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जाट आरक्षण मामले में प्रतिवादी बनेंगे सांगवान, याचिका दायर की
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 28 May 2016 10:06 AM IST
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जाट नेता हवा सिंह सांगवान
- फोटो : फाइल फोटो
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अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष सीमित के प्रधान हवा सिंह सांगवान ने हाईकोर्ट में प्रतिवादी बनाए जाने को लेकर अर्जी दायर की। भिवानी निवासी मुरारी लाल की जनहित याचिका पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा हरियाणा में जाटों समेत छह जातियों को आरक्षण दिए जाने पर लगाई गई रोक ने जहां प्रदेश में राजनीतिक हलचल तेज कर दी है, वहीं जाटों को आरक्षण दिलाने के लिए सक्त्रिस्य रही विभिन्न संघर्ष समितियों ने भी रणनीति बनानी शुरु कर दी है।
शुक्रवार को सांगवान ने अपनी अर्जी में कहा है कि जाट आरक्षण के मामले में हाईकोर्ट कोई भी फैसला देने से पहले उनका भी पक्ष सुने। अरजी में आगे कहा गया है कि उन्होंने जाट आरक्षण के मुद्दे पर 8 सितंबर, 2011 को पिछड़ा वर्ग आयोग के चेयरमैन के समक्ष रिप्रेजेंटेशन दिया था। इसके अलावा सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता (बीसी-2 सेक्शन) मंत्रालय के समक्ष भी रिप्रेजेंटेशन देकर जाटों को पिछड़े वर्ग में शामिल करने की मांग की थी। इसके बाद 12 फरवरी और 21 फरवरी, 2012 में भी उन्होंने मंत्रालय को रिप्रेजेंटेशन दिया था।
अर्जी में यह भी कहा गया है कि प्रार्थी जाटों को आरक्षण दिए जाने की मांग को लेकर सरकार के स्तर पर लगातार प्रयास करता रहा है। उल्लेखनीय है कि अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में भी अर्जी दायर कर कहा था कि हरियाणा सरकार द्वारा जाटों को दिए गए आरक्षण के खिलाफ यदि राजकुमार सैनी, अजय यादव, मुरारी लाल या अन्य कोई व्यक्ति केस दायर करता है तो कोर्ट इस मामले में कोई फैसला देने से पहले उनका पक्ष भी सुने।
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शुक्रवार को सांगवान ने अपनी अर्जी में कहा है कि जाट आरक्षण के मामले में हाईकोर्ट कोई भी फैसला देने से पहले उनका भी पक्ष सुने। अरजी में आगे कहा गया है कि उन्होंने जाट आरक्षण के मुद्दे पर 8 सितंबर, 2011 को पिछड़ा वर्ग आयोग के चेयरमैन के समक्ष रिप्रेजेंटेशन दिया था। इसके अलावा सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता (बीसी-2 सेक्शन) मंत्रालय के समक्ष भी रिप्रेजेंटेशन देकर जाटों को पिछड़े वर्ग में शामिल करने की मांग की थी। इसके बाद 12 फरवरी और 21 फरवरी, 2012 में भी उन्होंने मंत्रालय को रिप्रेजेंटेशन दिया था।
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अर्जी में यह भी कहा गया है कि प्रार्थी जाटों को आरक्षण दिए जाने की मांग को लेकर सरकार के स्तर पर लगातार प्रयास करता रहा है। उल्लेखनीय है कि अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में भी अर्जी दायर कर कहा था कि हरियाणा सरकार द्वारा जाटों को दिए गए आरक्षण के खिलाफ यदि राजकुमार सैनी, अजय यादव, मुरारी लाल या अन्य कोई व्यक्ति केस दायर करता है तो कोर्ट इस मामले में कोई फैसला देने से पहले उनका पक्ष भी सुने।
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