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हाईकोर्ट ने कहा- घरेलू हिंसा कानून बन रहा पतियों और ससुराल वालों को आतंकित करने का माध्यम

Mon, 15 Oct 2018 10:15 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 15 Oct 2018 10:15 AM IST
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High Court comment on domestic violence law
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : File Photo

घरेलू हिंसा रोकने के लिए पत्नियों के हक में बनाए गए कानून का इस्तेमाल अब महिलाओं द्वारा पतियों, ससुराल वालों और उनके रिश्तेदारों को आतंकित करने के लिए किया जा रहा है। इस टिप्पणी के साथ ही शिकायतकर्ता महिला के ननदोई को जारी समन आदेश और उनके खिलाफ कार्रवाई पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने खारिज कर दी।

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याचिका दाखिल करते हुए गौरव ने कहा था कि उसका विवाह शिकायतकर्ता की ननद के साथ 2015 में हुआ था। विवाह के बाद याची की पत्नी आस्ट्रेलिया चली गई थी और उसने अमृतसर में मकान ले लिया। विवाहिता ने अपने पति सुनील धामी, सास रेशम कौर, ननद अमनदीप और ननदोई गौरव के खिलाफ घरेलू हिंसा का केस दाखिल कर दिया।
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 याची ने कहा कि जब वह अपनी पत्नी के मायके में उसके साथ नहीं रहता तो कैसे उसे दहेज मांगने वालों के खिलाफ शिकायत में शामिल किया जा सकता है। साथ ही याची ने कहा कि उसकी पत्नी आस्ट्रेलिया में है और उसे भी इस केस में शामिल कर दिया गया है। हाईकोर्ट ने याचिका पर अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि घरेलू हिंसा केस में उन लोगों को ही शामिल किया जा सकता है जो उस घर में रह रहे हों।
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   जब परिवार को कोई सदस्य अलग घर लेकर रह रहा है तो वह रिश्तेदार की श्रेणी में आ जाता है। इस मामले में भी ननदोई अलग रहा रहा था तो ऐसे में वह इस केस में कवर नहीं होता। यह महिला द्वारा दबाव बनाने का तरीका है और पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग। मजिस्ट्रेट ने भी समन आदेश जारी करते हुए इस बात पर गौर नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि घरेलू हिंसा रोकने के लिए बनाया गया कानून अब पतियों और उनके रिश्तेदारों को आतंकित करने का माध्यम बन रहा है। इस टिप्पणी के साथ ही हाईकोर्ट ने ननदोई के खिलाफ समन आदेश और कार्रवाई को खारिज कर दिया।

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