हाईकोर्ट का आदेश: मुस्लिम कानून में दो विवाह वैध, बर्खास्त किए गए वायुसेना अधिकारी को बहाल किया जाए
पश्चिम बंगाल निवासी वायुसेना अधिकारी ने पहली पत्नी होने के बावजूद 2012 में दूसरी शादी की थी। इसे नियमों का उल्लंघन मानते हुए वायुसेना ने उसे बर्खास्त कर दिया था। इसके खिलाफ याची हाईकोर्ट पहुंचा था।
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मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत दूसरी शादी करने वाले भारतीय वायुसेना (आईएएफ) के अधिकारी की बर्खास्तगी को अवैध करार देते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने उसे बहाल करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि मुस्लिम कानून में दो विवाह वैध हैं और याची ने एक देशभक्त सैनिक के रूप में अभी तक बेदाग सेवा की है। उसकी बर्खास्तगी आजीविका के अधिकार का उल्लंघन है।
पश्चिम बंगाल निवासी वायुसेना अधिकारी कलीमुल गाजी ने याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया था कि उसने 2012 में अपनी पहली शादी के वजूद में रहते हुए एक अन्य मुस्लिम महिला से शादी की थी।
वायुसेना के नियमों के अनुसार सक्षम प्राधिकारी से अनुमति लिए बिना दूसरी शादी की गई थी। उसने दूसरी शादी करने के तथ्य का खुलासा किया, जिसके परिणामस्वरूप उसके खिलाफ कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी की गई थी। एक कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया था और इसके जवाब में याचिकाकर्ता ने 23 जून, 2014 को अपना जवाब प्रस्तुत किया।
याची ने अनुमति के बिना एक से अधिक विवाह करने के तथ्य पर विवाद नहीं किया, बल्कि उसने कहा कि उसका धर्म चार वैध विवाहों की अनुमति देता है। ऐसी अनुमति तब होती है, जब वह सभी पत्नियों का समान रूप से भरण-पोषण कर सके और उन्हें समान अधिकार दे सके।
याची ने नियमों के बारे में अनभिज्ञता का दावा किया और जांच के बाद उसे बर्खास्त कर दिया गया। हाईकोर्ट ने याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता अपने पूरे परिवार के लिए अकेला कमाने वाला है और बर्खास्त करने का आदेश उसके आश्रितों के आजीविका के अधिकार पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा। साथ ही हाईकोर्ट ने कहा कि दूसरी शादी मुस्लिम कानून के तहत वैध है और वर्तमान मामले में यह पहली पत्नी की सहमति से की गई थी।
रिपोर्ट के साथ सिफारिश देना भी जरूरी
नियमों के अनुसार कमांडिंग अधिकारी को मामले की रिपोर्ट के साथ-साथ यह सिफारिश भी देनी होती है कि कार्रवाई की जानी चाहिए या नहीं, साथ ही तर्क भी देना होता है। हालांकि, वर्तमान मामले में इसका पालन नहीं किया गया। इसके विपरीत, वर्तमान याचिकाकर्ता को बर्खास्त करने की अत्यंत कठोर सजा दी गई।
हाईकोर्ट ने यह भी माना कि अधिकारी ने भारतीय वायुसेना में अपनी सेवा दी है और एक देशभक्त सैनिक के रूप में उनका बेदाग रिकाॅर्ड है। अधिकारी का बर्खास्तगी आदेश कठोर, कथित रूप से किए गए अपराध के अनुपात से अधिक है। खंडपीठ ने यह भी कहा कि मुस्लिम कानून के तहत दूसरी शादी वैध है और पहली पत्नी ने अपने पति की दूसरी शादी के बारे में शिकायत नहीं की, जिसका अर्थ है कि उसने सहमति दी और दूसरी पत्नी के साथ रहने के लिए तैयार थी।