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Chandigarh News: स्कूटी फिसलने से चली गई थी आंख की रोशनी, अब बीमा कंपनी को देना होगा 28 लाख का हर्जाना
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चंडीगढ़। जिला उपभोक्ता आयोग ने ऑफिस जाते वक्त स्कूटी फिसलकर गिर जाने से व्यक्ति की एक आंख की रोशनी चले जाने और बाद में इलाज का मुआवजा न देने के मामले में सुनवाई करते हुए बीमा कंपनी को सेवा में कोताही बरतने का आरोपी करार दिया है। साथ ही कंपनी को आदेश दिए हैं कि शिकायतकर्ता को 28 लाख रुपये मुआवजा दिया जाए। वहीं, मानसिक उत्पीड़न के लिए 20 हजार रुपये और केस में खर्च हुए 10 हजार रुपये देने के आदेश दिए हैं।क्या था मामला :
मनीमाजरा निवासी हरमेश गोयल को जिला उपभोक्ता आयोग को दी शिकायत में बताया कि अगस्त 2021 में उन्होंने स्टार हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी से एक्सीडेंट केयर इंश्योरेंस पॉलिसी ली थी। पॉलिसी के करीब 10 माह बाद जब वह घर से ऑफिस के लिए स्कूटी से जा रहे थे तो स्कूटी फिसलने से उसकी बाईं आंख में कोई नुकीली चीज लग गई। इस कारण उसकी आंख की रोशनी चली गई। साथ घुटने में भी चोट आई। हादसे में जख्मी होने के बाद हरमेश गोयल को तुरंत पीजीआई लेकर जाया गया। आंख की रोशनी के लिए डॉक्टर ने सर्जरी की। पहली बार आराम न मिलने के कारण पीजीआई के डॉक्टरों की ओर से तीन माह बाद फिर से सर्जरी की गई।
शिकायतकर्ता ने बीमा कंपनी को अस्पताल का पंजीकरण कार्ड और मेडिकल प्रमाणपत्र, पीजीआई बोर्ड की ओर से दिया, स्थायी विकलांगता प्रमाणपत्र की प्रतियां भेजते हुए मुआवजे की बात कही। वहीं, शिकायतकर्ता ने दवाइयों समेत बेड चार्ज के पैसे देने की बात कही थी। मगर बीमा कंपनी पैसे देने में कोताही बरत रही थी। मामले की सुनवाई करते हुए जिला उपभोक्ता आयोग ने स्टार हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी को शिकायतकर्ता को 28 लाख रुपये मुआवजा देने के आदेश दिए हैं।
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मनीमाजरा निवासी हरमेश गोयल को जिला उपभोक्ता आयोग को दी शिकायत में बताया कि अगस्त 2021 में उन्होंने स्टार हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी से एक्सीडेंट केयर इंश्योरेंस पॉलिसी ली थी। पॉलिसी के करीब 10 माह बाद जब वह घर से ऑफिस के लिए स्कूटी से जा रहे थे तो स्कूटी फिसलने से उसकी बाईं आंख में कोई नुकीली चीज लग गई। इस कारण उसकी आंख की रोशनी चली गई। साथ घुटने में भी चोट आई। हादसे में जख्मी होने के बाद हरमेश गोयल को तुरंत पीजीआई लेकर जाया गया। आंख की रोशनी के लिए डॉक्टर ने सर्जरी की। पहली बार आराम न मिलने के कारण पीजीआई के डॉक्टरों की ओर से तीन माह बाद फिर से सर्जरी की गई।
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शिकायतकर्ता ने बीमा कंपनी को अस्पताल का पंजीकरण कार्ड और मेडिकल प्रमाणपत्र, पीजीआई बोर्ड की ओर से दिया, स्थायी विकलांगता प्रमाणपत्र की प्रतियां भेजते हुए मुआवजे की बात कही। वहीं, शिकायतकर्ता ने दवाइयों समेत बेड चार्ज के पैसे देने की बात कही थी। मगर बीमा कंपनी पैसे देने में कोताही बरत रही थी। मामले की सुनवाई करते हुए जिला उपभोक्ता आयोग ने स्टार हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी को शिकायतकर्ता को 28 लाख रुपये मुआवजा देने के आदेश दिए हैं।
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