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हरियाणाः छात्र संघ चुनाव पर लटकी हाईकोर्ट की तलवार, सरकार और विश्वविद्यालयों को नोटिस

Wed, 17 Oct 2018 09:22 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 17 Oct 2018 09:22 AM IST
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high court issued notice to Government and universities on student union elections
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : File Photo

हरियाणा में बुधवार को होने वाले छात्रसंघ चुनाव में खामियां बताते हुए दाखिल कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार तथा प्रदेश के विश्वविद्यालयों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव का नतीजा इन याचिकाओं पर आने वाले फैसले पर निर्भर होगा।

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छात्रों ने एडवोकेट रविंदर सिंह ढुल और एडवोकेट एसएस नारा के माध्यम से याचिका दाखिल करते हुए हरियाणा छात्रसंघ चुनाव को चुनौती दी है। राज्य में वर्ष 1996 में स्टूडेंट काउंसिल के चुनाव होते रहे थे। लेकिन 1996 में चुनाव के दौरान हुई हिंसा के बाद सरकार ने स्टूडेंट काउंसिल के चुनावों पर रोक लगा दी थी।  मौजूदा सरकार ने लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के आधार पर राज्य में एक बार फिर स्टूडेंट काउंसिल चुनाव करवाए जाने के लिए हिसार की गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी के कुलपति टंकेश्वर कुमार की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया था।

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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : फाइल फोटो

टंकेश्वर कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी जिसे सार्वजनिक नहीं किया। हाईकोर्ट को बताया गया कि 9 अक्तूबर को सरकार ने टंकेश्वर कमेटी की रिपोर्ट को सार्वजनिक करते हुए उसी दिन राज्य की सभी यूनिवर्सिटी को 17 अक्तूबर को स्टूडेंट कौंसिल के चुनाव करवाए जाने के आदेश दे दिए। याचिका में कहा गया कि चुनाव में वोट देने और चुनाव लड़ने से रिसर्च स्कॉलर को वंचित रखा गया है। 

यह रिसर्च स्कॉलर के अधिकारों का हनन है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वीकार की गई लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के खिलाफ भी है। साथ ही क्लास रिप्रेजेंटेटिव के चुनाव की प्रक्रिया में भी खामियां है क्योंकि यदि कोई चुनाव नहीं लड़ना चाहता तो ऐसे में क्लास में सबसे ज्यादा अंक लाने वाले छात्र को रिप्रेजेंटेटिव बनाने का प्रावधान है।

 साथ ही यह भी स्पष्ट नहीं है कि यदि कोई क्लास रिप्रेजेंटेटिव का चुनाव जीतता है तो क्या वह ऑफिस बियरर्स का चुनाव लड़ सकते हैं। हाईकोर्ट ने सभी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हरियाणा सरकार व विश्वविद्यालयों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। साथ ही इन खामियों पर सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि कोर्ट को यदि लगेगा तो चुनाव भी खारिज किया जा सकता है। 

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