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Highcourt: शहीद सैनिक के भतीजे को DSP का पद दे पंजाब सरकार... आदेश के साथ हाईकोर्ट ने की अहम टिप्पणी
Fri, 29 Dec 2023 09:07 AM IST
निवेदिता वर्मा
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Fri, 29 Dec 2023 09:07 AM IST
सार
नेवी में लेफ्टिनेंट पायलट दविंदर सिंह सिद्धू 989 में भारत सरकार के श्रीलंका में किए गए ऑपरेशन पवन के दौरान शहीद हो गए थे। उनके परिवार में उनका भतीजा अर्शदीप सिंह सिद्धू ही परिवार का सहारा है। अर्शदीप ने पंजाब सरकार की ऑनर एंड ग्रेटीट्यूट पॉलिसी के तहत डीएसपी पद पर नियुक्ति के लिए आवेदन किया था जो नामंजूर हो गया था।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट चंडीगढ़
- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को श्रीलंका में 1989 के ऑपरेशन पवन के दौरान शहीद हुए दविंदर सिंह सिद्धू के भतीजे को डीएसपी नियुक्त करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि शहीद सैनिक को पुलिसकर्मियों से नीचे का दर्जा देना स्वीकार नहीं किया जा सकता।
याचिका दाखिल करते हुए बठिंडा निवासी सर्बजीत सिंह सिद्धू ने हाईकोर्ट को बताया कि उनका बेटा दविंदर सिंह सिद्धू नेवी में लेफ्टिनेंट पायलट था। 1989 में भारत सरकार के श्रीलंका में किए गए ऑपरेशन पवन के दौरान वह शहीद हो गया था। याचिकाकर्ता के परिवार में अब केवल उसका पोता अर्शदीप सिंह सिद्धू ही मौजूद है जो परिवार का सहारा है। अर्शदीप शहीद दविंदर सिंह सिद्धू का भतीजा है।
पंजाब सरकार की ऑनर एंड ग्रेटीट्यूट पॉलिसी के तहत डीएसपी पद पर नियुक्ति के लिए याची के पोते ने आवेदन किया था लेकिन इसे मंजूर नहीं किया गया। पंजाब सरकार ने बताया कि नौकरी के लिए 30 आवेदन मिले थे और 27 का चयन किया गया है। इस नीति के तहत शहीद पुलिसवालों के भतीजों को नौकरी दी गई है, लेकिन शहीद सैनिकों के मामले में ऐसा नहीं किया गया।
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हाईकोर्ट ने कहा कि सेना का रक्षाकर्मी जिसने राष्ट्र के लिए अपना जीवन दे दिया, उसे पुलिस बल में रहते हुए शहीद होने वालों से निचले स्तर पर नहीं रखा जा सकता। हाईकोर्ट ने 3 महीने के भीतर याची के पोते को डीएसपी बनाने पर फैसला लेने का आदेश दिया है। साथ ही याची के पोते को आदेश दिया है कि वह अंडरटेकिंग देगा कि नौकरी मिलने के बाद परिवार का ख्याल रखेगा।
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याचिका दाखिल करते हुए बठिंडा निवासी सर्बजीत सिंह सिद्धू ने हाईकोर्ट को बताया कि उनका बेटा दविंदर सिंह सिद्धू नेवी में लेफ्टिनेंट पायलट था। 1989 में भारत सरकार के श्रीलंका में किए गए ऑपरेशन पवन के दौरान वह शहीद हो गया था। याचिकाकर्ता के परिवार में अब केवल उसका पोता अर्शदीप सिंह सिद्धू ही मौजूद है जो परिवार का सहारा है। अर्शदीप शहीद दविंदर सिंह सिद्धू का भतीजा है।
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पंजाब सरकार की ऑनर एंड ग्रेटीट्यूट पॉलिसी के तहत डीएसपी पद पर नियुक्ति के लिए याची के पोते ने आवेदन किया था लेकिन इसे मंजूर नहीं किया गया। पंजाब सरकार ने बताया कि नौकरी के लिए 30 आवेदन मिले थे और 27 का चयन किया गया है। इस नीति के तहत शहीद पुलिसवालों के भतीजों को नौकरी दी गई है, लेकिन शहीद सैनिकों के मामले में ऐसा नहीं किया गया।
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हाईकोर्ट ने कहा कि सेना का रक्षाकर्मी जिसने राष्ट्र के लिए अपना जीवन दे दिया, उसे पुलिस बल में रहते हुए शहीद होने वालों से निचले स्तर पर नहीं रखा जा सकता। हाईकोर्ट ने 3 महीने के भीतर याची के पोते को डीएसपी बनाने पर फैसला लेने का आदेश दिया है। साथ ही याची के पोते को आदेश दिया है कि वह अंडरटेकिंग देगा कि नौकरी मिलने के बाद परिवार का ख्याल रखेगा।