फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   High Court directs Haryana Electricity Department, engineer degree

जिस नोटिफिकेशन के नाम पर हजारों को बनाया इंजीनियर, वह जारी हुआ ही नहीं

Fri, 05 Jan 2018 09:49 AM IST
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 05 Jan 2018 09:49 AM IST
विज्ञापन
High Court directs Haryana Electricity Department, engineer degree
Court - फोटो : Demo Pics
केंद्र सरकार की एक चूक की वजह से पिछले 40 साल में हजारों डिप्लोमा धारकों को दस वर्ष का अनुभव होने की स्थिति में इंजीनियरिंग डिग्री धारक बना दिया गया। केंद्र सरकार की 26 मई 1977 की जिस नोटिफिकेशन का हवाला देकर एक्स सर्विसमैन को यह लाभ दिया गया, वह असल में कभी जारी ही नहीं किया गया ।
विज्ञापन


यह बात मानव संसाधन मंत्रालय के सचिव ने हलफनामे के माध्यम से हाईकोर्ट में खुद मानी है। इसके बाद हाईकोर्ट ने हरियाणा विद्युत वितरण निगम को यह लाभ लेने वालों का प्रमोशन को वापस लेकर वरिष्ठता सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं। 
विज्ञापन


मामला हरियाणा विद्युत वितरण निगम में असिस्टेंट इंजीनियर पद को भरने की प्रक्रिया के दौरान पैदा हुए विवाद से उजागर हुआ। असिस्टेंट इंजीनियर पद के लिए साढ़े 12 प्रतिशत पद डिग्री धारकों के लिए रखे गए थे। एक्स सर्विसमैन कोटा में 2004-05 में जूनियर इंजीनियर के तौर पर भर्ती हुए डिप्लोमा धारकों, जिन्हें 10 वर्ष का अनुभव था,ने दावेदारी पेश की। अपनी दावेदारी पेश करते हुए उन्होंने केंद्र सरकार की 26 मई 1977 के नोटिफिकेशन का हवाला दिया था, जिसके आधार पर उन्हें मेरिट सूची में शामिल कर इन पदों के लिए योग्य माना गया। इसे चुनौती देते हुए इंजीनियरिंग डिग्रीधारक आवेदकों ने हाईकोर्ट की शरण ली। 
विज्ञापन
विज्ञापन


याचिकाकर्ताओं की आपत्ति थी कि डिप्लोमा और 10 वर्ष का अनुभव आधार बनाकर एक्स सर्विसमैन को इंजीनियरिंग डिग्री के बराबर नहीं माना जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से इस बारे में जवाब मांगा। केंद्र सरकार की ओर से मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय के सचिव ने हलफनामे में बताया कि इस तरह की कोई नोटिफिकेशन केंद्र द्वारा जारी ही नहीं किया गया है। 

केंद्र सरकार ने मानी गलती

High Court directs Haryana Electricity Department, engineer degree
कोर्ट - फोटो : amar ujala
फिर कहा, नोटिफिकेशन नहीं, आफिस मेमोरेंडम
इस पर एक्स सर्विसमैन की ओर से कहा गया कि यह नोटिफिकेशन नहीं बल्कि ऑफिस मेमोरेंडम है। हाईकोर्ट ने हस्ताक्षर की अनुपस्थिति में उसे ऑफिस मेमोरेंडम मानने से भी इनकार कर दिया।

इस दौरान एक्स सर्विसमैन की ओर से कहा गया कि इसी दस्तावेज को आधार बनाकर हजारों को प्रमोट तथा नियुक्त किया गया है और उनको भी प्रमोशन मिला है। गलती केंद्र की है तो उन्हें दिया गया प्रमोशन का लाभ वापस नहीं लिया जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने कहा कि गलती सुधारने की संभावना हमेशा मौजूद रहती है और यहां पर भी यह संभावना मौजूद है। हाईकोर्ट ने विद्युत वितरण निगम को प्रमोशन वापस लेकर नए सिरे से वरिष्ठता सूची तैयार करने के आदेश दिए हैं। 

केंद्र सरकार ने मानी गलती
मामले की सुनवाई के दौरान जब दलील दी गई कि मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय का गठन 1985 में हुआ है और यह नोटिफिकेशन उससे पहले की है तो हो सकता है कि यह नोटिफिकेशन गुम हो गई हो। इस पर केंद्र ने कहा कि न तो प्रकाशन विभाग न किसी अन्य विभाग के पास ऐसी कोई जानकारी मौजूद है। ऐसे में केंद्र का स्टैंड है कि ऐसी कोई नोटिफिकेशन कभी नहीं जारी किया गया। हालांकि इस दस्तावेज के कारण पिछले 40 साल से हुई प्रमोशन और नियुक्तियों के लिए केंद्र की गलती मानी है और कहा कि अब इसको लेकर केंद्र का स्टैंड क्लीयर है।

देश के लगभग सभी राज्यों में दिया गया लाभ
केंद्र की इस नोटिफिकेशन के आधार पर न केवल हरियाणा में बल्कि देश के हर हिस्से में एक्स सर्विसमैन को लाभ दिया गया है। ऐसे में अब इस लाभ को पाने वालों के दावों पर भी सवाल उठ गए है। वर्तमान में इसको लेकर कई मामले विभिन्न हाईकोर्ट में लंबित हैं और अब केंद्र के इस स्टैंड के बाद सभी के निपटारे का रास्ता साफ हो गया है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed