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आर्थिक समस्या से लाचार, चार महीने से खाली बैठे वकील और मुंशी कर रहे हैं अदालत खुलने का इंतजार

Sun, 12 Jul 2020 01:15 AM IST
Panchkula bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sun, 12 Jul 2020 01:15 AM IST
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Helpless financial problem lawyers scribes sitting vacant four months waiting court open
चंडीगढ़। चार महीने से अदालत का कामकाज ठप पड़ा है। ऐसे में अब वकील भी घर पर रह कर तंग आ चुके हैं। चार महीने खाली बैठने के चलते उन्हें आर्थिक समस्याओं को सामना करना पड़ रहा है। वकीलों के साथ मुंशियों को भी अपने घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। अब ज्यादातर मुंशी और वकील चाहते हैं कि पुख्ता इंतजामों के साथ लंबित मामलों पर सुनवाई शुरूहो जाए, ताकि पीड़ितों को इंसाफ मिलने में देरी न हो।
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बता दें कि अभी वकीलों को चेबंर्स में प्रवेश की अनुमति मिल चुकी है, लेकिन मुंशी और क्लाइंट अभी भी इस इंतजार में हैं कि कब वह अदालत में प्रवेश कर सकें। अदालत के मेन गेट को छोड़कर सभी गेट बंद हैं। वकील भी अदालत खुलने की प्रतिक्षा में हैं।
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खुद करने होंगे सुरक्षा के इंतजाम
अब अदालतों में केसों पर सुनवाई शुरू हो जानी चाहिए। चार महीने से कामकाज बंद है। कोरोना संकट के साथ ही काम करना होगा। पीड़ित भी इंसाफ मिलने के इंतजार में हैं। इसके लिए हमें सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त करने होंगे। हर वकील और मुंशी को पता है कि उन्हें अपनी सुरक्षा कैसे करनी है। कोई भी वकील अब घर पर खाली नहीं बैठ सकता है।
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-करणदीप सिंह खुल्लर, वाइस प्रेसिडेंट बार एसोसिएशन
चार महीने से वकील घर बैठने को मजबूर
अदालतें बंद हुए लंबा समय हो चुका है। सब कुछ खोल दिया गया है तो अदालतें भी खुल जानी चाहिए। चार महीने से वकील घर पर बैठने को मजबूर हैं और क्लाइंट सड़क पर खड़े होकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में शामिल होने को मजबूर हैं। केसों की नियमित सुनवाई के लिए अदालतों को व्यवस्था बनानी चाहिए।
- ज्योति, एडवोकेट, जिला अदालत
वकील नियमों को पालन करने को तैयार वकीलों के पास केस इकट्ठे हो गए हैं। वकील काम शुरू करने को लेकर अदालत से आग्रह कर चुके हैं। कोरोना वायरस के मामले भी लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इसलिए अब और सर्तक रहने की आवश्यकता है। हर ऑफिस में कोरोना से बचाव के लिए सावधानियां बरती जा रही हैं। ऐेसे में वकील भी सभी नियमों का पालन करने के लिए तैयार हैं।

- मंजीत कौर, एडवोकेट, जिला अदालत
चार महीने से कर्जदार हो रहे हैं मुुंशी अधिकतर मुंशी किराए के घर में रहते हैं। चार महीने से कमाई का उनके पास कोई साधन नहीं है। ऐसे में उन्हें अपने घर का राशन जुटा पाना भी मुुश्किल हो रहा है। सभी मुंशी कर्जदार हो गए हैं। अदालत परिसर में प्रवेश तक की अनुमति नहीं मिली है। ऐसे में पूरा दिन अदालत के बाहर धूप में खड़ा रहना पड़ता है। उनके बारे में विचार किया जाना चाहिए। -मनोज कुमार, सीनियर मुंशी
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