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Hindi News ›   Chandigarh ›   HC rejected demand for appointment on compassionate grounds on basis of father death in Operation Blue Star

Punjab: ऑपरेशन ब्लू स्टार में पिता की मौत के आधार पर मांगी अनुकंपा पर नियुक्ति, हाईकोर्ट ने दावा किया खारिज

Mon, 18 Dec 2023 09:35 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Mon, 18 Dec 2023 09:35 PM IST
सार

हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता 1998 में बालिग हुआ और सरकार द्वारा उसका दावा 2010 में खारिज कर दिया गया था। हाईकोर्ट ने कहा कि लगभग दशकों से अधिक समय के बाद याचिकाकर्ता को अनुकंपा नियुक्ति की पेशकश नहीं की जा सकती।

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HC rejected demand for appointment on compassionate grounds on basis of father death in Operation Blue Star
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने 1984 के ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान पिता की मौत होने की दलील देते हुए अनुकंपा नियुक्ति की मांग को लेकर बेटे की दाखिल याचिका को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति निराश्रित परिवार को तत्काल वित्तीय कठिनाइयों से बाहर आने के लिए दी जाती है।

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बठिंडा निवासी बाल अमृत सिंह ने अमृतसर के श्री हरमंदिर साहिब में 1984 के ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान पिता की मृत्यु को आधार बनाते हुए अनुकंपा के आधार पर नियुक्त करने के लिए केंद्र सरकार को निर्देश जारी करने की मांग की थी। याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता उस समय नाबालिग था और उसने आतंकवाद/दंगों में मारे गए व्यक्तियों के आश्रित परिवार के सदस्यों को अनुकंपा नियुक्ति देने के लिए सरकार द्वारा जारी परिपत्र के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति का दावा किया था। हालांकि सरकार ने याचिकाकर्ता द्वारा दिए गए दावे को यह कहते हुए खारिज कर दिया है कि ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान मरने वाले व्यक्ति आतंकवाद या दंगे के दौरान मारे गए व्यक्तियों की श्रेणी में नहीं आते।
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हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता 1998 में बालिग हुआ और सरकार द्वारा उसका दावा 2010 में खारिज कर दिया गया था। हाईकोर्ट ने कहा कि लगभग दशकों से अधिक समय के बाद याचिकाकर्ता को अनुकंपा नियुक्ति की पेशकश नहीं की जा सकती। यह नियुक्ति का नियमित तरीका नहीं है, बल्कि यह मृत सरकारी कर्मचारी के आश्रित को तत्काल वित्तीय कठिनाइयों से बाहर आने के लिए किया गया उपाय है। कोर्ट ने कहा कि कई साल बाद इस तरह की याचिका पर अनुकंपा नियुक्ति का आदेश जारी नहीं किया जा सकता। इसी के साथ हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।

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