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Highcourt: डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड में कूड़े के पहाड़, नहीं हटाने पर कोर्ट ने लगाई चंडीगढ़ निगम को फटकार

Thu, 16 Nov 2023 10:51 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 16 Nov 2023 10:51 AM IST
सार

याची ने बताया कि शहर में कचरा प्रबंधन को लेकर संकट गहरा गया है। 2021 से 2023 के बीच कूड़े के ढेर की संख्या एक से बढ़कर तीन हो गई है। कचरा प्रसंस्करण 2020 में जहां 13 प्रतिशत था वहीं 2022 में यह केवल 10 प्रतिशत रह गया है। प्रशासन ठोस कदम उठाने के स्थान पर ठेकेदारों पर करदाताओं के करोड़ों रुपयये खर्च कर रहा है।

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High Court reprimanded Chandigarh Municipal Corporation on garbage in Daddumajra dumping ground
डंपिंग ग्राउंड - फोटो : फाइल

विस्तार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड में कूड़े के पहाड़ की समस्या का समाधान निकालने में अभी तक विफल रहने पर नगर निगम को जमकर फटकार लगाई है। बेंच ने कहा कि जब इस मुद्दे को हल करने के लिए तकनीक उपलब्ध हैं तो इसमें देरी क्यों हो रही है। हाईकोर्ट ने अब याची और चंडीगढ़ नगर निगम को प्रस्तावित समाधान और कचरा प्रबंधन के लिए दिए गए अनुबंध को पेश करने का निर्देश दिया है।

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2016 में दीप्ति सिंह तो वहीं 2021 में एडवोकेट अमित शर्मा ने जनहित याचिका दाखिल करते हुए डड्डूमाजरा में कूड़े के पहाड़ के कारण आसपास के लोगों को होने वाली परेशानी का मुद्दा उठाया था। हाईकोर्ट लगातार इस मामले को लेकर सुनवाई करता आ रहा था और जुलाई में नगर निगम की एक्शन टेकन रिपोर्ट पर सवालिया निशान लगा दिया था और कूड़े के निपटान के बारे में झूठ बोलने पर निगम अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की थी। 
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एमसी का दावा-एक ढेर साफ किया
शर्मा ने बताया था कि डंपिंग ग्राउंड के चारों तरफ एक दीवार बनाई गई थी, जबकि निर्माण के एक साल के भीतर इसका महत्वपूर्ण हिस्सा ढह गया था और दूषित पानी आबादी की ओर बह रहा था। बुधवार को सुनवाई के दौरान एमसी के वकील ने इस आरोप का विरोध करते हुए कहा कि उनका काम योजना के मुताबिक चल रहा है और उन्होंने एक नए अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं। एमसी ने दावा किया कि कूड़े के तीन ढेर में से एक को साफ कर दिया गया है। अमित शर्मा ने कहा कि यह सब आंखों में धूल झोंकने का प्रयास है क्योंकि कचरे को केवल मिट्टी की एक परत से ढक दिया गया है।


याची ने बताया कि शहर में कचरा प्रबंधन को लेकर संकट गहरा गया है। 2021 से 2023 के बीच कूड़े के ढेर की संख्या एक से बढ़कर तीन हो गई है। कचरा प्रसंस्करण 2020 में जहां 13 प्रतिशत था वहीं 2022 में यह केवल 10 प्रतिशत रह गया है। प्रशासन ठोस कदम उठाने के स्थान पर ठेकेदारों पर करदाताओं के करोड़ों रुपयये खर्च कर रहा है। याची ने बताया कि इंदौर में कचरा प्रबंधन का प्रभावी मॉडल अपनाया गया और 6 माह के भीतर ही इसका निपटारा कर दिया गया। चंडीगढ़ में नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर टेक्निकल टीचर्स ट्रेनिंग एंड रिसर्च ने एक लागत प्रभावी समाधान भी प्रस्तावित किया है।

याची ने बताया कि निगम आयुक्त ने 1 अगस्त को स्वीकार किया था कि सभी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। सांविधानिक आदेशों, वैधानिक दायित्वों, एनजीटी के निर्देशों और नियमों का पालन करने के लिए मंत्रालय के दिशानिर्देशों के बावजूद ऐसा कहना व्यवस्था पर सवाल है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की बेंच ने एमसी को 16 नवंबर को अपना समाधान और अनुबंध कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया।

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