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मिल गया लीवर ट्रांसप्लांट का विकल्प, जानिए क्या

Tue, 24 Jun 2014 11:54 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 24 Jun 2014 11:54 AM IST
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Health Research related to Stem Cells and Liver Diseases Treatment

ज्यादा शराब पीने से लिवर फेल होने के बाद मरीज की जान बचाने के लिए अभी तक सिर्फ ट्रांसप्लांट का ही विकल्प था। इसके लिए डोनर की भी तलाश करनी पड़ती थी।

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अब पीजीआई ने सात साल की रिसर्च के बाद ट्रांसप्लांट का विकल्प तलाश लिया है। स्टेम सेल तकनीक की मदद से डैमेज लिवर ठीक हो जाएगा। इस इंजेक्शन थैरेपी को जी-सीएसएफ नाम दिया गया है।

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क्या है जी-सीएसएफ

Health Research related to Stem Cells and Liver Diseases Treatment

मरीज के बोन मैरो में ग्रेनुलोकाइट-कोलोनी स्टिम्युलेटिंग फैक्टर (जी-सीएसएफ) के 12 घंटे के बाद पांच डोज दिए जाते हैं। इससे बोन मैरो में स्टेम सेल तेजी से बनने लगते हैं।

रक्त में इनकी संख्या बढ़ती है और ये लिवर के डैमेज हिस्से में एकत्र हो जाते हैं। इस तरह तीन महीने में सकारात्मक नतीजे मिलने लगते हैं। लिवर स्वस्थ हो जाता है।

रिसर्च टीम

इस तकनीक को विकसित करने में पीजीआई के हेप्टोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डा. वीरेंद्र सिंह, इंटरनल मेडिसिन के डाक्टर अरुण कुमार शर्मा, डा. लक्ष्मी, डा. आशीष भल्ला, डा. नवनीत शर्मा, डा. रतिराम शर्मा शामिल हैं।

सक्सेस रेट 78 फीसदी

Health Research related to Stem Cells and Liver Diseases Treatment

इस रिसर्च का सक्सेस रेट 78 फीसदी रहा। रिर्स के दौरान 23-23 मरीजों को दो ग्रुप बनाए गए। पहले ग्रुप को  जी-सीएसएफ की थैरेपी गई, जबकि दूसरे मरीजों को टरटरी केयर सेंटर में रखा गया है। पहले ग्रुप के 23 में से 18 मरीजों के लिवर में काफी सुधार देखा गया और वे अच्छी तरह से जिंदगी बिता रहे हैं।

पंजाब में एल्कोहलिक हेपेटाइटिस सबसे ज्यादा
प्रोफेसर डा. वीरेंद्र सिंह के अनुसार पीजीआई की हर ओपीडी में आधे से ज्यादा मरीज एल्कोहलिक हेपेटाइटिस के आते हैं। ज्यादा शराब पीने से इनके लिवर डैमेज हो जाते हैं। पंजाब से आने वाले मरीजों की संख्या सबसे अधिक है।

एक आंकड़े के मुताबिक देश में हर साल 60 हजार लोग लिवर डैमेज होने से मरते हैं। सिर्फ एक हजार लोग ही लिवर ट्रांसप्लांट कराने में सफल रहते हैं।

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