फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   hcs paper leak case truth revealed

HCS पेपर लीकः जांच में कई खुलासे, अगर ऐसा न होता तो मामला न खुलता

Sun, 21 Jan 2018 10:30 AM IST
रूबी सिंह/अमर उजाला, चंडीगढ़
रूबी सिंह/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 21 Jan 2018 10:30 AM IST
विज्ञापन
hcs paper leak case truth revealed
बातचीत करते आरोपी सुनीता - फोटो : अमर उजाला
एचसीएस (जूडीशियल) परीक्षा के पेपर लीक मामले का शायद कभी खुलासा ही नहीं होता, अगर पुलिस के हाथ ये सुराग नहीं लगता। अगर पंचकूला निवासी और आरक्षित वर्ग की टॉपर सुशीला पिंजौर निवासी एडवोकेट सुमन को वह ऑडियो रिकार्डिंग नहीं भेजती, जिसमें सुशीला और सुनीता के बीच पेपर लीक को लेकर बातचीत थी। सुनीता ने वह रिकार्डिंग सुनी और सुशीला से बात की तो उसने उसे सुनीता के पास पेपर होने की बात कही।
विज्ञापन


इसके बाद पेपर हुआ तो उसमें सुनीता और सुशीला अपने-अपने वर्ग में टॉपर बनीं। इसके बाद सुमन ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की साइट पर इसकी जानकारी दी और इस संबंध में याचिका दायर की। जूडीशियल परीक्षा का पेपर लीक होने की विजिलेंस जांच करवाई गई और उसमें इसकी पुष्टि होने पर हाईकोर्ट के आदेश पर ही चंडीगढ़ पुलिस की एक स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम बनाकर इसकी जांच सौंपी गई।
विज्ञापन


20 सितंबर 2017 को सुमन की शिकायत पर रजिस्ट्रार रिक्रूटमेंट डॉ. बलविंदर शर्मा, नई दिल्ली निवासी सुनीता और पंचकूला निवासी सुशीला के खिलाफ सेक्टर-3 थाने में आपराधिक धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। इसके बाद पुलिस ने सबसे पहले सुनीता को नौ नवंबर 2017 को गिरफ्तार किया। इसके बाद 28 दिसंबर को हाईकोर्ट के पूर्व रजिस्ट्रार डॉ. बीके शर्मा और 14 जनवरी को सुशीला को गिरफ्तार किया।
विज्ञापन
विज्ञापन


फिलहाल तीनों न्यायिक हिरासत में हैं। एसआईटी ने परीक्षा की टॉपर रही सुनीता और डॉ. शर्मा के खिलाफ 5 जनवरी को 2140 पेज का चालान दाखिल किया था। पुलिस चालान के मुताबिक हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार रिक्रूटमेंट रहे डॉ. शर्मा ने ही पेपर और उसकी आंसर शीट 10 जुलाई को सुनीता को दी थी। हालांकि, उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी कि उसने इसे आगे लीक कर दिया है और उसने इसे एक से डेढ़ करोड़ रुपये में बेचा है।

ऐसे हुआ पेपर लीक का खुलासा
पिंजौर निवासी सुमन, सुशीला और सुनीता तीनों सेक्टर-24 स्थित एक ही कोचिंग सेंटर में पढ़ाई कर रही थी। तीनों ने एचसीएस जूडीशियल के 109 पदों के लिए आवेदन किया था। परीक्षा की तैयारी के दौरान सुमन की सुशीला से दोस्ती हो गई। सुशीला कोचिंग में होनी वाली क्लास की ऑडियो नोट्स बनाने के लिए रिकार्ड करती थीं। इसी को लेकर एक दिन सुशीला ने सुमन को एक ऑडियो क्लिप भेज दी, जिसमें वह एक महिला से डेढ़ करोड़ में पेपर और उसकी आंसर शीट को लेकर बात कर रही थी।

