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लावारिस कुत्तों से त्रस्त लोगों की कहानी, उनकी जुबानी

Sat, 10 May 2014 01:50 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 10 May 2014 01:50 PM IST
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Heirless Dogs Terror in Chandigarh

चंडीगढ़ में लावारिस कुत्तों के आतंक पर आखिरकार पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए यूटी प्रशासन से इस बाबत तैयार की गई नीति अदालत में पेश करने को कहा है।

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हालांकि इससे पहले शहर में लावारिस कुत्तों के आतंक को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने प्रशासन को ठोस नीति बनाने का निर्देश भी दिया था। लेकिन लंबे समय तक प्रशासन इसके बारे में खामोशी साधे रहा।
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अब हाईकोर्ट ने मामले को स्वत: संज्ञान लेकर यूटी प्रशासन से नीति पर रिपोर्ट तलब कर ली है। मामले की अगली सुनवाई 15 मई को होगी।

वीरवार को सुनवाई के दौरान जवाब देने में असमर्थता जताते हुए यूटी प्रशासन ने सुनवाई टालने की गुहार लगाई थी। शुक्रवार को जब इस मामले में फिर सुनवाई शुरू हुई तो प्रशासन के वकील ने जस्टिस राजन गुप्ता की एकल बेंच के समक्ष तथ्य पेश किया कि शहर में लावारिस कुत्तों पर लगाम लगाने के लिए पुख्ता कदम उठाए जा रहे हैं।
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कुत्तों की नसबंदी की जा रही है और पंजीकरण जरूरी किया गया है। बगैर पंजीकरण के कारण कुत्तों के मालिकों के चालान काटे जाते हैं और लावारिस कुत्तों को पकड़कर डाग शेल्टर में डाला जाता है।

इसके साथ ही प्रशासन से वकील ने अदालत से यहां तक कह डाला कि बगैर भड़काए कुत्ते किसी को नहीं काटते, लिहाजा आम व्यक्ति को जागरूक करने की जरूरत है। हाईकोर्ट ने प्रशासन के इस तर्क पर कहा कि इसका सीधा मतलब है कि प्रशासन लावारिस कुत्तों पर लगाम लगाने में असमर्थ है।

इसी दौरान याचिकाकर्ता के वकील कुनाल मुगलानी ने हाईकोर्ट के समक्ष तथ्य रखा कि लावारिस कुत्तों के मामले में हाईकोर्ट ठोस नीति बनाने का निर्देश दे चुका है। इस पर प्रशासन ने कहा कि नीति बना ली गई है और इसके प्रावधानों को लागू किया जा रहा है।

बेंच ने प्रशासन को स्थिति स्पष्ट करने को कहते हुए 15 मई तक अदालत में जानकारी पेश करने को कहा कि क्या प्रावधान लागू किए जा चुके हैं और कौन से प्रावधान लागू किए जाने हैं।

कोर्ट को बताया मुफ्त दवाएं देते हैं

एडवोकेट मुगलानी के मुताबिक, नीति के प्रावधानों में हालांकि मुआवजे की व्यवस्था नहीं है, लेकिन मुफ्त दवाएं, कुत्तों की नसबंदी और कुत्तों की देखरेख की व्यवस्था है। उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट ने प्रशासन के समक्ष सवाल खड़ा किया था कि क्या कुत्तों के काटने पर पीड़ितों को मुआवजे की व्यवस्था है या नहीं।

कॉलोनी में आवारा कुत्ते दिखे तो यहां फोन करें

Heirless Dogs Terror in Chandigarh

9872511260

डॉ.एमएस कंबोज, सुपरिटेंडेंट
स्लॉटर हाउस, नगर निगम

कुत्ते के काटने पर ये बरतें सावधानियां
- सबसे पहले जख्म को अच्छी तरह साबुन और पानी से धोएं
- जख्म पर कोई एंटीसेप्टिक दवा लगाएं
- तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
- एंटी रेबिज इंजेक्शन और एंटी रेबिज सिरम लगवाएं

लोगों को काटने वाला कुत्ता मरा, अब रैबिज से बचें लोग

Heirless Dogs Terror in Chandigarh

सेक्टर-20 में कई लोगों को अपना शिकार बनाने वाले कुत्तों में से एक कुतिया की मौत हो गई है। इस कुतिया को बुधवार को ही नगर निगम के डॉग कैचर दस्ते ने पकड़ा था। पकड़ने के बाद उसे सेक्टर-38 के सोसायटी फॉर प्रीवेंशन ऑफ क्रूएलिटी टू एनीमल(एसपीसीए) में भेज दिया गया था।

वीरवार दोपहर करीब 3 बजे इस कुतिया ने दम तोड़ दिया। एसपीसीए प्रबंधन ने इस बात की पुष्टि कर दी है। कुत्ते की मौत की वजह अभी पता नहीं लग सकी है। कुत्ते का पोस्टमार्टम किया जा चुका है और अब शुक्रवार को उसका ब्रेन टेस्टिंग के लिए कसौली भेजा जाएगा। वहां से रिपोर्ट आने के बाद ही पता लगेगा कि कुत्ते की मौत रेबिज से हुई है या फिर किसी और वजह से।

इंजेक्शन न लगवाने वालों के लिए खतरा

स्थानीय पार्षद राजेश गुप्ता ने बताया कि उन्हें सूचना मिली है कि जिस कुत्ते ने लोगों को काटा था वह मर गया है। डॉक्टरों के अनुसार काटने के बाद अगर कुत्ता मर जाए तो रेबिज की संभावनाएं बढ़ जाती है। अगर कुत्ते की मौत रेबिज से हुई होगी तो खतरा और बढ़ सकता है। जो लोग एंटी रेबिज इंजेक्शन और सिरम लगवा चुके हैं, उन्हें तो कोई खतरा नहीं होगा, लेकिन अगर किसी ने अभी तक इंजेक्शन नहीं लगवाया होगा उनके लिए खतरा हो सकता है। 

अगर काटने के हफ्ते या दस दिन के भीतर कुत्ते की मौत हो जाती है तो उसे रेबिज की संभावना होती है। ऐसी हालत में उस कुत्ते ने जिस-जिसको काटा है उसे एंटी रेबिज वैक्सीन जल्दी ही करवा लेनी चाहिए अन्यथा रेबिज का खतरा है।
-डॉ. अनिल गर्ग, लाइफ मैंबर, एसोसिएशन फार प्रीवेंशन ऑफ रेबिज इन इंडिया

नगर निगम ने पकड़े 4 कुत्ते
बुधवार को हुई घटनाओं के बाद नगर निगम ने कुत्ते पकड़ने का अभियान चलाया। निगम ने सेक्टर-20 में ही वीरवार को दोबारा कुत्ते पकड़ने के लिए अपना दल भेजा।

यहां से वीरवार को भी 4 कुत्तों को पकड़ा गया। इन्हें सटर्लाइजेशन और ऑपरेशन के लिए भिजवा दिया गया। सूत्रों का कहना है कि अगले तीन दिनों तक सेक्टर-20 में ही कुत्ते पकड़ने का अभियान चलेगा।

सेक्टर-20 के पार्क में करेंगे प्रदर्शन
भाजपा पार्षद राजेश गुप्ता के नेतृत्व में शनिवार 10 मई को सेक्टर-20 के मठ मंदिर के पार्क में प्रदर्शन किया जाएगा। गुप्ता ने कहा कि नगर निगम के अधिकारी कुत्तों की समस्या पर संवेदनहीन हो चुके हैं। कुत्तों के काटने के घटनाओं के बाद उन्होंने अफसरोें को कई बार फोन किए, लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया। वे इस संबंध में सुपरिटेंडेंट स्लॉटर हाउस डॉ.एमएस कंबोज के खिलाफ शिकायत करेंगे। गुप्ता ने कहा कि यह समस्या अब बेहद गंभीर हो चुकी है और अगर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो वे प्रशासक और उनके सलाहकार के पास भी शिकायत करेंगे।

फ्री में नहीं होता इलाज
बुधवार को हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान नगर निगम ने जवाब दिया था कि कुत्ते के काटने पर लोगों को फ्री इलाज की सुविधा दी जाती है। जबकि असलियत कुछ और ही है। सेक्टर-19 स्थित डिस्पेंसरी में कुत्ता काटने के मरीजों को 100 रुपये में वैक्सीनेशन दी जाती है। इसके अलावा मरीजों को बाहर से ही सिरम मंगवाकर लगवानी पड़ती है।

मरीजों को करीब 850 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। इस बारे में नगर निगम के ज्वाइंट कमिश्नर राजीव गुप्ता का कहना है कि उन्होंने कोर्ट में कहा कि कुत्ते के काटने पर बिल्कुल फ्री में इलाज नहीं करते। मरीजों की सिर्फ कंसलटेशन फ्री की जाती है और एंटी रेबिज वैक्सीन उन्हें रियायती दर पर लगाई जाती है।

