निर्माण पर तय प्रक्रिया का पालन किए बगैर कार्रवाई नहीं की गई है। हाईकोर्ट द्वारा लिए गए संज्ञान मामले में सरकार विस्तृत हलफनामा भी दाखिल कर चुकी है। ऐसे में हरियाणा सरकार के इस जवाब पर हाईकोर्ट ने मुआवजे व पुनर्वास की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर इस पूरे प्रकरण पर लिए गए संज्ञान के साथ सुनवाई का निर्णय लिया है। साथ ही नगर काउंसिल को भी इस मामले में पक्ष बनाने का आदेश दिया है।