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Highcourt: वंचित वर्ग के लोगों को भी पैरोल का अधिकार, एप विकसित करने पर विचार करें पंजाब-हरियाणा और चंडीगढ़

Sat, 23 Dec 2023 01:09 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 23 Dec 2023 01:09 PM IST
सार

हाईकोर्ट ने राम रहीम की पैरोल के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करते हुए एडवोकेट तनु बेदी को एमिकस क्यूरी नियुक्त करते हुए यह आदेश पारित किया है। एसजीपीसी ने डेरा प्रमुख को फरवरी में दी गई 40 दिनों की पैरोल को रद्द करने की मांग करते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।

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High Court order to explore possibility of developing app where parole of prisoners can be registered
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट

विस्तार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने गुरमीत राम रहीम की पैरोल के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब व हरियाणा सरकार तथा यूटी प्रशासन को ऐसा एप विकसित करने की संभावना तलाशने का आदेश दिया है जिसमें कैदियों के पैरोल पंजीकृत किए जा सकें। कोर्ट ने कहा कि जेल में अधिकतर कैदी समाज के कमजोर वर्गों से हैं, ऐसे लोग कानूनी लड़ाई वित्तीय संकट की वजह से नहीं लड़ पाते, इनके लिए यह एप मददगार साबित होगा।
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हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि कैदियों के लिए पैरोल आवेदन के लिए बनाए गए एप में पैरोल/फरलो की प्रक्रिया भी अपलोड की जानी चाहिए। एफआईआर के साथ-साथ, चालान का विवरण भी हो ताकि अदालतों को निर्णय में आसानी हो। जेल में अधिकतर कैदी समाज के कमजोर वर्गों से हैं और यह ऐप उन्हें पैरोल, जमानत आदि के लिए मदद कर सकता है।
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एडवोकेट तनु बेदी एमिक्स क्यूरी नियुक्त
हाईकोर्ट ने राम रहीम की पैरोल के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करते हुए एडवोकेट तनु बेदी को एमिकस क्यूरी नियुक्त करते हुए यह आदेश पारित किया है। एसजीपीसी ने डेरा प्रमुख को फरवरी में दी गई 40 दिनों की पैरोल को रद्द करने की मांग करते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। याचिका में कहा गया था कि राम रहीम को दो अलग-अलग एफआईआर में 17 जनवरी, 2019 और 18 अक्टूबर, 2021 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। उसे एक मामले का हवाला देकर पैरोल दी गई है जबकि एक अन्य मामले में भी वह सजा काट रहा है।
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हरियाणा गुड कंडक्ट ऑफ प्रिजनर एक्ट के अनुसार उसे पैरोल या फरलो को लाभ नहीं दिया जा सकता। एसजीपीसी ने यह भी तर्क दिया है कि डेरा प्रमुख ने सिख समुदाय को परेशान करने के लिए अपने उपदेश देना शुरू कर दिया है जो पंजाब और भारत के अन्य राज्यों में हिंसा भड़का सकता है, जिससे विशेष रूप से पंजाब राज्य में शांति और सार्वजनिक व्यवस्था खतरे में पड़ सकती है। याचिका के अनुसार, डेरा प्रमुख को गुरु ग्रंथ साहिब जी के खिलाफ जहरीला प्रचार करने की आदत है।
 
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