चंडीगढ़: नगर निगम चुनाव की घोषणा पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, 23 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
शिरोमणि अकाली दल के महासचिव शिव कुमार व आम आदमी पार्टी के नेता शकील मोहम्मद ने चंडीगढ़ निगम चुनाव के लिए वार्ड आरक्षित करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
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नगर निगम चुनाव की घोषणा पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने गुरुवार को फिर रोक लगा दी। हाईकोर्ट ने यह फैसला वार्ड आरक्षण प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान लिया। याचिका पर अब अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी। बता दें कि शिरोमणि अकाली दल (शिअद) महासचिव शिव कुमार और आम आदमी पार्टी (आप) के नेता शकील मोहम्मद ने चंडीगढ़ निगम चुनाव के लिए वार्ड आरक्षण की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि 2011 से 2021 के बीच शहर में कई कॉलोनियों को तोड़ा व हटाया गया है।
कई कॉलोनियां ऐसी हैं, जो अब अस्तित्व में ही नहीं हैं। वार्ड आरक्षित करते हुए इन कॉलोनियों की जनसंख्या को भी आधार बनाया गया है, जो गलत है। याची ने इस संबंध में आरटीआई के माध्यम से सूचना मांगी और पूछा कि एरिया के अनुसार वार्ड की जनसंख्या की जानकारी दी जाए। जवाब में एरिया के अनुसार जानकारी न देकर वार्ड के अनुसार जानकारी दी गई।
याचिका में सवाल किया गया है कि 2011 की जनसंख्या को आधार बनाकर कैसे वार्ड आरक्षित किए जा सकते हैं? यह भी कहा है कि वार्ड 7, 16, 19, 24, 26, 28 व 31 को इसी प्रकार आरक्षित रखने का फैसला लिया गया है। याचिका में हाईकोर्ट से अपील की गई कि वार्ड आरक्षित करने के चुनाव आयोग के 19 अक्तूबर के फैसले को खारिज किया जाए। साथ ही आरक्षण के लिए जनगणना को ध्यान में रखते हुए, जो कॉलोनियां अस्तित्व में नहीं हैं, उनकी जनसंख्या को हटाकर देखा जाए कि वार्ड आरक्षित होना है या नहीं। याचिका में यह भी मांग की गई कि याचिका लंबित रहने तक वार्ड आरक्षित करने के फैसले पर रोक लगाई जाए।
हाईकोर्ट ने प्रशासन को लगाई फटकार
बीते बुधवार को हाईकोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए निगम चुनाव की घोषणा पर सुबह रोक लगा दी थी लेकिन दोपहर बाद चंडीगढ़ प्रशासन के निवेदन पर रोक हटाते हुए गुरुवार को इस मामले पर सुनवाई का फैसला लिया था। गुरुवार को सुनवाई शुरू होते ही प्रशासन ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांग लिया।
हाईकोर्ट ने इस पर प्रशासन को फटकार लगाई और अधिकारियों को तलब कर लिया। दोपहर बाद हुई सुनवाई के दौरान प्रशासन अदालत को संतुष्ट करने में नाकाम रहा। इस पर हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई 23 नवंबर को तय करते हुए तब तक चुनाव की घोषणा पर रोक लगा दी।
आचार संहिता देर से लगेगी तो चुनाव में भी होगी देरी
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब चुनाव आयोग का गणित बिगड़ने की आशंका है। चुनाव आयोग ने 19 नवंबर को शहर में आचार संहिता लगाकर 19 दिसंबर को मतदान कराने की योजना बनाई थी लेकिन हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब आयोग को नए सिरे से योजना बनानी पड़ेगी। 23 नवंबर को हाईकोर्ट से आयोग को राहत मिलती है तो चुनाव दिसंबर के अंत तक कराने के लिए अधिकारियों को मशक्कत करनी पड़ेगी, वहीं अगर राहत नहीं मिली तो फिर इस साल आयोग के लिए नगर निगम चुनाव करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होगा।