हाईकोर्ट की फटकार, नौकरशाहों और नेताओं को बचाने में क्यों जुटे हैं हुडा व हरियाणा सरकार
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प्लॉटों की मल्टीपल अलॉटमेंट मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार व हुडा को फटकार लगाते हुए कहा कि आखिर क्यों नौकरशाहों और नेताओं को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। कोर्ट में आई 880 फाइलों में गड़बड़ी की दलीलों पर कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए इन सभी को सील करने के आदेश दिए हैं।
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने कहा कि इन मामलों की जांच के लिए अब जो कमेटी गठित की जाएगी उसमें हरियाणा सरकार और हुडा के अधिकारियों को सदस्य नहीं बनाया जाएगा।
मामले की सुनवाई आरंभ होते ही हुडा ने हाईकोर्ट को बताया कि जो हलफनामा उन्होंने दाखिल किया है उसे नजरअंदाज किया जाए और नए सिरे से हलफनामा दाखिल करने की अनुमति दी जाए। हाईकोर्ट ने इस पर हुडा को फटकार लगाते हुए कहा कि पहले ही आदेश का पालन कर हलफनामा दाखिल करने में तीन माह लगा दिए और अब फिर से मोहलत मांगी जा रही है।
इस दौरान हुडा के अधिकारी 880 फाइलों को लेकर पहुंचे थे जिसकी जांच की याचिकाकर्ता के वकील एचएस सेठी ने मांग की थी। सेठी ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने सैंपल के तौर पर कुछ फाइलों की जांच की है और इसमें पाया गया है कि वीआईपी लोगों को बचाने के लिए उनकी कैटेगरी में बदलाव किया गया है। इसके साथ ही ईडब्ल्यूएस कोटा की अलॉटमेंट मामले में दाखिल आय प्रमाणपत्रों पर भी सवाल उठाए। याची ने कहा कि कई नौकरशाहों और नेताओं को बचाने का प्रयास किया जा रहा है और यह खेल सरकार की शह पर हो रहा है।
कमेटी तय करेगी अलॉटमेंट के कौन हैं जिम्मेदार
हाईकोर्ट ने इस पर हरियाणा सरकार और हुडा को फटकार लगाते हुए कहा कि आखिर क्यों नौकरशाहों और नेताओं को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। कोर्ट ने कहा कि अब इसकी जांच एक कमेटी को सौंपी जाएगी जिसमें न तो हरियाणा सरकार के अधिकारी सदस्य होंगे और न ही हुडा के अधिकारी।
यह अधिकारी न केवल मल्टीपल अलॉटमेंट मामलों की जांच करेगी बल्कि यह भी जांच करेगी कि नाबालिग बच्चों के नाम अलॉटमेंट कैसे हुई। इसके साथ ही कमेटी इन अलॉटमेंट के लिए जिम्मेदार कौन है इसकी जिम्मेदारी भी तय करेगी।