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Chandigarh: कुमार विश्वास की याचिका पर हाईकोर्ट का फैसला सुरक्षित, अरविंद केजरीवाल पर की थी टिप्पणी
Tue, 30 Aug 2022 05:21 PM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Tue, 30 Aug 2022 05:21 PM IST
सार
कवि कुमार विश्वास की याचिका पर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। दरअसल, कुमार विश्वास ने अरविंद केजरीवाल पर एक टिप्पणी की थी। इसके बाद उनके खिलाफ पंजाब के रोपड़ में एक मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद कुमार विश्वास ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की शरण ली और अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी।
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कुमार विश्वास
- फोटो : twitter.com/DrKumarVishwas
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विस्तार
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ बयान मामले में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की अपील पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। फैसला सुनाने तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक जारी रखने का हाईकोर्ट ने आदेश दिया है। कुमार विश्वास ने याचिका दाखिल करते हुए बताया कि उनके खिलाफ 12 अप्रैल को रोपड़ में एफआईआर दर्ज की गई थी।
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यह एफआईआर न सिर्फ कानूनी प्रक्रिया का उलंघन कर दर्ज की गई है बल्कि यह राजनैतिक रंजिश का नतीजा है। इस एफआईआर को अपने विरोधियों से प्रतिशोध लेने का जरिया बनाया गया है। इन दलीलों के साथ ही एफआईआर को रद्द करने की कुमार विश्वास ने हाईकोर्ट से मांग की है। कुमार विश्वास ने कहा कि 12 फरवरी को उनके दिए गए इंटरव्यू को आधार बनाकर रोपड़ में एफआईआर दर्ज की गई जबकि यह इंटरव्यू उन्होंने मुंबई में दिया था।
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इस एफआईआर को दर्ज करने में पुलिस ने काफी तेजी दिखाई क्योंकि शिकायत 12 अप्रैल को शाम छह बजकर 10 मिनट पर दी गई और उसी समय शाम सात बजकर 50 मिनट पर एफआईआर दर्ज कर दी गई। इसके बाद एसआईटी उनके दिल्ली के आवास पर पहुंची लेकिन वह घर पर नहीं थे। याची ने कहा कि उसे इस एफआईआर की कॉपी तक नहीं दी गई।
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इस एफआईआर की कॉपी पुलिस ने अपनी वेबसाइट पर अपलोड ही नहीं की थी जबकि उसके पहले और बाद की अन्य एफआईआर वेबसाइट पर अपलोड थी। 21 अप्रैल को उन्होंने रूपनगर के एसएसपी से एफआईआर की कॉपी मांगी थी जो 22 अप्रैल दोपहर तीन बजकर 20 मिनट में मिली।
कुमार विश्वास ने कहा कि पंजाब में आप की सरकार बनने के बाद से लगातार केजरीवाल विरोधियों के खिलाफ मामले दर्ज किए जा रहे हैं। यह एफआईआर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन होने के साथ ही राजनीतिक रंजिश का नजीता हैं। ऐसे में एफआईआर रद्द करने की याचिका में मांग की गई है।