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बाल विवाह कानून मुस्लिम जोड़े पर लागू नहीं: हाईकोर्ट

Sun, 30 Sep 2018 04:02 AM IST
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 30 Sep 2018 04:02 AM IST
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HC says Child marriage law does not apply to Muslim couples
इलाहाबाद हाईकोर्ट

मुस्लिम जोड़े पर बाल विवाह निषेध अधिनियम लागू नहीं होता है। यदि दोनों ने यौन परिपक्वता हासिल कर ली है और 15 साल से ज्यादा उम्र है तो वे परिवारीजनों की मर्जी के खिलाफ जाकर निकाह कर सकते हैं। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यह फैसला प्रोटेक्शन होम में मौजूद 16 साल की पत्नी को वापस पाने के लिए पति की ओर से दाखिल की गई याचिका पर सुनाया।

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याचिका दाखिल करते हुए मेवात निवासी मोहम्मद शमीम ने हाईकोर्ट को बताया कि बीते 3 जून को उसने शादी की थी और इसके बाद सुरक्षा के लिए हाईकोर्ट के समक्ष याचिका दाखिल की थी। हाईकोर्ट के आदेश पर दोनों को प्रोटेक्शन होम में रखा गया।
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इसी बीच याची के खिलाफ उसकी पत्नी के परिजनों ने मामला दर्ज करवा दिया था। पुलिस ने याची को गिरफ्तार कर लिया था और बाद में निचली कोर्ट ने जमानत दे दी थी। जब याची ने अपनी पत्नी को प्रोटेक्शन होम से वापस लाने का प्रयास किया तो पुलिस ने उसके नाबालिग होने की बात कहते हुए उसकी कस्टडी सौंपने से इनकार कर दिया। याची ने हाईकोर्ट की शरण ली। 
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हाईकोर्ट ने इस याचिका पर कहा कि मुस्लिम धर्म की अकील अहमद की प्यूबेरिटी एंड मेजोरिटी पुस्तक के अनुसार यौन परिपक्वता पाने के बाद कोई भी लड़का या लड़की जिससे चाहे शादी कर सकता है। कोर्ट ने कहा कि निकाह मुस्लिम पर्सनल लॉ एप्लिकेशन एक्ट 1937 के तहत हुआ है जो एक स्पेशल एक्ट है। बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 एक सामान्य एक्ट है।

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