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Chandigarh: हाईकोर्ट ने कहा- सिर्फ प्रशासनिक निर्देशों से शामलात भूमि पंचायतों के नाम नहीं की जा सकती ट्रांसफर

Sat, 18 Mar 2023 12:56 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sat, 18 Mar 2023 12:56 AM IST
सार

सरकार के आदेश के खिलाफ भंबूल सिंह और 76 अन्य लोगों ने सीनियर एडवोकेट वीके जिंदल वह अक्षय जिंदल के माध्यम से स्पष्टीकरण के लिए हाईकोर्ट के समक्ष याचिका दायर की। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट के जस्टिस सुरेश्वर ठाकुर और जस्टिस कुलदीप तिवारी की खंडपीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कुछ पहलु अनछुए रह गए थे जिन पर स्पष्टीकरण आवश्यक है। 

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High Court said Shamlat land cannot be transferred in name of panchayats only by administrative instructions
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हरियाणा व पंजाब सरकार के शामलात भूमि का मालिकाना हक पंचायतों के नाम करने के आदेश को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि केवल प्रशासनिक आदेश से शामलात भूमि का मालिकाना हक पंचायतों के नाम नहीं किया जा सकता है।

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सुप्रीम कोर्ट ने शामलात भूमि के मालिकाना हक को लेकर लंबित सैकड़ों याचिकाओं का निपटारा करते हुए इस भूमि का मालिकाना हक पंचायत का माना था। अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने मालिकाना हक पंचायतों के नाम दर्ज सुनिश्चित करने का दोनों राज्यों को आदेश दिया था। इसके बाद दोनों राज्यों ने प्रशासनिक अधिसूचना जारी कर पंचायतों को इन जमीनों का कब्जा अपने नाम सुनिश्चित करने की प्रक्रिया आरंभ करने के लिए स्वतंत्र कर दिया था। 
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सरकार के आदेश के खिलाफ भंबूल सिंह और 76 अन्य लोगों ने सीनियर एडवोकेट वीके जिंदल वह अक्षय जिंदल के माध्यम से स्पष्टीकरण के लिए हाईकोर्ट के समक्ष याचिका दायर की। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट के जस्टिस सुरेश्वर ठाकुर और जस्टिस कुलदीप तिवारी की खंडपीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कुछ पहलु अनछुए रह गए थे जिन पर स्पष्टीकरण आवश्यक है। 

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हाईकोर्ट ने अब आदेश को स्पष्ट करते हुए कहा कि भूमि का मालिकाना हक लेते हुए यह स्पष्ट करना होगा कि केवल उसी भूमि को वापस लिया जा सकता है, जिसे वैधानिक तरीके से तीसरे पक्ष को ट्रांसफर नही किया गया है। कोर्ट के इस आदेश के चलते अब इस भूमि को खरीदने वालों के पक्ष में मालिकाना हक तब तक कायम रहेगा जब तक सरकार तय प्रक्रिया के तहत इस पर दावा नहीं करती और अदालतें हक रद्द नहीं करतीं।

शामलात जमीनों के दावेदारों को बड़ी राहत
जिन मामलों में शामलात भूमि को सामान्य उद्देश्य के लिए आरक्षित किया गया हो (चाहे इस्तेमाल हो या न हो) उनका मालिकाना हक पंचायत के नाम किया जा सकता है। जिन मामलों में सामान्य उद्देश्य को लेकर विवाद हो उनके लिए पहले पंचायतों को क्षेत्राधिकार की अदालत के समक्ष जाकर यह निर्धारित करना होगा कि भूमि शामलात देह है या नहीं। अगर साबित हो जाता है कि भूमि वास्तव में शामलात देह थी तो ग्राम पंचायत के पक्ष में भूमि को बहाल करने के लिए कानून के अनुरूप धारा का सहारा लिया जा सकता है। 

केवल एकतरफा अनुमान के आधार पर तय नहीं किया जा सकता है कि भूमि शामलात देह है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सामान्य उद्देश्य के लिए भूमि आरक्षण को कब से प्रभावी माना जाएगा यह तय करने का फैसला भी कानून के अनुरूप संबंधित अदालतें लेंगी। जिन मामलों में शामलात भूमि का बंटवारा आदेश के पूर्व हो चुका है उन मामलों में भी सीधे तौर पर इस भूमि का कब्जा पंचायतों के नाम नहीं किया जा सकता है।

इस पर मालिकाना हक नहीं माना जाएगा
कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि जहां सामान्य उद्देश्य के लिए आरक्षित की गई भूमि को उनके मालिकों को ट्रांसफर किया गया हो और भूमि का नियंत्रण पंचायतों द्वारा अपने हाथ में न लिया गया हो तो उस स्थिति में ऑटोमेटिक तौर पर इस पर पंचायत का मालिकाना हक नहीं माना जा सकता है। हाईकोर्ट के जस्टिस सुरेश्वर ठाकुर और जस्टिस कुलदीप तिवारी की खंडपीठ ने हरियाणा द्वारा जून और अगस्त 2022 में और पंजाब द्वारा अक्टूबर 2022 में जारी किए गए कार्यकारी निर्देशों को रद्द करते हुए ये आदेश पारित किया है।

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