इसे लेकर सुमन ने सुशीला से पूछा तो उसने वह ऑडियो क्लिप डिलीट कर दी। जब जोर देकर पूछा गया तो उसने उसे पेपर लीक होने की बात कही। सुशीला ने सुमन को छह सवाल भी बताए, जो परीक्षा में आने थे। 16 जुलाई को जब पेपर हुआ तो उसने वहीं सवाल थे, जो उसे सुशीला ने बताए थे। सुमन ने पेपर के बाद इसकी जानकारी पति को दी और उन्होंने इसकी शिकायत पुलिस और हाईकोर्ट की प्रशासनिक साइट पर दी।

पेपर से एक हफ्ता पहले शर्मा ने दिया था पेपर
पुलिस चालान के मुताबिक डॉ. बलविंदर शर्मा ने सुनीता को 10 जुलाई 2017 को पेपर सौंपा था। बलविंदर खुद इस दिन उसे सेक्टर-24 में मिलने गए थे। सुनीता ने डॉ. शर्मा को सेक्टर-23/24 की डिवाइडिंग रोड पर बुलाया था। शाम को 7 से 8 के बीच डॉ. शर्मा उससे मिलने गए थे। वहीं, उन्होंने सेक्टर-24 स्थित एक पार्क के पास सुनीता को पेपर दिया था। साथ ही उसकी आंसर शीट भी दी थी।

सुनीता ने एक से डेढ़ करोड़ रुपये में बेचा पेपर
10 जुलाई को सुनीता के हाथ में पेपर आने के एक-दो दिन बाद इसे सुशीला को दिखाया था। उसने उसे कुछ सवाल बताए और उसके जवाब भी दिखाए। इसके बाद सुनीता ने सुशीला से ऐसे कैंडीडेट तलाश कर लाने को कहा, जो पेपर और उसकी आंसर शीट के एक से डेढ़ करोड़ रुपये दे सके। इसके बाद पेपर आगे किसी किस को बेचा फिलहाल इसकी जांच जारी है।

नजदीकी रिश्तों पर सुनीता को दिया पेपर और आंसर शीट
पुलिस चार्जशीट के मुताबिक डॉ. शर्मा और सुनीता एक दूसरे को वर्ष 2014 से जानते थे। दिसंबर 2016 के बाद से दोनों साथ-साथ ब्रह्मसरोवर, थानेसर जिला कुरुक्षेत्र जाते थे। वहां ये दोनों अक्सर जाट धर्मशाला में रुकते थे। इसके बाद ये दोनों मार्च, अप्रैल, मई और जून 2017 में भी बाहर साथ-साथ घूमने गए थे। ये दोनों जहां भी जाते थे, शर्मा वहां अपने और अपनी पत्नी के नाम पर कमरा बुक करवाते थे, जबकि उनके साथ हर बार सुनीता होती थी।

वहीं, डॉ. शर्मा हाईकोर्ट से सुनीता सेक्टर-18 स्थित जिस मंदर में रहती थी, वहां भी अक्सर उससे मिलने जाते थे। खास बात यह है कि शर्मा जब भी सुनीता से मिलने जाते थे तो सरकारी गाड़ी की बजाय ओला, उबर की टैक्सी से जाते थे। वहीं, सुनीता जब डॉ. शर्मा से मिलने हाईकोर्ट में उनके आफिस जाती थी तो हर बार एक ही ऑटो से जाती थी।

बातचीत के लिए दूसरों के नाम पर लिए पांच सिम
सुनीता और डॉ. शर्मा ने फरवरी 2017 से अपने-अपने पर्सनल फोन पर बातचीत बंद कर दी थी। हालांकि, इससे पहले दोनों के बीच पिछले एक साल में साढ़े सात सौ से अधिक बार बातचीत और मैसेज भेजे गए थे। फरवरी में सुनीता ने अपनी रूममेट की आईडी से दो, कैंटीन संचालक नरेश शर्मा की आईडी से एक, जिस ऑटो से वह हाईकोर्ट जाती थी, उसके जरिए किसी और की आईडी से भी एक और एक जियो के मैनेजर की आईडी पर जियो सिम लिए थे। उसने सभी से लोकल आईडी न होने पर पढ़ाई के लिए सिम दिलाने की बात कही थी। इनमें से उसने कुछ सिम डॉ. शर्मा को दिए थे। फरवरी के बाद से जुलाई तक दोनों में 1152 बार इन नंबरों पर बात हुई। इनकी पूरी डिटेल पुलिस ने चालान में पेश की है।

