{"_id":"62508e98dcb407767302842d","slug":"high-court-refused-to-give-protection-to-the-loving-couple","type":"story","status":"publish","title_hn":"चंडीगढ़: समलैंगिक प्रेमी जोड़े की याचिका पर हाईकोर्ट ने कहा- जीवन और स्वतंत्रता को खतरा नहीं, सुरक्षा नहीं दे सकते","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चंडीगढ़: समलैंगिक प्रेमी जोड़े की याचिका पर हाईकोर्ट ने कहा- जीवन और स्वतंत्रता को खतरा नहीं, सुरक्षा नहीं दे सकते
Sat, 09 Apr 2022 01:07 AM IST
ajay kumar
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Sat, 09 Apr 2022 01:07 AM IST
सार
हाईकोर्ट ने याची पक्ष की दलील सुनने के बाद कहा कि इस मामले में सुरक्षा का आदेश नहीं दिया जा सकता। याची को शक है कि उनके घरवाले उन्हें झूठे केस में फंसा सकते हैं लेकिन उस स्थिति में याची के पास कानून के कई विकल्प मौजूद होंगे।
विज्ञापन
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
समलैंगिक प्रेमी जोड़े की सुरक्षा से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि याची की यह दलील कि उनके परिवार वाले उन्हें झूठे केस में फंसा सकते हैं, उन्हें सुरक्षा का आदेश जारी करने के लिए पर्याप्त नहीं है। अमनदीप कौर ने रमनदीप कौर के साथ सहमति संबंध में रहने के लिए सुरक्षा की मांग की थी।
विज्ञापन
याचिका दाखिल करते हुए अमनदीप कौर और रमनदीप कौर ने हाईकोर्ट को बताया कि वह एक दूसरे से प्यार करती हैं। दोनों के घरवाले उनके इस संबंध से खुश नहीं हैं और वह उन्हें झूठे केस में फंसा सकते हैं। अमनदीप कौर ने बताया कि वह घर से भागकर अब रमनदीप कौर के साथ रह रही हैं।
विज्ञापन
याची ने बताया कि दोनों बालिग हैं और एक की आयु 21 तो दूसरी की 27 वर्ष है। घरवालों से खतरे की बात कहते हुए दोनों ने मुक्तसर साहिब के एसएसपी से सुरक्षा की गुहार लगाई थी लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। हाईकोर्ट ने याची पक्ष की दलील सुनने के बाद कहा कि इस मामले में सुरक्षा का आदेश नहीं दिया जा सकता।
विज्ञापन
याची को शक है कि उनके घरवाले उन्हें झूठे केस में फंसा सकते हैं लेकिन उस स्थिति में याची के पास कानून के कई विकल्प मौजूद होंगे। सुरक्षा का आदेश उस स्थिति में दिया जाता है, जब किसी नागरिक के जीवन व स्वतंत्रता की सुरक्षा संकट में हो। इस मामले में ऐसा नहीं है ऐसे में सुरक्षा से जुड़ी याचिका को स्वीकार नहीं किया जा सकता।