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दिल के मरीज : पहले 70 फीसदी मर जाते थे, अब 70 फीसदी बच जाते हैं

Tue, 31 Dec 2019 01:36 AM IST
Panchkula bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Tue, 31 Dec 2019 01:36 AM IST
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Heart patients: Earlier 70 percent used to die, now 70 percent are left
चंडीगढ़। पीजीआई के एडवांस कॉर्डियक सेंटर के विभागाध्यक्ष डॉ. यशपाल शर्मा ने कहा कि एक दशक पहले 100 में से 70 फीसदी हार्ट के गंभीर मरीजों की मौत हो जाती थी। सिर्फ 30 फीसदी ही बचते थे। एक दशक के दौरान उनकी टीम ने पेशेंट केयर के दृष्टिकोण में बदलाव किया। इससे अब 70 फीसदी मरीजों की जान बच जाती है।
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उन्होंने बताया कि दिल के रोगों से ग्रसित मरीजों में मधुमेह, बीपी व किडनी के रोग होने के साथ-साथ उनकी उम्र भी ज्यादा होती थी। ऐसे मरीजों का दिल के साथ-साथ उनकी दूसरी बीमारियों का भी इलाज किया। इससे उनमें चारों तरह से फायदा मिला। इसके लिए दूसरे एक्सपर्ट की मदद ली र्गई और उसका रिजल्ट भी सामने है। आमतौर पर हार्ट इंस्टीट्यूट में यदि इस तरह का कोई मरीज आता है तो वहां पर सिर्फ हार्ट पर ध्यान दिया जाता है।
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उनके मुताबिक साल 2007 के बाद कॉडियोजेनिक शॉप व एक्यूट कोरोनरी सिंड्रोम्स (एसीएस) के चलन को देखने, अध्ययन के लिए एक योजनाबद्ध रिसर्च एथिकल क्लीयरेंस के साथ शुरू की गई। शुरुआती तौर पर एसीएस आबादी में वर्ष 2012 तक मृत्यु दर 16 प्रतिशत थी, जो अब घटकर छह से सात प्रतिशत रह गई है। इसी तरह कॉडियोजेनिक शॉप में मृत्यु दर 36 से 40 प्रतिशत थी, जो अब 30 प्रतिशत तक आ गई है। उन्होंने यह भी बताया कि दिल के मरीजों में होमोग्लोबिन कम होने से जान जाने का खतरा ज्यादा होता है, इसलिए उन्होंने ऐसे मरीजों में होमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ाकर उपचार करने में सफलता प्राप्त की।
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दिल को तंदरुस्त रखना है तो ये अपनाएं तरीका..
हफ्ते में कम से कम 150 मिनट का शारीरिक व्यायाम करें।
तनावमुक्त के लिए मेडिटेशन व योगक्रिया करें।
चीनी व उससे बने खाद्य पदार्थों का सेवन कम से कम करें।
फल के साथ संपूर्ण अनाज का सेवन करें।
नमक का प्रयोग कम से कम करें।
वजन न बढ़ने दें और शराब व धूम्रपान न करें।
पर्याप्त नींद लें। दवाई को बिल्कुल न मिस करें।
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