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Haryana: दुष्कर्म पीड़िता की FIR दर्ज करने की याचिका खारिज, कोर्ट ने कहा-क्षेत्राधिकार मजिस्ट्रेट के पास जाएं
Sat, 16 Mar 2024 10:59 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 16 Mar 2024 10:59 AM IST
सार
कोर्ट ने कहा कि यदि ऐसे मामले के तथ्य/परिस्थितियां उचित हैं व हाइकोर्ट के अपने अधिकार क्षेत्र में है तो वह एफआईआर दर्ज करने, जांच की निगरानी करने की मांग करने वाली याचिकाओं पर विचार कर सकता है।
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : File Photo
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विस्तार
नूंह की एक महिला द्वारा दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश जारी करने के लिए दाखिल याचिका को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि एफआईआर दर्ज करने के लिए शिकायतकर्ता को पहले क्षेत्राधिकार मजिस्ट्रेट के पास न जाने के लिए पर्याप्त कारण बताना होगा।
जस्टिस सुमित गोयल ने कहा कि यदि ऐसे मामले के तथ्य/परिस्थितियां उचित हैं व हाइकोर्ट के अपने अधिकार क्षेत्र में है तो वह एफआईआर दर्ज करने, जांच की निगरानी करने की मांग करने वाली याचिकाओं पर विचार कर सकता है। महिला ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए बताया कि उसके साथ दुष्कर्म हुआ था और फरवरी में उसने नूंह के पुलिस अधीक्षक को आरोपियों के खिलाफ शिकायत भी दी थी लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में याची को हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करनी पड़ी है।
हाईकोर्ट ने कहा कि क्षेत्राधिकार मजिस्ट्रेट में न्याय प्रदान करने के लिए स्वतंत्र और मजबूत तंत्र उपलब्ध होने पर भी सीधे हाईकोर्ट से संपर्क करने की प्रवृत्ति चिंताजनक है। सीआरपीसी की धारा 482 के तहत दायर याचिकाओं में एफआईआर दर्ज करने की मांग पर निर्णय लेने की शक्ति हाईकोर्ट के पास है लेकिन सभी याचिका पर विचार नहीं किया जा सकता। ऐसे में हाईकोर्ट पर मुकदमेबाजी का बोझ बढ़ जाएगा।
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जस्टिस सुमित गोयल ने कहा कि यदि ऐसे मामले के तथ्य/परिस्थितियां उचित हैं व हाइकोर्ट के अपने अधिकार क्षेत्र में है तो वह एफआईआर दर्ज करने, जांच की निगरानी करने की मांग करने वाली याचिकाओं पर विचार कर सकता है। महिला ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए बताया कि उसके साथ दुष्कर्म हुआ था और फरवरी में उसने नूंह के पुलिस अधीक्षक को आरोपियों के खिलाफ शिकायत भी दी थी लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में याची को हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करनी पड़ी है।
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हाईकोर्ट ने कहा कि क्षेत्राधिकार मजिस्ट्रेट में न्याय प्रदान करने के लिए स्वतंत्र और मजबूत तंत्र उपलब्ध होने पर भी सीधे हाईकोर्ट से संपर्क करने की प्रवृत्ति चिंताजनक है। सीआरपीसी की धारा 482 के तहत दायर याचिकाओं में एफआईआर दर्ज करने की मांग पर निर्णय लेने की शक्ति हाईकोर्ट के पास है लेकिन सभी याचिका पर विचार नहीं किया जा सकता। ऐसे में हाईकोर्ट पर मुकदमेबाजी का बोझ बढ़ जाएगा।
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