अभी हम ये नहीं कह सकते कि कुत्ते की मौत किसी वजह से हुई है। कुत्ता जब हमारे पास आया था तब उसेे चोट भी लगी थी। शायद लोगों ने उसे मारा होगा। कुत्ते का पोस्टमार्टम कर दिया गया है और उसका ब्रेन टेस्टिंग के लिए शुक्रवार को कसौली भिजवाएंगे।
-डॉ.जेसी कोचर,अध्यक्ष, एसपीसीए

4 घंटे बाद आए डॉग कैचर

Heirless Dogs Terror in Chandigarh

बुधवार को सेक्टर-20 में 30 से ज्यादा लोगों को लावारिस कुत्तों ने काट लिया। ये सब नगर निगम की लापरवाही से हुआ। कुत्तों के काटने की घटनाएं एकाएक बढ़ने की सूचना मिलने पर भी निगम के डॉग कैचर समय पर नहीं पहुंचे।

इस बारे में सेक्टर-20 निवासी कृष्ण कुमार ने बताया कि उनकी पत्नी को सुबह 5.40 बजे कुत्ते ने काटा था। उन्होंने कुछ ही देर बाद पीसीआर को फोन कर दिया था।

पीसीआर तो मौके पर पहुंच गई, लेकिन डॉग कैचर सूचना देने के बाद भी सुबह 11 बजे तक नहीं आए। जब तक उनकी टीम पहुंची तब तक कुत्ते कई लोगों को अपना शिकार बना चुके थे।

कृष्ण ने कहा कि अगर उस दिन डॉग कैचर टाइम पर पहुंचते तो बहुत से लोगों को कुत्तों का शिकार होने से बचाया जा सकता था।

अस्पताल में जख्म धोने का साबुन नहीं

Heirless Dogs Terror in Chandigarh

कुत्ते के काटने के बाद लोग अस्पताल में अव्यवस्था का भी शिकार हुए। कृष्ण ने बताया कि वे अपनी पत्नी को इलाज के लिए फौरन सेक्टर-16 के जनरल अस्पताल ले गए। अस्पताल जब पहुंचे तो वहां जख्म धोने के लिए स्टाफ के पास साबुन ही नहीं था। वे फौरन दुकान से जाकर साबुन ले आए। इसके बाद स्टाफ ने कहा कि जख्म धोने की जगह नहीं है।

स्टाफ वॉशरूम में उन्होंने जख्म को धोने से मना कर दिया और कहा कि आप घर जाकर जख्म को धो लेना। कृष्ण ने जब स्टाफ के इस रवैये पर विरोध जताया तब कहीं जाकर उनकी पत्नी का इलाज शुरू हुआ। जबकि कुत्ते के काटने पर सबसे पहला स्टेप ही यही होता है कि जख्म को साबुन व पानी से धोया जाए।

भय में सेक्टर के लोग

Heirless Dogs Terror in Chandigarh

कुत्ते की मौत के बाद इलाके के लोगों में काफी भय पैदा हो गया। वीरवार शाम को नगर निगम के सुपरिंटेंडेंट स्लाटर हाउस डॉ.एमएस कंबोज सेक्टर-20 के लोगों से मिलने पहुंचे थे।

यहां उन्होंने लोगों को जल्द से जल्द इलाज शुरू करवाने को कहा। इतना ही नहीं कुछ युवकों ने तो डॉ.कंबोज से मिलने के बाद अपना इलाज शुरू करवाया।

आवारा कुत्तों पर कोई कंट्रोल नहीं

Heirless Dogs Terror in Chandigarh
सेक्टर-20 के नवदीप का कहना था कि नगर निगम का आवारा कुत्तों पर कंट्रोल नहीं है। इसी कारण आए दिन लोग कुत्तों के शिकार हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि कई सालों से डॉग पौंड बनाने का काम अधर में लटका पड़ा है। बुधवार को नवदीप की बेटी को भी कुत्ते ने काटा। नवदीप ने कहा कि जब उनकी बेटी को इंजेक्शन लगते हैं तो उसका दर्द उनसे देखा नहीं जाता।

ये कहते हैं अधिकारी

Heirless Dogs Terror in Chandigarh
कई बार कुत्तों को पकड़ने वाली टीम किसी दूसरी जगहों पर भी लगी होती हैं। इसलिए हो सकता है लोगों को ऐसी समस्या आई हो।
-राजीव गुप्ता,ज्वाइंट कमिश्नर, नगर निगम
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