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रिटायरमेंट उम्र घटाने पर हरियाणा सरकार को नोटिस
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 28 Nov 2014 10:20 PM IST
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हरियाणा में कर्मचारियों की रिटायरमेंट की उम्र घटाने के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर शुक्रवार को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को नोटिस जारी करके पूछा है कि सरकार का उम्र घटाने संबंधी फैसला क्यों न रद्द कर दिया जाए। कोर्ट ने सरकार से 8 दिसंबर तक जवाब दाखिल करने को कहा है।
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हरियाणा में उप सचिव स्तर की अधिकारी बलजीत कौर सहित कई अन्य कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि हरियाणा सरकार ने 26 अगस्त को तीसरा दर्जा कर्मचारियों का सेवाकाल 58 से बढ़ाकर 60 साल और चौथा दर्जा कर्मचारियों का सेवाकाल 60 से बढ़ाकर 62 साल किया था।
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लेकिन प्रदेश में सरकार बदलने पर 26 नवंबर को सर्कुलर जारी करके तृतीय श्रेणी कर्मचारियों का सेवाकाल घटाकर 58 साल और चतुर्थ श्रेणी कर्मियों का सेवाकार 60 साल कर दिया गया है।
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याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि महज सरकार बदलने के कारण ही पिछली सरकार का फैसला बदला गया है, जोकि गलत है। याचिकाओं में दलील दी गई कि पिछली सरकार की ओर से लिए गए फैसले में कोई कानूनी खामी नहीं है, ऐसे में फैसला नहीं बदला जा सकता।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की कि 26 नवंबर का सर्कुलर रद्द कर सेवाकाल में वृद्धि को बहाल किया जाए। जस्टिस टीएस ढींढसा ने प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
कई बोर्ड और निगमों के कर्मचारी भी पहुंचे हाईकोर्ट
हरियाणा के कई बोर्ड और कारपोरेशनों के कर्मचारियों ने सीनियर एडवोकेट गिरीश अग्निहोत्री के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि बोर्ड व कारपोरेशन पर सरकार सीधे तौर पर कोई फैसला नहीं थोप सकती। यह स्वायत्त संस्था पर निर्भर करता है कि सरकार के सर्कुलर को लागू करे या नहीं।
याचिका में कहा गया है कि सरकार जब कोई फैसला लेती है तो यह कर्मचारियों के प्रति वादा होता है और सरकार ऐसे फैसले को पलट कर वादाखिलाफी नहीं कर सकती। लिहाजा बोर्ड और कारपोरेशनों में इस फैसले को लागू करने पर रोक लगाई जाए। यह मामला जस्टिस एचएस सिद्धू की बेंच के पास आया है। बेंच ने नोटिस जारी करते हुए सुनवाई आठ दिसंबर तक स्थगित कर दी।
सभी याचिकाओं पर एक साथ हो सकती है सुनवाई
हाईकोर्ट में सरकारी कर्मचारियों और स्वायत्त संस्थाओं के कर्मचारियों की याचिकाएं फिलहाल अलग-अलग बेंच के पास पहुंची हैं और अदालतों ने सरकार को नोटिस भी जारी कर दिया है। लेकिन अब माना जा रहा है कि पूरा मामला एकसमान होने के कारण सभी याचिकाएं की सुनवाई एक साथ एक ही बेंच के समक्ष हो सकती है।