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हाईकोर्ट सख्त: कहा- पंजाब में नशा तस्कर बेलगाम, स्थिति नियंत्रण से बाहर, कांस्टेबल से मंत्री तक की जांच जरूरी

Sat, 23 Dec 2023 02:55 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sat, 23 Dec 2023 02:55 AM IST
सार

हाईकोर्ट ने कहा कि जेल अधिकारियों की बर्खास्तगी से कम की सजा पर यह अपराध नहीं रुकने वाले। इंक्रीमेंट रोकने की सजा का कोई मतलब नहीं है। इन्हें वेतन देना बंद कर दोगे तो भी ये काम करते रहेंगे, क्योंकि हर महीने 20 करोड़ रुपये से ऊपर की कमाई है।

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High Court said investigation from constable to minister necessary in drug smuggling case
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जेल से नशा तस्करी मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई है, कांस्टेबल से मंत्री तक सभी की जांच जरूरी है। जो भी दोषी मिला, हम सुनिश्चित करेंगे कि वह जेल जाए। शुक्रवार को इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने इस मामले की सीबीआई और ईडी जांच के साथ ही अन्य पहलुओं पर फैसला सुरक्षित रखा है। 

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शुक्रवार को मामले की सुनवाई में स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल (एसएसओसी) के प्रमुख व स्पेशल डीजीपी इंटरनल सिक्योरिटी आरएन ढोके कोर्ट के आदेश पर हाजिर हुए। हाईकोर्ट ने उनसे पूछा कि क्या आप एसएसओसी की निगरानी करते हैं। इसके जवाब में उन्होंने बताया कि हर शुक्रवार को वह हर जिले के एआईजी की बैठक लेते हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि जेल से करोड़ों रुपये का नशे का कारोबार चल रहा है, आपकी टीम क्या कर रही है? 
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चाय-समोसे वाली बैठकों से कोई फायदा नहीं, जब तक जमीनी स्तर पर काम न हो। फिरोजपुर की जेल से 43000 कॉल की गईं हैं। नौ महीने बीतने के बावजूद मोबाइल किसने जेल में पहुंचाए जांच दल के पास इसका जवाब नहीं है। अगर आज एसएसओसी के सभी अधिकारियों की संपत्ति की जांच करवाएंगे तो शायद ही कोई कानून के शिकंजे से बचेगा। 

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इस पर पंजाब सरकार ने बताया कि मामले की जांच कर रहे एआईजी को निलंबित कर दिया है। पंजाब के एजी ने जांच सीबीआई और ईडी को न सौंपने का निवेदन किया। उन्होंने कहा कि एसएसओसी को 15 दिन की मोहलत दी जाए और अगर परिणाम से अदालत संतुष्ट न हो तो जांच किसी को भी सौंपी जाए, हमें आपत्ति नहीं होगी। हाईकोर्ट ने कहा कि जेल अधिकारियों के खिलाफ जांच करने में पंजाब पुलिस सक्षम नहीं है। इसके बाद हाईकोर्ट ने सीबीआई और ईडी के वकील को बुलाकर इस मामले में प्रतिवादी बना लिया और मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया। 

जेल में नशा मिलने पर जेलर को करो बर्खास्त

हाईकोर्ट ने कहा कि जेल अधिकारियों की बर्खास्तगी से कम की सजा पर यह अपराध नहीं रुकने वाले। इंक्रीमेंट रोकने की सजा का कोई मतलब नहीं है। इन्हें वेतन देना बंद कर दोगे तो भी ये काम करते रहेंगे, क्योंकि हर महीने 20 करोड़ रुपये से ऊपर की कमाई है। जेल से नशे का कारोबार चल रहा है, इससे बड़ा और क्या अपराध होगा। कोर्ट ने कहा कि जेल से नशा मिले तो जेलर को बर्खास्त करो, नशा तस्करी का आरोपी बरी हो तो जांच अधिकारी को, तभी यह नेटवर्क टूटेगा।

यह था मामला 

जेल में नशा तस्करी की आरोपी महिला की जमानत याचिका सुनवाई के लिए पहुंची थी। हाईकोर्ट ने इस पर याचिका का दायरा बढ़ाते हुए जेलों में नशे को लेकर एडीजीपी जेल को तलब किया था। मामले की जांच एसएसओसी कर रहा था और एक भी जेल अधिकारी का नाम जांच में सामने नहीं आया था। ऐसे में हाईकोर्ट ने एसएसओसी के प्रमुख को तलब कर लिया जो शुक्रवार को आदेश के अनुसार हाजिर हुए।

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