एवरेज स्टूडेंट बनीं टॉपर
पुलिस चालान के अनुसार सुनीता और सुशीला एवरेज स्टूडेंट थीं। सेक्टर-24 स्थित ज्यूरिस्ट अकेडमी जहां से दोनों कोचिंग लेती थी, वहां होने साप्ताहिक टेस्ट में दोनों के बहुत कम नंबर आते थे। कोचिंग सेंटर संचालक के अनुसार दोनों पिछले कई वर्षों से सरकारी नौकरी के लिए तैयारी कर रही थी, लेकिन कभी कोई परीक्षा पास नहीं कर सकी। बावजूद इसके जब दोनों ने एचसीएस जूडीशियल परीक्षा पास की तो सभी चकित रह गए थे। सुनीता और सुशीला के खिलाफ कोचिंग सेंटर संचालक सुरेंद्र भारद्वाज को भी गवाह बनाया गया है। सुनीता 20 तो सुशीला 15 साल से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रही थी।

सुमन से मांगे थे एक करोड़ रुपये
15 जुलाई 2017 को सुशीला ने सुमन और सुनीता को सेक्टर-17 के सिंधी स्वीट्स में दोपहर दो से ढाई बजे के आसपास मिलवाया था। वहां सुनीता ने सुमन से पेपर के बदले एक करोड़ रुपये की डिमांड की थी। सुमन ने इससे इंकार कर दिया था। इस पर दोनों में लंबी बातचीत के बाद 10 लाख रुपये में बात तय हुई। शाम को सुमन ने सुशीला को फोन किया और बताया कि सुनीता को उस पर शक है और उसने उसे पेपर देने से इंकार कर दिया है।


कुछ अन्य लोग भी संदेह के दायरे में
जांच पड़ताल के दौरान सुनीता और सुशीला की मदद करने वाले कुछ लोगों का नाम भी सामने आया है। इसमें सेक्टर-18 के मंदिर प्रधान के अलावा सुशीला के पति जो कि हरियाणा पुलिस में पंचकूला में एसआई के पद पर तैनात है, उसका नाम भी सामने आया है। फिलहाल, जांच टीम इनसे पूछताछ कर रही है।

पुलिस की ओर से बनाए गए अहम गवाह
- हरियाणा पब्लिक सर्विस कमीशन (एचपीएससी) के चेयरमैन और सेक्रेटरी
- डॉ. शर्मा के हाईकोर्ट स्थित कार्यालय में काम करने वाले कुछ कर्मी
- जिस प्रिंटिंग प्रेस में पेपर छपा उसके कर्मी
- जिस लोगों की आईडी पर सुनीता ने सिम लिए और जिन्होंने सिम जारी किया उन्हें भी गवाह बनाया
- कैब ड्राइवर और ऑटो चालक को भी बनाया गवाह

अहम सबूत
- डॉ. शर्मा और सुनीता के बीच की पिछले एक साल की कॉल डिटेल
- दोनों की अज्ञात नंबरों के जरिए फरवरी के बाद से लेकर अगस्त तक की हजार से ज्यादा बार की कॉल डिटेल
- कॉल डिटेल को प्रूफ करने के लिए टेलीकॉम कंपनी के एक्सपर्ट
- ओला और उबर कैब रिकार्ड
- रजिस्ट्रार कार्यालय का रिकार्ड
- बीके शर्मा के आफिस का लैपटॉप, पैन ड्राइव, प्रिंटर आदि
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed