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पेरिस में 57 लाख में बिका चंडीगढ़ का हेरिटेज फर्नीचर, पंजाब यूनिवर्सिटी की स्टडी टेबल भी बिकी
Thu, 12 Mar 2020 12:21 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Thu, 12 Mar 2020 12:21 PM IST
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नीलामी
चंडीगढ़ का हेरिटेज फर्नीचर एक बार फिर विदेश में नीलाम हुआ है। ली कार्बूजिए के कजन पियरे जेनरे के डिजाइन किए तीन हेरिटेज फर्नीचर को पेरिस में इस बार 57.20 लाख रुपये में नीलाम किया गया। इसमें पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) का स्टडी टेबल 31.97 लाख में बिका है। इसके अलावा कुर्सियां भी इस नीलामी में लाखों में बिकी हैं।
यूटी प्रशासन के हेरिटेज प्रोटेक्शन सेल के सदस्य अजय जग्गा ने 13 फरवरी को एडवाइजर मनोज परिदा को पत्र लिखकर इस नीलामी की जानकारी दी थी। हालांकि, प्रशासन की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई और 5 मार्च को पेरिस के अगट्स नीलामी घर में यह बोली लगाई गई।
बुधवार को अजय जग्गा ने भारत सरकार के डायरेक्टर रेवेन्यू इंटेलिजेंस को लिखे पत्र में बताया है कि पांच मार्च को हुई नीलामी में 31 लाख 97 हजार का स्टडी टेबल बिका है। इसके अलावा 14 लाख 30 हजार में ईजी आर्म्स चेयर्स की नीलामी हुई है और टीक डेस्क (लेदर) 10.93 लाख में बिका है।
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अजय जग्गा ने जांच की मांग की है। इसके साथ ही कहा कि चंडीगढ़ का हेरिटेज फर्नीचर अमेरिका, कनाडा, जर्मनी, यूके, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और इजराइल समेत अन्य देशों में मौजूद है। इन देशों में भारतीय एबेंसी को अलर्ट करना चाहिए। बताया कि हेरिटेज फर्नीचर फर्जी दस्तावेजों पर तस्करी के जरिये विदेश पहुंचे हैं। भारत से दूसरे देशों में जाने वाली इस तरह की आइटम के लिए आपातकालीन चेक रखने की जरूरत है। पिछले छह साल की ट्रांजेक्शन की भी जांच होनी चाहिए।
इस बार तीन फर्नीचर हुए नीलाम
पियरे जेनरे चंडीगढ़ के फ्रांसीसी आर्किटेक्ट ली कार्बूजिए के साथ काम करते थे। इसी कारण ली कार्बूजिए ने चंडीगढ़ में घरों, सड़कों और पार्कों की प्लानिंग से लेकर सरकारी दफ्तरों में रखी जाने वाली कुर्सियों, मेज आदि को लेकर भी यूनीक स्टाइल के डिजाइन की जिम्मेदारी पियरे जेनरे को दी थी। पेरिस के इस ऑक्शन हाउस में इस बार पांच फर्नीचर नीलामी के लिए रखे गए थे और तीन हेरिटेज आइटम्स की नीलामी हुई है। इस बोली में लगी कीमत ही इस हेरिटेज फर्नीचर की महत्वता की कहानी बयां करती है।
विदेश कैसे पहुंचा फर्नीचर, किसी को जानकारी नहीं
चंडीगढ़ का हेरिटेज फर्नीचर विदेश पहुंच कैसे रहा है, यह बड़ा सवाल है,लेकिन इसका जवाब किसी के पास नहीं है। चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारी अभी तक यह पता नहीं लगा पाए हैं कि हेरिटेज फर्नीचर विदेश तक कब और कैसे पहुंच रहा है। कौन लोग हैं, जो चंडीगढ़ के फर्नीचर को विदेश में ले जाकर करोड़ों में बेच रहे हैं। पहले भी विदेशों में कई बार चंडीगढ़ का हेरिटेज सामान नीलाम हुआ है। इससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा है।
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यूटी प्रशासन के हेरिटेज प्रोटेक्शन सेल के सदस्य अजय जग्गा ने 13 फरवरी को एडवाइजर मनोज परिदा को पत्र लिखकर इस नीलामी की जानकारी दी थी। हालांकि, प्रशासन की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई और 5 मार्च को पेरिस के अगट्स नीलामी घर में यह बोली लगाई गई।
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बुधवार को अजय जग्गा ने भारत सरकार के डायरेक्टर रेवेन्यू इंटेलिजेंस को लिखे पत्र में बताया है कि पांच मार्च को हुई नीलामी में 31 लाख 97 हजार का स्टडी टेबल बिका है। इसके अलावा 14 लाख 30 हजार में ईजी आर्म्स चेयर्स की नीलामी हुई है और टीक डेस्क (लेदर) 10.93 लाख में बिका है।
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अजय जग्गा ने जांच की मांग की है। इसके साथ ही कहा कि चंडीगढ़ का हेरिटेज फर्नीचर अमेरिका, कनाडा, जर्मनी, यूके, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और इजराइल समेत अन्य देशों में मौजूद है। इन देशों में भारतीय एबेंसी को अलर्ट करना चाहिए। बताया कि हेरिटेज फर्नीचर फर्जी दस्तावेजों पर तस्करी के जरिये विदेश पहुंचे हैं। भारत से दूसरे देशों में जाने वाली इस तरह की आइटम के लिए आपातकालीन चेक रखने की जरूरत है। पिछले छह साल की ट्रांजेक्शन की भी जांच होनी चाहिए।
इस बार तीन फर्नीचर हुए नीलाम
पियरे जेनरे चंडीगढ़ के फ्रांसीसी आर्किटेक्ट ली कार्बूजिए के साथ काम करते थे। इसी कारण ली कार्बूजिए ने चंडीगढ़ में घरों, सड़कों और पार्कों की प्लानिंग से लेकर सरकारी दफ्तरों में रखी जाने वाली कुर्सियों, मेज आदि को लेकर भी यूनीक स्टाइल के डिजाइन की जिम्मेदारी पियरे जेनरे को दी थी। पेरिस के इस ऑक्शन हाउस में इस बार पांच फर्नीचर नीलामी के लिए रखे गए थे और तीन हेरिटेज आइटम्स की नीलामी हुई है। इस बोली में लगी कीमत ही इस हेरिटेज फर्नीचर की महत्वता की कहानी बयां करती है।
विदेश कैसे पहुंचा फर्नीचर, किसी को जानकारी नहीं
चंडीगढ़ का हेरिटेज फर्नीचर विदेश पहुंच कैसे रहा है, यह बड़ा सवाल है,लेकिन इसका जवाब किसी के पास नहीं है। चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारी अभी तक यह पता नहीं लगा पाए हैं कि हेरिटेज फर्नीचर विदेश तक कब और कैसे पहुंच रहा है। कौन लोग हैं, जो चंडीगढ़ के फर्नीचर को विदेश में ले जाकर करोड़ों में बेच रहे हैं। पहले भी विदेशों में कई बार चंडीगढ़ का हेरिटेज सामान नीलाम हुआ है। इससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा है।