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वन नेशन-वन कार्ड के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी
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वन नेशन-वन कार्ड के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी करते प्रशासक बदनौर व अन्य अधिकारी।
- फोटो : CHANDIGARH
चंडीगढ़। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना वन नेशन-वन कार्ड को शहर में लागू कर दिया गया है। शनिवार को सुखना लेक पर एक कार्यक्रम के दौरान पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने इस योजना के लिए एक हेल्पलाइन नंबर 14445 की शुरुआत की। इसके साथ लोगों के लिए सेक्टर-17 स्थित खाद्य व आपूर्ति विभाग के दफ्तर में एक विंडो की भी शुरुआत की गई, ताकि लोग वहां जाकर योजना से संबंधित जानकारी हासिल कर सकें।
अगर कोई वन नेशन वन कार्ड के तहत खुद को पंजीकृत कराना चाहता है तो वह हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर सकता है या फिर वह ऑफिस विंडो पर भी संपर्क कर सकते हैं। इसके लिए आधार कार्ड, राशन कार्ड और बैंक खाते की जानकारी देनी होगी। पंजीकरण होने के बाद प्रशासन द्वारा उसके बैंक खाते में फूड सब्सिडी राशि भेजी जाएगी। इस योजना से प्रवासी मजदूरों को सबसे ज्यादा लाभ होगा, क्योंकि वह थोड़े समय के लिए एक जगह रुकते हैं और फिर काम की तलाश में दूसरे राज्य में चले हो जाते हैं। उस राज्य में राशन कार्ड नहीं बनवाने के चलते ऐसे लोग राशन से वंचित रह जाते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। प्रधानमंत्री ने देश के सभी यूटी को प्रमुखता के आधार पर इसे शुरू करने के निर्देश दिए थे, ताकि वह अन्य राज्यों के लिए मॉडल बन सकें। इस पर काम करते हुए चंडीगढ़ ने अगस्त माह में वन नेशन वन कार्ड को लांच कर दिया था।
अन्य राज्यों के राशन कार्ड भी चंडीगढ़ में होंगे मान्य, लेकिन नहीं मिलेगा राशन
चंडीगढ़ में अन्य राज्यों की तरह सरकारी राशन की दुकानें नहीं हैं, जहां पर राशन कार्ड दिखाकर सब्सिडी पर राशन मिलता है। चंडीगढ़ में कई साल पहले इस व्यवस्था को बंद कर दिया गया था और राशन देने की बजाय उसकी कीमत कार्ड धारकों को उनके बैंक खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से भेजी जाने लगी। शहर में अभी 64 हजार ऐसे परिवार हैं, जिन्हें डीबीटी से हर महीने राशन का पैसा मिलता है। यूटी प्रशासन की ओर से जारी वन नेशन वन कार्ड से लाभार्थी चंडीगढ़ और पुडुचेरी में राशन ले सकते हैं, क्योंकि यहां पर डीबीटी स्कीम चल रही है। अगर कार्ड होल्डर किसी अन्य राज्य में शिफ्ट हो जाता है, जहां पर डीबीटी स्कीम नहीं है, तब वह वहां की स्थानीय सरकारी राशन की दुकान से राशन प्राप्त कर सकते हैं। खाद्य व आपूर्ति विभाग और एनआईसी नए राशन कार्ड के लिए सॉफ्टवेयर तैयार करने पर साथ में काम कर रहे हैं। कार्ड में परिवार के साथ ही लाभार्थियों की बैंक अकाउंट की जानकारी होगी। कार्ड होल्डर देश के किसी भी हिस्से में इसका उपयोग कर सकेंगे।
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अगर कोई वन नेशन वन कार्ड के तहत खुद को पंजीकृत कराना चाहता है तो वह हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर सकता है या फिर वह ऑफिस विंडो पर भी संपर्क कर सकते हैं। इसके लिए आधार कार्ड, राशन कार्ड और बैंक खाते की जानकारी देनी होगी। पंजीकरण होने के बाद प्रशासन द्वारा उसके बैंक खाते में फूड सब्सिडी राशि भेजी जाएगी। इस योजना से प्रवासी मजदूरों को सबसे ज्यादा लाभ होगा, क्योंकि वह थोड़े समय के लिए एक जगह रुकते हैं और फिर काम की तलाश में दूसरे राज्य में चले हो जाते हैं। उस राज्य में राशन कार्ड नहीं बनवाने के चलते ऐसे लोग राशन से वंचित रह जाते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। प्रधानमंत्री ने देश के सभी यूटी को प्रमुखता के आधार पर इसे शुरू करने के निर्देश दिए थे, ताकि वह अन्य राज्यों के लिए मॉडल बन सकें। इस पर काम करते हुए चंडीगढ़ ने अगस्त माह में वन नेशन वन कार्ड को लांच कर दिया था।
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अन्य राज्यों के राशन कार्ड भी चंडीगढ़ में होंगे मान्य, लेकिन नहीं मिलेगा राशन
चंडीगढ़ में अन्य राज्यों की तरह सरकारी राशन की दुकानें नहीं हैं, जहां पर राशन कार्ड दिखाकर सब्सिडी पर राशन मिलता है। चंडीगढ़ में कई साल पहले इस व्यवस्था को बंद कर दिया गया था और राशन देने की बजाय उसकी कीमत कार्ड धारकों को उनके बैंक खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से भेजी जाने लगी। शहर में अभी 64 हजार ऐसे परिवार हैं, जिन्हें डीबीटी से हर महीने राशन का पैसा मिलता है। यूटी प्रशासन की ओर से जारी वन नेशन वन कार्ड से लाभार्थी चंडीगढ़ और पुडुचेरी में राशन ले सकते हैं, क्योंकि यहां पर डीबीटी स्कीम चल रही है। अगर कार्ड होल्डर किसी अन्य राज्य में शिफ्ट हो जाता है, जहां पर डीबीटी स्कीम नहीं है, तब वह वहां की स्थानीय सरकारी राशन की दुकान से राशन प्राप्त कर सकते हैं। खाद्य व आपूर्ति विभाग और एनआईसी नए राशन कार्ड के लिए सॉफ्टवेयर तैयार करने पर साथ में काम कर रहे हैं। कार्ड में परिवार के साथ ही लाभार्थियों की बैंक अकाउंट की जानकारी होगी। कार्ड होल्डर देश के किसी भी हिस्से में इसका उपयोग कर सकेंगे।
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