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आपको कैसे लगी नशे की लत, स्वास्थ विभाग करेगा पता, अपनाएगा जांच का ये तरीका
Sat, 31 Oct 2020 01:51 PM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Sat, 31 Oct 2020 01:51 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : सोशल मीडिया
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पंजाब के युवाओं को नशे की आदत कैसे लगी, यह जानने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। स्वास्थ्य विभाग ऐसे मरीजों के पेशाब की जांच कराकर आदत डालने वाली दवाओं और अन्य नशीले पदार्थों के उपयोग की जानकारी ले सकेगा। अभी विभाग ने सूबे के दो जिलों संगरूर और तरनतारन में पायल प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया है।
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पंजाब के युवाओं में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति को देखते हुए पंजाब सरकार लगातार इस पर अंकुश लगाने के प्रयास कर रही है। यदि सब कुछ ठीक ठाक रहा तो भविष्य में इसे अन्य जिलों में भी शुरू किया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने बताया कि अब तक चार हजार से अधिक मरीजों की जांच की जा चुकी है, जिससे उनके शरीर में आदत डालने वाली दवाएं और नशीले पदार्थों की तीव्रता की जांच की जा सके।
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इस जांच के अनुसार उनका मनोरोग विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा इलाज करवाया जा सके। इस प्रोग्राम का मुख्य उद्देश्य इन नशामुक्ति और पुनर्वास केंद्रों की निगरानी की तरफ ध्यान केंद्रित करना है, जिससे मरीजों को उनकी डॉक्टरी जरूरतों के अनुसार मानक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा सकें।
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35 सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में भी शुरू हुई व्यवस्था
यह सेवाएं 35 सरकारी नशामुक्ति केंद्रों और 199 सरकारी ओट क्लीनिकों के नेटवर्क द्वारा दी जा रही हैं और साथ ही राज्य में 135 निजी नशामुक्ति केंद्रों को भी इलाज के लिए अधिकृत किया गया है। नशामुक्ति मुहिम में लोगों को नशामुक्ति इलाज सेवाएं मुहैया करवाने के लिए एक प्रोग्राम में पीड़ितों का विश्वास बनाए रखने के लिए इन दो जिलों के केंद्रों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किए गए हैं।
5.95 लाख मरीज हुए पंजीकृत
अब तक 5.95 लाख मरीजों को नशामुक्ति प्रोग्राम के अंतर्गत पंजीकृत किया गया है। मरीजों को इलाज मुहैया करवाने के लिए 9 केंद्रीय जेलों में भी यह मुफ्त सेवाएं मुहैया करवाई जा रही हैं। सभी के लिए मानसिक स्वास्थ्य बड़े स्तर पर निवेश, बड़े स्तर पर सुविधाएं मुहैया करवाना ही इस प्रोग्राम का मुख्य लक्ष्य है।