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हरियाणा: निजी क्षेत्र की नौकरियों में प्रदेश के युवाओं को 75 फीसदी आरक्षण मामले में हाईकोर्ट का फैसला सुरक्षित

Thu, 17 Mar 2022 08:05 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Thu, 17 Mar 2022 08:05 PM IST
सार

हरियाणा सरकार अपील में सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी और कहा था कि हाईकोर्ट ने बिना उनका पक्ष सुने आरक्षण पर रोक लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने रोक का आदेश रद्द करते हुए हाईकोर्ट को एक माह के भीतर केस का निपटारा करने का आदेश दिया था।

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High Court decision reserved on Haryana 75 percent quota for locals in private jobs
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हरियाणा सरकार की ओर से निजी क्षेत्र की नौकरियों में हरियाणा के निवासियों को दिए गए 75 प्रतिशत आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिका पर सभी पक्षों को सुनने के बाद गुरुवार को हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार याचिका का निपटारा करने के लिए सोमवार से रोजाना सुनवाई हो रही थी।

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मामले का निपटारा करने की सुप्रीम कोर्ट की दी गई मोहलत 16 मार्च को हो समाप्त चुकी है। फरीदाबाद इंडस्ट्रियल एसोसिएशन व अन्य ने हाईकोर्ट को बताया था कि निजी क्षेत्र में योग्यता और कौशल के अनुसार लोगों का चयन किया जाता है। यदि नियोक्ताओं से कर्मचारी को चुनने का अधिकार ले लिया जाएगा तो उद्योग कैसे आगे बढ़ सकेंगे। हरियाणा सरकार का 75 प्रतिशत आरक्षण का फैसला योग्य लोगों के साथ अन्याय है। यह कानून उन युवाओं के सांविधानिक अधिकारों का हनन है, जो अपनी शिक्षा और योग्यता के आधार पर भारत के किसी भी हिस्से में नौकरी करने को स्वतंत्र हैं।
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सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार ने जवाब दाखिल करते हुए कहा कि संविधान के जिस प्रावधान का हवाला देकर यह एसोसिएशन हाईकोर्ट पहुंची है, वह नागरिकों के लिए है, कंपनी पर वह लागू ही नहीं होता। ऐसे में याचिका को खारिज किया जाए। हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार द्वारा किए गए इस प्रावधान पर रोक लगा दी थी। इसके बाद हरियाणा सरकार अपील में सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी और कहा था कि हाईकोर्ट ने बिना उनका पक्ष सुने आरक्षण पर रोक लगाई है। 
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सुप्रीम कोर्ट ने रोक का आदेश रद्द करते हुए हाईकोर्ट को एक माह के भीतर केस का निपटारा करने का आदेश दिया था। इस मामले में पिछली सुनवाई पर जस्टिस अजय तिवारी ने बिना कोई कारण बताए खुद को अलग कर लिया था। सोमवार को मुख्य न्यायाधीश ने इस याचिका पर सुनवाई के लिए नई बेंच गठित कर दी। रोजाना सुनवाई करते हुए जस्टिस एजी मसीह पर आधारित खंडपीठ ने सभी पक्षों को सुनने के बाद गुरुवार को फैसला सुरक्षित रख लिया।

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