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Chandigarh News: हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी ने नॉमिनी होने के बावजूद पत्नी को नहीं दिया क्लेम, जुर्माना

Tue, 22 Oct 2024 06:46 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 22 Oct 2024 06:46 AM IST
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Health insurance company did not give claim to wife despite her being nominee, fined
चंडीगढ़। डेराबस्सी की कंचन वर्मा (42) के पति की मौत के बाद उसके नॉमिनी होने के बावजूद पॉलिसी का लाभ न मिलने और उस रकम का लोन अकाउंट में एडजस्ट न करना बीमा कंपनी को महंगा पड़ गया। इस पर शिकायतकर्ता ने उपभोक्ता आयोग में श्रीराम हाउसिंग फाइनेंस कंपनी और श्रीराम लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ केस दर्ज किया। आयोग ने कंपनियों को सेवा में कमी व गैरकानूनी ढंग से क्लेम खारिज करने का दोषी पाया। आयोग ने आदेश दिया कि श्रीराम हाउसिंग फाइनेंस का जो भी पेंडिंग है वह श्रीराम लाइफ इंश्योरेंस कंपनी भरेगी। शिकायतकर्ता को यह रकम 10 प्रतिशत ब्याज समेत लौटाने और प्रॉपर्टी के वास्तविक दस्तावेज वापस भी करने के आदेश भी दिए। वहीं, कंपनी को 30 हजार रुपये मानसिक तनाव और अदालती खर्च के मुआवजे के रूप में भरने होंगे। शिकायतकर्ता कंचन ने 2020 में दायर शिकायत के मुताबिक उसके पति अजय कुमार ने उक्त कंपनी से अगस्त 2018 में 16.70 लाख रुपये का प्रॉपर्टी लोन लिया था। इसके साथ ही कंपनी ने उन्हें डेथ क्लेम पॉलिसी भी बेची हुई थी। 20 साल के लिए यह लोन था जिसकी मासिक किश्त 19,472 रुपये थी। कंपनी ने उसके पति को लाइफ इंश्योरेंस के लिए ललचाया और उसे 20,695 रुपये किश्त देने को कहा। लोन रकम बढ़ कर 17.67 लाख रुपये हो गई थी। इस पर लोन की राशि में से 83 हजार रुपये पहले ही काट लिए गए थे। हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में कंचन नॉमिनी थी। शिकायत के मुताबिक अगर मौत होने हो जाए तो लाइफ इंश्योरेंस की रकम हाउसिंग लोन में एडजस्ट हो जानी थी। 20 जुलाई 2020 को कंचन के पति की मौत हो गई थी। ऐसे में शिकायतकर्ता ने लोन अकाउंट को एडजस्ट करने की मांग की। हालांकि यह रकम एडजस्ट करने की बजाय शिकायतकर्ता से लोन रकम भरने के लिए कहा गया। उस दौरान उनके पति का कोई मेडिकल एग्जामिनेशन नहीं करवाया गया और सिर्फ दस्तावेज लिए। मगर मौत के बाद बीमारियों का हवाला दे क्लेम से किया गया। महिला के मुताबिक पॉलिसी लेने के दौरान वह किसी बीमारी से पीड़ित नहीं थे।
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