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प्रदेश को स्लम फ्री बनाएगी हरियाणा सरकार
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 15 Nov 2013 10:00 PM IST
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हरियाणा शहरी स्थानीय निकाय मंत्री सावित्री जिंदल ने कहा कि राज्य को स्लम-फ्री बनाने के लिए राजीव आवास योजना के तहत गरीब लोगों के लिए मकान बनाए जाएंगे।
इससे इन नागरिकों को आधारभूत नागरिक सुविधाओं के साथ सामाजिक सेवाएं भी उपलब्ध हो सकें। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत चार शहरों के लिए स्वीकृति केंद्र सरकार से मिल चुकी है।
वे यहां शहरी स्थानीय निकाय विभाग के उच्च अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रही थीं। उन्होंने कहा कि राजीव आवास योजना के तहत राज्य के रोहतक, सिरसा, यमुनानगर और अंबाला में इन मकानों का निर्माण किया जाएगा।
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गुड़गांव, फरीदाबाद, हिसार और पंचकूला में इस योजना को लागू करने के लिए प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है। योजना के तहत 609.46 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जाएगी।
मंत्री ने बताया कि रोहतक के लिए 95.89 करोड़, अंबाला के लिए 59.83 करोड़, सिरसा के लिए 95 करोड़ और यमुनानगर के लिए 60.37 करोड़ की राशि खर्च की जाएगी।
योजना के तहत पांच लाख की जनसंख्या से ऊपर वाले शहरो में हाउसिंग पर केंद्र सरकार द्वारा 50 फीसदी, राज्य सरकार द्वारा 25 फीसदी और 25 फीसदी लाभार्थी द्वारा खर्च किए जाएंगे।
आधारभूत संरचना पर केंद्र सरकार द्वारा 50 फीसदी, राज्य सरकार द्वारा 25 फीसदी और 25 फीसदी शहरी स्थानीय निकाय विभाग द्वारा खर्च किए जाएंगे।
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इससे इन नागरिकों को आधारभूत नागरिक सुविधाओं के साथ सामाजिक सेवाएं भी उपलब्ध हो सकें। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत चार शहरों के लिए स्वीकृति केंद्र सरकार से मिल चुकी है।
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वे यहां शहरी स्थानीय निकाय विभाग के उच्च अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रही थीं। उन्होंने कहा कि राजीव आवास योजना के तहत राज्य के रोहतक, सिरसा, यमुनानगर और अंबाला में इन मकानों का निर्माण किया जाएगा।
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गुड़गांव, फरीदाबाद, हिसार और पंचकूला में इस योजना को लागू करने के लिए प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है। योजना के तहत 609.46 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जाएगी।
मंत्री ने बताया कि रोहतक के लिए 95.89 करोड़, अंबाला के लिए 59.83 करोड़, सिरसा के लिए 95 करोड़ और यमुनानगर के लिए 60.37 करोड़ की राशि खर्च की जाएगी।
योजना के तहत पांच लाख की जनसंख्या से ऊपर वाले शहरो में हाउसिंग पर केंद्र सरकार द्वारा 50 फीसदी, राज्य सरकार द्वारा 25 फीसदी और 25 फीसदी लाभार्थी द्वारा खर्च किए जाएंगे।
आधारभूत संरचना पर केंद्र सरकार द्वारा 50 फीसदी, राज्य सरकार द्वारा 25 फीसदी और 25 फीसदी शहरी स्थानीय निकाय विभाग द्वारा खर्च किए जाएंगे।