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Highcourt: जेल में तैयार उत्पाद के मुनाफे में कैदियों को हिस्सेदार बनाएं वरना वे हो जाएंगे अवसाद के शिकार
Wed, 31 Jan 2024 11:06 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 31 Jan 2024 11:06 AM IST
सार
हाईकोर्ट ने कहा कि ज्यादातर कैदी अपने परिवार की चिंता के कारण तनाव का शिकार होते हैं। यदि कैदियों को मुनाफे में हिस्सा मिलेगा तो यह राशि वह अपने परिवार वालों को भेज सकेंगे और परिवार के प्रति उनकी चिंता कम होगी। ऐसे में जो काम मनोवैज्ञानिकों की नियुक्ति कर पूरा करने की योजना बनाई जा रही है उसका 90 प्रतिशत तो केवल इस निर्णय से ही पूरा हो जाएगा।
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : File Photo
विस्तार
जेलों में तैयार उत्पादों की बिक्री से होने वाले मुनाफे में कैदियों को 40 प्रतिशत हिस्सेदारी हिमाचल की तर्ज पर देने को लेकर निर्णय लेने का पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब, हरियाणा व चंडीगढ़ को आदेश दिया है।
हाईकोर्ट ने कहा कि कैदी अक्सर परिवार की चिंता में तनाव व अवसाद का शिकार होते हैं। यदि वे परिवार को अपनी कमाई का हिस्सा भेज पाएंगे तो 90 प्रतिशत कैदियों का तनाव वैसे ही समाप्त हो जाएगा। इसके साथ ही जेलों में मेडिकल स्टाफ व डाॅक्टरों के रिक्त पदों को लेकर भी हलफनामा दाखिल करने को कहा है।
गत वर्ष अक्टूबर में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बठिंडा जेल में बंद एक कैदी की रिहाई की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर संज्ञान लेते हुए कैदियों के हितों पर सुनवाई आरंभ की थी। इस मामले में अदालत के सहयोग के लिए सीनियर एडवोकेट रीता कोहली को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया था।
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मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि जेल में काम कर रहे विचाराधीन कैदियों और दोषियों को जेल में निर्मित उत्पादों की बिक्री से कोई लाभ नहीं मिल रहा है। हाईकोर्ट ने मनोवैज्ञानिकों से रिपोर्ट प्राप्त करने का प्रयास किया और पाया कि ये युवा विचाराधीन और दोषी कैदी गुस्से और मानसिक दबाव से पीड़ित हैं।
हाईकोर्ट ने पंजाब जेल मैनुअल में संशोधनों के संबंध में सुनवाई आगे बढ़ाई ताकि कैदियों द्वारा तैयार की गई वस्तुओं की बिक्री से प्राप्त लाभ में उन्हें हिस्सा दिया जा सके। अदालत को एमिकस क्यूरी ने बताया कि 2021 में हिमाचल जेल विभाग ने एक योजना लागू की थी जिसके माध्यम से कैदियों को लाभ का हिस्सा दिया जाता है।
इस मामले में हरियाणा सरकार की ओर से कहा गया कि अकुशल कैदियों को मुनाफे का 5 प्रतिशत और कुशल कैदियों को 10 प्रतिशत देने के लिए नीति बनाई जा रही है। पंजाब व यूटी प्रशासन ने इस मामले में कुछ समय देने की मांग की। हाईकोर्ट ने कहा कि 5 या 10 प्रतिशत काफी नहीं है। कैदियों के बनाए उत्पादों से सरकार पैसा बना रही है तो ऐसे में कैदियों को हिमाचल की तर्ज पर 40 प्रतिशत लाभांश देने में आपत्ति क्यों है। हाईकोर्ट ने अब हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ को इस बारे में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
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हाईकोर्ट ने कहा कि कैदी अक्सर परिवार की चिंता में तनाव व अवसाद का शिकार होते हैं। यदि वे परिवार को अपनी कमाई का हिस्सा भेज पाएंगे तो 90 प्रतिशत कैदियों का तनाव वैसे ही समाप्त हो जाएगा। इसके साथ ही जेलों में मेडिकल स्टाफ व डाॅक्टरों के रिक्त पदों को लेकर भी हलफनामा दाखिल करने को कहा है।
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गत वर्ष अक्टूबर में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बठिंडा जेल में बंद एक कैदी की रिहाई की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर संज्ञान लेते हुए कैदियों के हितों पर सुनवाई आरंभ की थी। इस मामले में अदालत के सहयोग के लिए सीनियर एडवोकेट रीता कोहली को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया था।
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मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि जेल में काम कर रहे विचाराधीन कैदियों और दोषियों को जेल में निर्मित उत्पादों की बिक्री से कोई लाभ नहीं मिल रहा है। हाईकोर्ट ने मनोवैज्ञानिकों से रिपोर्ट प्राप्त करने का प्रयास किया और पाया कि ये युवा विचाराधीन और दोषी कैदी गुस्से और मानसिक दबाव से पीड़ित हैं।
हाईकोर्ट ने पंजाब जेल मैनुअल में संशोधनों के संबंध में सुनवाई आगे बढ़ाई ताकि कैदियों द्वारा तैयार की गई वस्तुओं की बिक्री से प्राप्त लाभ में उन्हें हिस्सा दिया जा सके। अदालत को एमिकस क्यूरी ने बताया कि 2021 में हिमाचल जेल विभाग ने एक योजना लागू की थी जिसके माध्यम से कैदियों को लाभ का हिस्सा दिया जाता है।
इस मामले में हरियाणा सरकार की ओर से कहा गया कि अकुशल कैदियों को मुनाफे का 5 प्रतिशत और कुशल कैदियों को 10 प्रतिशत देने के लिए नीति बनाई जा रही है। पंजाब व यूटी प्रशासन ने इस मामले में कुछ समय देने की मांग की। हाईकोर्ट ने कहा कि 5 या 10 प्रतिशत काफी नहीं है। कैदियों के बनाए उत्पादों से सरकार पैसा बना रही है तो ऐसे में कैदियों को हिमाचल की तर्ज पर 40 प्रतिशत लाभांश देने में आपत्ति क्यों है। हाईकोर्ट ने अब हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ को इस बारे में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।