Highcourt: कॉलेज को सशर्त मान्यता देने पर एनसीटीई पर 10 लाख का जुर्माना, जिम्मेदारी अधिकारी से होगी वसूली
सियोन एजुकेशन एंड वेलफेयर सोसायटी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर 2022 सत्र के लिए बीएड के लिए एडमिशन करने की अनुमति मांगी थी। हाईकोर्ट ने प्रोविजनल तौर पर कॉलेज को प्रवेश की अनुमति दे भी दी थी। बाद में एनसीटीई ने हाईकोर्ट को बताया था कि कॉलेज को 2015 में सशर्त मान्यता दी गई थी। इस पर हाईकोर्ट ने एनसीटीई को फटकार लगाई और कहा था कि इस तरह की मान्यता कैसे दी जा सकती है, जबकि सुप्रीम कोर्ट 2012 में इसे अवैध करार दे चुका है।
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद सशर्त मान्यता देने पर नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (एनसीटीई) पर 10 लाख रुपये जुर्माना लगाया है। हाईकोर्ट ने इसके लिए जिम्मेदार अधिकारी की पहचान कर उससे यह राशि वसूलने का आदेश दिया है।
साथ ही बीएड कॉलेज पर भी हाईकोर्ट ने 10 लाख रुपये जुर्माना लगाया और कहा कि उसने भी विसंगतियों को दूर नहीं किया। दोनों को यह राशि पीजीआई पुअर पेशेंट फंड में जमा करवाने का निर्देश दिया गया है।
हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में एनसीटीई ने कॉलेज की मदद करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कोर्ट के अंतरिम आदेश से विद्यार्थियों को प्रवेश की अनुमति मिली थी और अंतरिम आदेश तुड़वाने का एनसीटीई ने कोई प्रयास नहीं किया। कोर्ट को विसंगतियों के बारे में एनसीटीई ने अवगत भी नहीं करवाया। गत वर्ष अक्टूबर में हाईकोर्ट में क्षेत्रीय निदेशक भी मौजूद थे। बावजूद इसके इस दिशा में कोई काम नहीं किया गया। कोर्ट ने कहा कि हम नहीं चाहते कि विद्यार्थियों का भविष्य खराब हो। ऐसे में 2022 के अंतरिम आदेश से प्रवेश पाने वाले विद्यार्थियों को उनकी डिग्री जारी करने का भी आदेश जारी किया गया।
सशर्त मान्यता वाले हरियाणा-पंजाब के सभी कॉलेज अवैध
इस मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा था कि उनके संज्ञान में ऐसे कई मामले आए हैं जहां कॉलेजों को सशर्त मान्यता देकर बीएड करवाने की अनुमति दी जा रही है। ऐसी मान्यता वाले सभी कॉलेज अवैध हैं जो हरियाणा व पंजाब में धड़ल्ले से चल रहे हैं। कोर्ट ने कहा था कि इसके लिए एनसीटीई जिम्मेदार है और उनके खिलाफ आपराधिक मामला चलाया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट ने एनसीटीई के क्षेत्रीय निदेशक को हाजिर रहने का आदेश दिया था। कोर्ट के आदेश पर गत वर्ष अक्टूबर में क्षेत्रीय निदेशक मुकेश कुमार हाईकोर्ट में पेश हुए और कोर्ट को विश्वास दिलाया था कि हरियाणा व पंजाब के कॉलेजों के निरीक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदर्श शिक्षा महाविद्यालय मामले में जारी दिशा निर्देशों के तहत कमेटी गठित की जाएगी। यह कमेटी कॉलेजों का निरीक्षण करेगी और मानकों को पूरा न करने वाले कॉलेजों के खिलाफ कार्रवाई करेगी। साथ ही उनकी मान्यता के मुद्दे को लेकर तुरंत हरियाणा व पंजाब सरकार से मिलकर हल निकाला जाएगा। मामला तब से हाईकोर्ट में विचाराधीन था।
सैकड़ों बीएड कॉलेजों पर लटकी कार्रवाई की तलवार
हरियाणा में 350 तो पंजाब में 176 बीएड कॉलेज हैं और हाईकोर्ट टिप्पणी कर चुका है कि अधिकतर कॉलेज सशर्त मान्यता के साथ चल रहे हैं। अब हाईकोर्ट की एनसीटीई पर कार्रवाई के आदेश के बाद इन अस्थाई मान्यता के साथ चल रहे कॉलेजों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है।