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Haryana: हाईकोर्ट ने कहा- गुरुद्वारा पवित्र स्थान, इसके धन का दुरुपयोग लोगों की भावना को आहत करना

Wed, 11 Jan 2023 08:01 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Wed, 11 Jan 2023 08:01 PM IST
सार

हाईकोर्ट ने याचिका पर अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि याचिकाकर्ताओं पर आरोपी संगीन हैं। इस मामले में राशि की वसूली के लिए याचिकाकर्ताओं से हिरासत में पूछताछ जरूरी है। ऐसे में आरोपियों को जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता है।

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High Court refuses bail to petitioners in FIR registered in fraud and other sections
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिसार के एक गुरुद्वारे के पैसे के लेन-देन में धांधली के आरोपियों की जमानत याचिका खारिज करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि गुरुद्वारा एक पवित्र स्थान है और इसके धन का दुरुपयोग लोगों की भावनाओं को आहत करता है। हाईकोर्ट ने कहा कि अगर इस प्रकार के आरोपियों को जमानत दी गई तो समाज के बीच गलत संदेश जाएगा और धोखाधड़ी करने वालों के हौसले को बढ़ावा मिलेगा।

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हिसार की गुरुद्वारा सिंह सभा बरवाला के सदस्य सुरजीत सिंह व अन्य ने अग्रिम जमानत की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिकाकर्ताओं ने एफआईआर में लगाए गए धोखाधड़ी व आपराधिक साजिश के आरोपों को सिरे से नकारते हुए कहा कि उन्होंने काई भ्रष्टाचार नहीं किया है। जिस राशि के गबन का आरोप लगाया जा रहा है उसका उपयोग गुरुद्वारे के भवन की मरम्मत कार्य व गुरुद्वारे की दुकानों पर किया गया है। 
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याचिकाकर्ताओं ने बताया कि गुरुद्वारे ने कुछ दुकानों को किराये पर दिया था। इन दुकानों को किराये पर लेने वालों ने किराये का समय से भुगतान नहीं किया। इसके चलते किराये से जुड़ीं कुछ याचिकाएं भी न्यायालय में विचाराधीन हैं। जिन लोगों को दुकानें किराये पर दी गई थीं, इस मामले में शिकायत दाखिल करने वाला उनका रिश्तेदार है। ऐसे में यह एफआईआर याचिकाकर्ताओं पर दबाव बनाने के लिए दर्ज करवाई गई है। 
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जमानत का विरोध करते हुए सरकार ने कहा कि गुरुद्वारे की एफडी जो 2022 में पूरी होने वाली थी उनका पैसा याचिकाकर्ताओं ने अपने निजी इस्तेमाल के लिए निकाल लिया। सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका पर अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि याचिकाकर्ताओं पर आरोपी संगीन हैं। इस मामले में राशि की वसूली के लिए याचिकाकर्ताओं से हिरासत में पूछताछ जरूरी है। ऐसे में आरोपियों को जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता है। हाईकोर्ट ने इन टिप्पणियों के साथ सभी अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दी।

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