फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   High Court ordered action report in promotion in Forest Department

Highcourt: वन विभाग में दो दशक पहले हुई नियुक्ति की तिथि से दिया उच्च पद, HC ने दिया कार्रवाई का आदेश

Fri, 14 Jun 2024 04:16 PM IST
निवेदिता वर्मा विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 14 Jun 2024 04:16 PM IST
सार

याची वन विभाग में 2004 में फॉरेस्टर नियुक्त हुए थे। इसके बाद वे डिप्टी फॉरेस्ट रेंजर बने। 2001 में अनुकंपा के आधार पर फॉरेस्ट गार्ड नियुक्त हुए दो लोगों ने उच्च शिक्षा का हवाला देते हुए नियुक्ति की तिथि से उच्च पद देने की मांग कर दी। विभाग ने उनकी नियुक्ति की तिथि से 2020 में उन्हें उच्च पद दे दिया।

विज्ञापन
High Court ordered action report in promotion in Forest Department
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अनुकंपा के आधार पर दो दशक पहले नौकरी पाने वालों का अब 20 साल बाद नियुक्ति की तिथि से पद बढ़ाने को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने हरियाणा के मुख्य सचिव को वन विभाग के तत्कालीन एसीएस से स्पष्टीकरण मांगने और फिर कानून के अनुसार कार्रवाई करने का आदेश दिया है। वहीं, मामले में की गई कार्रवाई का ब्योरा तीन माह में सरकार को सौंपने को कहा।
विज्ञापन


याचिका दाखिल करते हुए अनिल कुमार व अन्य ने हाईकोर्ट को बताया कि वे वन विभाग में 2004 में फॉरेस्टर नियुक्त हुए थे। इसके बाद डिप्टी फॉरेस्ट रेंजर 2015 से 2019 के बीच बने। इसी बीच 2001 में अनुकंपा के आधार पर फॉरेस्ट गार्ड नियुक्त हुए दो लोगों ने उच्च शिक्षा का हवाला देते हुए नियुक्ति की तिथि से उच्च पद देने की मांग कर दी। विभाग ने उनकी नियुक्ति की तिथि से 2020 में उन्हें फॉरेस्टर का उच्च पद दे दिया। 2021 में फॉरेस्टर की वरिष्ठता सूची दोबारा तैयार कर इन दोनों को डिप्टी फॉरेस्ट रेंजर बना दिया गया। 
विज्ञापन


याची ने बताया कि कई वर्षों से जो उनके जूनियर थे उन्हें अब वरिष्ठता सूची में ऊंचा स्थान दे दिया गया है। हाईकोर्ट ने पाया कि इस मामले में अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति की तिथि से उच्च पद के दावे सरकार खारिज कर चुकी है। अदालतों में भी इस तरह के दावों का सरकार की ओर से विरोध किया गया। हाईकोर्ट के एक इसी प्रकार के आदेश के खिलाफ सरकार सुप्रीम कोर्ट भी जा चुकी है। इन दोनों कर्मियों के मामले में सरकार ने अलग रुख अपनाया है और वह भी नियुक्ति के दो दशक बाद। यह आदेश एक एसीएस स्तर के अधिकारी द्वारा लिया गया है जो संदेहास्पद है। इस आदेश ने न केवल अनावश्यक अदालती विवाद को जन्म दिया बल्कि पूरी वरिष्ठता सूची को प्रभावित कर दिया है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में आदेश जारी करने वाले अधिकारी की जिम्मेदारी तय करना बेहद जरूरी है। हाईकोर्ट ने अब मुख्य सचिव को आदेश दिया कि वह वन विभाग के तत्कालीन एसीएस से स्पष्टीकरण मांगे कि आखिर किन परिस्थितियों में कानून की अवहेलना करते हुए मनमाना व अवैध आदेश जारी किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed