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Punjab: गोइंदवाल साहिब में गैंगवार के बाद पंजाब की जेलों में हाई अलर्ट, गैंगस्टरों को अलग-अलग बैरकों में भेजा
Mon, 27 Feb 2023 12:26 AM IST
ajay kumar
संवाद न्यूज एजेंसी, बठिंडा/अमृतसर (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, बठिंडा/अमृतसर (पंजाब)
Published by: ajay kumar
Updated Mon, 27 Feb 2023 12:26 AM IST
सार
गोइंदवाल साहिब जेल में गैंगवार की घटना को अंजाम लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने दिया है। गोल्डी बराड़ के कहने पर गैंगस्टरों ने मनदीप तूफान और मनमोहन सिंह को मौत के घाट उतारा है। जान गंवाने वाले दोनों गैंगस्टर जग्गू भगवानपुरिया गैंग के थे। ऐसे में पंजाब की जेलों में गैंगवार बढ़ने की आशंका है।
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गोइंदवाल साहिब जेल।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
गोइंदवाल साहिब जेल में गैंगवार के बाद पंजाब की जेलों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। जेल विभाग ने सभी जेलों में बंद गैंगस्टरों की सुरक्षा की समीक्षा करने का आदेश दिया है। मौजूदा समय में बठिंडा केंद्रीय जेल में 50 से अधिक गैंगस्टर बंद हैं। इन सभी गैंगस्टरों को हाई सिक्योरिटी में रखा गया है। इस घटना के बाद जेल प्रशासन ने जेल के हाई सुरक्षा जोन में जांच की और वहां पर बंद विभिन्न गुटों के गैंगस्टरों को एहतियात के तौर पर अलग-अलग कर दिया गया ताकि वे एक-दूसरे पर हमला न कर सकें।
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बता दें कि गोइंदवाल साहिब जेल में गैंगवार की घटना को अंजाम लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने दिया है। गोल्डी बराड़ के कहने पर गैंगस्टरों ने मनदीप तूफान और मनमोहन सिंह को मौत के घाट उतारा है। जान गंवाने वाले दोनों गैंगस्टर जग्गू भगवानपुरिया गैंग के थे। ऐसे में पंजाब की जेलों में गैंगवार बढ़ने की आशंका है। इसकी वजह यह है कि दोनों गैंग के कई गैंगस्टर पंजाब की विभिन्न जेलों मेंफ बंद हैं। वहीं गैंगस्टर जग्गू भगवानपुरिया बठिंडा केंद्रीय जेल में बद है।
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10 जेलों की हालत दयनीय
पंजाब की जेलों की हालत बेहद दयनीय है। एक तरफ जहां उनमें तय संख्या से अधिक कैदी हैं, वहीं 10 जेलों के तुरंत नवीनीकरण की जरूरत है। साथ ही जेलें स्टाफ की कमी का सामना कर रही हैं। यह बात कुछ समय पहले पंजाब स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी की तरफ से कॉमन वेल्थ ह्यूमन राइट्स के सहयोग से तैयार की रिपोर्ट में सामने आई थी। इसके बाद पंजाब सरकार भी इस रिपोर्ट को आधार बनाकर अपनी जांच कर रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही इस दिशा में सुधार प्रक्रिया शुरू होगी। हालांकि यह बात भी सामने आई है कि नई जेलों को बनाने की रफ्तार काफी कम है। अधिकतर जेलें काफी पुरानी हैं।
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पंजाब की जेलों में 42.1 फीसदी कैदी नशीली दवाओं और साइकोट्रोपिक पदार्थ (एनडीपीस) अधिनियम के तहत बंद हैं। अथॉरिटी की तरफ से अपनी रिपोर्ट में राज्य की 24 जेलों को कवर किया गया। 660 कैदियों के साथ-साथ जेल अधिकारियों और कानूनी सेवा संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की गई थी। रिपोर्ट में कई चीजों को उजागर किया गया था। इतना ही नहीं जेलों में वरिष्ठ पदों पर महिला अधिकारियों की भर्ती नहीं की जा रही थी। 103 अधिकारियों में से केवल तीन महिला अधिकारी ही तैनात हैं।
इसके अलावा रिपोर्ट में यह भी बात सामने आई थी कि जेलों में कैदियों के लिए चल रही विभिन्न यूनिटों में फंड की कमी है। इस वजह से कैदियों को उचित भुगतान तक नहीं हो पाता है। हालांकि नई सरकार आने के बाद बाद इनमें काफी सुधार हुआ है।